उस दिन वाकई लगा कि बिक गए हैं मीडिया संस्थान, पूरा वाकया सुनें

सबसे पहले यशवंत जी को प्रणाम जिन्होंने लोगों को अपनी बात रखने के लिए ये मंच दिया है जिसका नाम है भडास4मीडिया. कुछ दिल में था, जिसे शब्दों के माध्यम से बयां करने जा रहा हूं। जब से छत्तीसगढ़ में रमन सरकार आयी है, तबसे तो छत्तीसगढ में मीडिया का रोल ही खत्म हो गया है. प्रदेश की मीडिया मैनेज हो चुकी है. ऐसा नही है कि यहां के सारे पत्रकार बिके हों लेकिन यह जरूर है कि कलम उनकी है, पर स्याही मालिक की जो अखबार या न्यूज चैनल का मालिक कहे, वही खबर चले। जहां प्रदेश की सरकार इन प्रादेशिक चैनलों को सालाना करोड़ों का विज्ञापन देती है तो वहीं कुछ प्राइवेट संस्थान भी विज्ञापन की मोटी रकम देते हैं और चैनल व संस्थान के बीच हो जाता है करार।

अब संस्थान चाहे जो कुछ भी अच्छा या बुरा करे, अखबार और चैनल सिर्फ उसकी अच्छाई दिखाएंगे। एक मामला बताता हूं जो छत्तीसगढ की न्यायधानी बिलासपुर से जुड़ा हुआ है।  27 जून को भोपाल से संचालित एक न्यूज चैनल में लगभग दो से ढाई बजे एक खबर ब्रेक होती है कि बिलासपुर के करगी रोड कोटा स्थित सीवी रमन यूनिवर्सिटी से पीजीडीसीए के सी प्लस प्लस का पर्चा लीक हो गया है। इस खबर पर चैनल के पत्रकार का फोनो भी होता है। मैं उस समय टीवी देख रहा था तो स्वाभाविक था कि मैं खबर की पुष्टि के लिए दूसरे चैनल भी देखूंगा। लगभग दस मिनट तक किसी चैनल में ऐसी कुछ खबर नहीं दिखी। फिर थोड़ी देर बाद एक और प्रादेशिक चैनल में वो खबर तीन बजे ब्रेक हुई।

मैंने फिर वही पहले वाला चैनल लगाया जिस पर ये खबर पहले ब्रेक हुई थी। इस चैनल पर पूरी खबर दिखाई जाती है कि कैसे इस न्यूज चैनल ने दलाल के माध्यम से जो इग्जाम दो बजे से होने वाला है उसका पेपर एक बजे ही सिर्फ तीन हजार रुपये में खरीद लिया। फिर जब दो बजे इग्जाम चालू हुआ तब चैनल के पत्रकार द्वारा उसी पर्चे को मिलाया गया तो पाया गया कि दोनों में एक जैसे ही प्रश्न आये थे। इतने में लाइट बंद हो गई और मैं मार्केट चला गया।

शाम को मैंने सोचा कि सीवी रमन विश्वविद्यालय में इतनी बडी गड़बड़ी हुई है तो भले ही थोड़ी देर से चले, सभी चैनलों में खबर तो आएगी ही। यही सोच कर मैं शाम 7 बजे से 10 बजे तक बार बार चैनल बदलता रहा लेकिन ये खबर सिर्फ दो चैनलों पर दिखी। फिर मैं यही सोचते हुए सो गया कि आखिर क्यों ये खबर छत्तीसगढ प्रदेश के नम्बर वन चैनल जो कहता है कि सवाल आपका है, उसमें क्यों नही चली?

मुझे बात समझ में नहीं आ रही थी क्योंकि मैं हमेशा रात 10 बजे से 11 बजे तक यही चैनल देखता हूं। और इसकी खबर देखे बिना सोता नही हूं। मैं सो गया। सुबह हो गई। घर पर अखबार आया। मैंने सभी अखबारों में देखा मगर सीवी रमन की खबर सिर्फ एक अखबार में दिखी। जो कि शुरू से ही सरकार के विरोध में खबर छापने के नाम से जाना जाता है।

मैंने अपने दोस्त से इस बारे में चर्चा की तो उसने बताया कि भाई बिलासपुर में मीडिया विज्ञापन के आगे खबरों को कोई जगह नहीं देती। सीवी रमन सभी चैनल और अखबारों को लाखों का सालाना विज्ञापन देती है तो कोई थोड़े ही उसके विरोध में छापेगा। अब मुझे बात समझने में देर न लगी क्योंकि अब मैं समझ चुका था कि मीडिया भी मैनेज हो सकती है।

मै पत्रकारों की बड़ी इज्जत करता हूं मेरा मकसद किसी की बुराई करना या किसी को ठेस पहुंचाना नहीं है लेकिन आशा करता हूं कि देश का हर पत्रकार अपनी जिम्मेदारियों का सतत निर्वहन करते हुए देश का नाम रोशन करेंगे क्योंकि देश के लोगों को पत्रकारों से बड़ी उम्मीदे और विश्वास है.

आपका

महेश सिंह गहलोत

एडवोकेट, हाईकोर्ट

बिलासपुर, छत्तीसगढ़

(उपरोक्त आलेख भड़ास के पास 1 जुलाई 2012 को आया था. भड़ास संचालकों की गिरफ्तारी, जेल भेजा जाना और फिर घर-आफिस पर छापेमारी के कारण इस आलेख का प्रकाशन रुका रहा. कृपया इसे देर से प्रकाशित किया गया आलेख मानें. -एडिटर, भड़ास4मीडिया)

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