उत्तर प्रदेश सरकार ने क्यों और कहाँ दबा रखी है निमेष आयोग की रिपोर्ट?

: अब तक उत्तर प्रदेश के गृह मंत्रालय तक नहीं पंहुची है रिपोर्ट : सूचना के अधिकार से हुआ खुलासा : दिनांक 23-11-12 को मैंने उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के जन सूचना अधिकारी से निमेष आयोग की रिपोर्ट एवं उस रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गयी कार्यवाहियों के सम्बन्ध में पांच बिन्दुओं पर सूचना माँगी थींl 30 दिनों से अधिक में सूचना न मिलने पर मैंने 07-01-13 को गृह विभाग के अपील अधिकारी को प्रथम अपील भेजीl

मैंने दिनांक 26-11-12 को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के कार्यालय के जन सूचना अधिकारी से भी निमेष आयोग की रिपोर्ट पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किये गए शासनादेशों की प्रतियाँ माँगी थींl मुख्य सचिव के कार्यालय के जन सूचना अधिकारी ने मेरा प्रार्थना पत्र गृह विभाग को स्थानांतरित कर दिया था।

इन्द्र राज सिंह, अनु सचिव एवं जन सूचना अधिकारी-गृह विभाग नें 07 मार्च 2013 के पत्र द्वारा मेरे सूचना के पत्र दिनांक 23-11-12, 26-11-12 एवं प्रथम अपील दिनांक 07-01-13 के सम्बन्ध में सूचित किया है कि निमेष जांच आयोग की रिपोर्ट गृह मंत्रालय में प्राप्त नहीं हुई हैl 23 सितंबर 2007 को लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद कोर्ट में बम ब्लास्ट के बाद इस मामले में तारिक और खालिद की गिरफ्तारी की जांच के लिए तत्कालीन बीएसपी सरकार ने 14 मार्च 2008 को  निमेश आयोग का गठन किया था।इसकी रिपोर्ट अखिलेश सरकार को 31 अगस्त 2012 को सौंप दी गयी थी।

अखिलेश सरकार अपने चुनावी वायदे को पूरा करने के लिए पूर्व में हुई आतंकी घटनाओं ,जिनमे कचहरी ब्लास्ट भी शामिल है में गिरफ्तार "निर्दोषों" को रिहा करने के लिए और तरीकों से  कोशिश कर रही है, परन्तु  कचहरी ब्लास्ट में कथित रूप से शामिल दोनों अल्पसंख्यक युवकों की गिरफ्तारी की जांच करने के लिए  बनायी  गयी जस्टिस आरo डीo निमेश आयोग की रिपोर्ट 31 अगस्त
2012 से अब तक आधे साल से ज्यादा समय हो जाने पर भी दबाये बैठी हैl उत्तर प्रदेश सरकार जस्टिस आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट 31 अगस्त 2012 से अब तक गृह मंत्रालय तक भी नहीं पहुंचा पाई हैl कारण चाहे जो भी हो परन्तु सरकार द्वारा निमेष जांच आयोग की रिपोर्ट अभी तक गृह मंत्रालय तक न पहुंचा पाने से सरकार की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह तो लगता ही हैl

भवदीया

उर्वशी शर्मा

सामाजिक कार्यकत्री एवं आरटीआई एक्टिविस्ट

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