उस लड़की ने स्थान, ड्रिंक, सेक्स पर सहमति दी फिर आरोप लगा दिया

Ujjwal Bhattacharya : उस लड़की ने एक साज़िश की. उसने तय किया कि उसके यहां जाया जाय, फिर उसने तय किया कि इतनी पी ली जाय कि होश-हवाश गुम हो जाय, उसके बाद सेक्स के लिये सहमति दी जाय. उसके बाद शिकायत की जाय कि मेरे साथ बलात्कार किया जाय. ज़ाहिर है कि यह सिर्फ़ एक फ़ासीवादी साज़िश हो सकती है. और पूरे होशो-हवाश के साथ हमें इस पर विश्वास करना है. (वरिष्ठ पत्रकार उज्जवल भट्टाचार्या के फेसबुक वॉल से.)

Vikas Mishra : खुर्शीद अनवर को अगर सामान्य मौत मिली होती तो शायद लोग यही कहते कि वो 'खुदा के प्यारे' हो गए। लेकिन उनकी मौत इतने सवाल छोड़कर गई है कि मौत पर कहा क्या जाए, कुछ समझ नहीं आता। जेसिका लाल, निर्भया, सौम्या, रोशनी के लिए इंडिया गेट पर मोमबत्तियां जलाने वालों में से क्या कोई एक मोमबत्ती खुर्शीद अनवर के लिए भी जलाएगा। क्या आपको नहीं लगता कि महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए जो कानून बने हैं, उनका दुरुपयोग हो रहा है या हो सकता है। क्या ऐसा नहीं लगता कि तथाकथित सभ्य समाज नारीवादी होने की धुन में अतिवादी हो रहा है और पुरुष स्त्री के बीच सोच की खाई को और गहरी कर रहा है। पता नहीं आप क्या सोचें, लेकिन मुझे तो लगता है कि कहीं कुछ गड़बड़ हो रही है, लेकिन सही कौन करेगा। (सीनियर टीवी जर्नलिस्ट विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से.)

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