उस मुस्लिम कांटेस्टबल ने दंगाइयों की बजाय अपने सीनियर पर गोली चला दी!

यशवंत जी, कुछ दिनों पहले मैंने आपकी प्रतिष्ठित साईट पर प्रत्रकार शेष नारायण सिंह का लेख पढा था… " सपा द्वारा दरोगा भर्ती मे १८% आरक्षण देना एक क्रन्तिकारी कदम" | मुझे लगता है कि शेषनारायण सिंह जी की मंशा सपा से कोई मलाईदार पद लेने की है इसलिए वो तथ्यों से परे जाकर सपा की चमचई कर रहे हैं | क्या आरक्षण देने से मुसलमानों का कल्याण हो जायेगा ? क्या इनकी सोच बदल जायेगी ? फिर सीरिया में तो सिर्फ मुसलमान ही हैं फिर भी रोज हजारों की संख्या में मुसलमान ही मुसलमानों का कत्लेआम क्यों कर रहे है ?

नीचे चित्र में जिसको आप देख रहे हैं उसका नाम है मोहम्मद अब्दुल कादिर है. यह भूतपूर्व पुलिस कांस्टेबल है. १९९० में हैदराबाद में दंगा हुआ. उस दंगे में जब इसके सीनियर ने इसे एक दंगाई भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया तो ये भीड़ पर गोली चलाने के बजाय उस सीनियर पर ही गोली चला बैठा. न्यायालय के द्वारा इसे आजीवन कारावास की सजा मिली है लेकिन अभी इसकी क्षमा याचना राष्ट्रपति के पास है.

इसको छुड़ाने के लिए बहुत से मुस्लिम संगठन लगे हुए हैं. यह चित्र उस समय का है जब उसे उसकी माँ के देहांत पर ७ दिनों के लिए पेरोल पर छोड़ा गया था. अब आप सोचिये की मुलायम उत्तर प्रदेश दरोगा भरती में मुसलमानों को १८% आरक्षण देने जा रहे हैं!! सोचिये!! ज्यादा जानकारी के लिए google पर सर्च कर सकते है.

जितेंद्र प्रताप सिंह

jp20024@gmail.com

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