Krishna Kant : अमेरिकी लेखिका वेंडी डोनेगर की किताब 'द हिंदूज़: ऐन ऑल्टरनेटिव स्टोरी' को शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति के विरोध के बाद पेंग्विन प्रकाशन ने वापस ले लिया था. अब यह समिति उनकी दूसरी किताब 'ऑन हिंदूइज्म' को वापस लेने का दबाव बना रही है. 'ऑन हिंदुइज़्म' की प्रकाशक कंपनी एल्फ बुक को पत्र लिखकर किताब 10 मार्च तक वापस लेने की मांग की गई है।
मैं सोचता हूं कि जिस भारतीय दर्शन में नास्तिक दर्शन भी बराबरी के साथ मौजूद है. जिस धर्म को लेकर समय—समय पर सुधार आंदोलन चले, उसकी कतिपय आलोचना पर ये कौन लोग हैं जो फतवा जारी करने लगे हैं? हिंदुओं में भी कठमुल्लों का अवतार कब से हुआ? यहां पर धर्म की आलोचना अपराध कबसे होने लगी? दर्जनों महिलाओं के बलात्कारी आसाराम के पक्ष में पुस्तक मेले में अभियान चलाया जा रहा था कि वह निर्दोष है. यही लोग मोदी के लिए कोर्ट का हवाला देते हैं कि उन्हें बरी कर दिया गया. और आसाराम पर कोर्ट के ही रुख को षडयंत्र बता रहे हैं. क्या किसी को अपना मत रखने के लिए कठमुल्लों की अनुमति लेनी होगी?
कृष्ण कांत के फेसबुक वॉल से.






