उत्तर प्रदेश की मीडिया में भी कई तरुण तेजपाल है

तहलका की बदौलत पूरे देश में तहलका मचाने वाले तरुण तेजपाल को भले ही मीडिया और बीजेपी की मिलीभगत से उजागर किया गया हो लेकिन असल में यह उतना बड़ा मामला नहीं जितना बड़ा बताया/बनाया जा रहा है। दरअसल आप खुद ही अंदाज़ा लगाइये कि किसी लड़की के साथ वह महज सेकेंडो भर में क्या कर लेगा। वो भी लिफ्ट के अंदर अपनी ही बेटी की हमउम्र के साथ। शर्मसार तेजपाल नहीं बल्कि मुद्दा है। वाकया गोवा का है, सरकार बीजेपी की तो सब जल्दी-जल्दी हो रहा है, लेकिन उन तेजपालों का क्या होगा जो आज भी बड़ी सफाई से स्वच्छन्द टहल रहे हैं।
 
कहते हैं एक पुरूष के सार्थक जीवन में पत्नी का बहुत बड़ा योगदान होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में पत्नी नहीं बल्कि रखैलों की बदौलत कई चैनल चल रहे हैं। बाकायदा दिल्ली से विशेष विमान से सीधा मंत्री आवास और विधानसभा, एनेक्सी तक पहुंच रखने वाली ऐसी लड़कियां जो कि छिपे हुए तेजपालों की बदौलत फल-फूल और दलालों को फल फुला रही हैं। सच तो यह है कि ऐसे दलालों से अगर जर्नलिज्म लिखवा लिया जाए तो बगले झांकते फिरेंगे। लेकिन पारो की बदौलत दो वक्त की रोटी इकठ्ठा करने में  ऐसे मीडिया के दीमक लगे हुए हैं। एक बड़ा सवाल है कि सारी मीडिया को उठा कर देख लीजिए, कोई भी लड़की या लड़का अपना करियर मीडिया में शुरू करता है तो लड़की ही हमेशा क्यों आगे निकल जाती है। लड़का सिर्फ ब्रेकिंग ही नोट कराता रह जाता है जबकि कल आई हुई लड़की महज़ कुछ रात के बाद इंटर्न से सीधा एडिटर या बड़े पद पर आ जाती है, और लड़के सिर्फ मुंह ताकते रह जाते हैं। बात इतनी भर नहीं है 5 वर्षो में मेरी पगार 16 हज़ार हुई है जबकि मेरे साथ की लड़कियां 40 से 70 हज़ार तक पा रही हैं। पता नहीं ऐसा कौन सा पैकेज तैयार कर लेती है। 
 
खैर अब तेजपाल के मामले से लंगोट के ढीले पत्रकार थोडा सहमें ज़रूर हुए होंगे। अपनी अलग गाड़ी और रखैलों को अलग गाड़ी से भेजने में लग जायेंगे। यही हाल ब्यूरोक्रेसी में भी है और नेतागिरी में भी। एक हैरत वाली बात है कि आपको कोई भी राजनैतिक पार्टी में जो भी महिला नेता दिखाई देगी वह सुंदर, खूबसूरत ही होगी भले वह राजनीति का मतलब न जानती हो। ब्यूरोक्रेसी में भी खूब प्रमोशन का खेल होता है रातो रात फ़ाइल तैयार। तैनाती पहले से है तो प्रमोशन पक्का वर्ना नई तैनाती तो हो ही जायेगी। और तैनाती भी सिर्फ खूबसूरत महिलाओ/लड़कियों की होगी। अब समय आ चुका है मित्रों अगर असली पत्रकारिता को जीवित देखना चाहते हैं तो आप सब को आगे आना पड़ेगा और ऐसे तेजपालों को बेनकाब करना होगा। कोइ कब तक रोकेगा, कब तक टोकेगा। आखिरकार जीत तो असल पत्रकारिता की ही होनी है। हमारी महिला साथी पत्रकार ऐसी लड़कियों और महिलाओं को भी बेनकाब करें जो पत्रकारिता के नाम पर खुद को ना जाने क्या और पत्रकार को तेजपाल बना जाती है। 
 
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

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