एकता के मंच पर खड़े होकर ही रोक सकते हैं इन तलवार चलाने वालों को

Kavindra Sachan : मीडिया.. जिसका आकर्षण युवाओं को अलग-अलग कारणों से हमेशा आकर्षित करता रहा है लेकिन ये एक ऐसा क्षेत्र है जहां लंबे अनुभव और बमुश्किल से बढ़ती सैलरी के बीच नौकरी से निकालने का रोग हर ग्रुप को लग गया है..जितना बड़ा ग्रुप उतनी पैनी तलवार से नौकरी का कत्ल और सब मौन… जैसे कुछ हुआ ही नही…साथिय़ों एकता के मंच पर खड़े होकर ही रोक सकते है इन तलवार चलाने वालों को…वरिष्ठों से अपील कि कदम बढ़ाइये…नही तो सब खत्म हो जायेगा…

Saroj Kumar : जब पटना था तो टाइम्स ऑफ इंडिया से अचानक निकाल दिए गए कर्मचारियों को रोजाना अखबार के दफ्तर के सामने ही धरने पर बैठे देखता था…करीब दो साल पहले उन्हें निकाल दिया गया था और वे उसी दिन से धरने पर बैठ गए थे…पिछली बार पटना गया तो उन्हें उसी तरह धरने पर बैठा देखा… वे शायद अभी भी वैसे ही रोजाना बैठ रहे होंगे और उनके धरने का दो साल से अधिक दिन पूरा हो गया होगा…आइबीएन-7, सीएनएन-आइबीएन से एक साथ 300 से अधिक पत्रकारों को निकाले जाने के बाद मुझे उनकी याद आ गई…

कवींद्र सचान और सरोज कुमार के फेसबुक वॉल से.

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