एक ये बापू हैं जो केवल दूसरों के ब्रह्मचर्य का परीक्षण करते हैं

Nadim S. Akhter : आसाराम बापू 'संत' कहे जाते हैं…लेकिन एक नाबालिग उन पर बलात्कार का आरोप लगाती है, मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि भी होती है लेकिन बलात्कारी कौन है, इसकी जांच होनी अभी बाकी है…इस लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को समान देखने वाले कानून की बात करें तो इतने संगीन अपराध में आरोप लगने के बाद भी आसाराम बाबू को हिरासत में लेकर अभी तक पूछताछ नहीं हुई है, गिरफ्तारी तो दूर की बात है…

उधर उमा भारती ये फैसला सुना देती हैं कि आसाराम बापू को फंसाया जा रहा है, वे निर्दोष हैं, फिर तो पूछताछ उमा भारती से भी होनी चाहिए…उन्हें कैसे मालूम कि आसाराम निर्दोष हैं? कभी-कभी अचंभित भी होता हूं कि इस देश की धर्म भीरू जनता कैसे-कैसे लोगों को अपना गुरू बना लेती है, उनके बहकावे में आ जाती है…सब-कुछ देखने-सुनने के बाद भी…संत की वाणी तो निर्मल और मीठी होती है लेकिन आसाराम के बोल देखने-सुनने में मुझे बहुत ही cheap लगते हैं…

इंग्लैंड से आई एक 'महिला' भक्त से उनके बेटे और पूरी जनता के सामने आसाराम कहते हैं कि कह दो ना कि Asaram is very hot…कह दो कि तुम मझसे प्यार करती है…I love you…कभी आसाराम सार्वजनिक सभा में ताली बजा-बजाकर किन्नरों का मजाक उड़ाते हैं तो कभी दिल्ली गैंगरेप पीड़िता का मजाक बनाते हुए ये बोलते हैं कि अगर लड़की ने बलात्कारियों को अपना धर्म भाई बना लिया होता और उनके हाथ-पांव पकड़ लेती तो उसका रेप ना हुआ होता…

ऐसी बेहूदी बातें करने वाला आदमी संत-बापू कैसे हो सकता है और उनके भक्त उसे कैसे झेल रहे हैं…क्या सबकी आंख पर पट्टी बंधी है या आसाराम के सम्मोहन के आगे वे सब अंधे हो गए हैं? उस पर बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमा भारती का ये कहना कि आसाराम निर्दोष हैं और सभी संत उनके साथ हैं…क्या बताता है? क्या 'इस महान देश की महान परंपरा और संस्कृति' यही है, जिसका दंभ बीजेपी और संघ परिवार का कुनबा हमेशा भरता रहता है? जब इंद्र का सिंहासन डोलता है तो विश्वामित्र की तपस्या भंग करने के लिए वह अप्सरा मेनका को ही क्यों भेजता है…क्या इंद्र इतना कायर और डरपोक है जो आमने-सामने विश्वामित्र का सामना नहीं कर सकता…स्वर्ग का अपना राज बचाने के लिए उसे नारी और उसकी देह की आवश्यकता क्यों होती है?

Jagdish Singh : भूत काल में मैं इस गलतफहमी मे था कि अगर पुराने समय में अच्छे संचार माध्यम और मीडिया रहे होते तो धूर्त, बलात्कारी, नशेड़ी, क्रोधी, लीला करने वाले, कामी, भोगी, परस्त्रीगामी, रसिक, छलिए, विलासी, नरपिशाच, लोग अपने धन बल और सामाजिक/ राजनैतिक पहुँच के बल पर अपने को ईश्वर घोषित करके स्वीकार्य नहीं हो जाते. पर आज आशा राम और कुछ और धोखेबाज़ों को देख, समझ आ गया है कि आज के संचार माध्यमों और मीडिया के रहते हुये भी ये आज भी संभव है। समाज में मूर्ख तो रहेंगे ही और वो भी बड़ी संख्या में। उन्हें अपने भले बुरे की पहचान नहीं। उन्हें तो बस भेड़चाल ही चलना आता है।

Ashutosh Kumar : अगर आप गुस्से से उबल रहे हैं और आसाराम पापू की टिक्काबोटी कर देना चाहते हैं , तो अब भी आपकी आँखें नहीं खुली हैं . अगर आप समझते हैं कि यह एक 'नकली' साधू का मामला है तो आप अब भी आँखें मूंदे किसी 'असली' साधू के चरणों में लेटने के लिए तैयार बैठे हैं . लेकिन असली अपराधी साधू नहीं आपकी वे बंद आँखें हैं .

Sujata Choudhary : आशाराम बापू पर जो आरोप लगे हैं मैं उससे एकदम आश्चर्यचकित नहीं हूँ….| इतना पैसा, इतना मान, इतना ऐश्वर्य एक अयोग्य व्यक्ति को मिलने के बाद यह सब नहीं होना ही आश्चर्य है| नित्यानंद की रेपलीला तो पूरा देश देख चुका है उसके बाद भी संतों ने कुम्भ में जगतगुरु की उपाधि दी| वृन्दावन के कृपालुजी पर भी रेप के कई आरोप लग चुके हैं… क्यों न करे कृपालुजी ऐसी घटनाएँ… जिस आश्रम में वे रहते हैं, वह मध्यकालीन एय्याश राजाओं के शानोशौकत को मात करता है. बरसाने के उसके आश्रम में सिर्फ विदेशी ही ठहर सकते हैं| इनको मैं धार्मिक व्यापारी भी नहीं कहूंगी क्योंकि यह व्यापारी का अपमान होगा| ये सब बड़े अपराधी हैं क्योंकि इनका सारा अपराध धर्म की आड़ में होता है और इससे लोगों की आस्था को चोट पहुँचती है| इन अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए| ऐसे लोग स्त्रियों को भोग्य वस्तु समझते हैं| ऐसे व्यक्ति के कारण सच्चे साधु को भी शर्मिंदगी उठानी पड़ती है, जो पद, पैसे और कीर्ति को पीछे छोड़ सच्चे भजन में लगे हुए हैं|

Sanjay Tiwari : वह शायद चौरानबे का अर्धकुंभ था. आसाराम का बहुत बड़ा जलसा सजा था वहां. मेरे अपने गांव के जो वरिष्ठ लोग वहां आसाराम का जलवा देखकर आये थे उन्हें वह बहुत बड़ा संत नजर आया था. उस साल मैं इलाहाबाद आया ही था और कमोबेश रोज कुंभ में मुरारी बापू की कथा सुनने जाता था. उस वक्त भी आसाराम एक कारोबारी और ढोंगी ही नजर आया था. मेरे ही गांववालों से मेरा बड़ा झगड़ा हुआ कि मैं कल का छोकरा इतने बड़े संत के बारे में इतनी बड़ी बात कैसे बोल सकता हूं. बीस साल बाद ही सही मुझे अपना कहा सही होता दिखाई दे रहा है.

Himanshu Kumar : उमा भारती जी का बयान आया है आसाराम बापू को तो बलात्कार वाले मामले में झूठा फंसाया जा रहा है क्योंकि आसाराम बापू सोनिया गांधी और राहुल गांधी का विरोध करते हैं। संघियों की यह पुरानी आदत है. इनकी हर बदमाशी के पकडे जाने पर ये लोग यही कहते हैं की आरोप लगाने वाला हमारे धर्म का विरोधी है या हमारी पार्टी का विरोधी है या हमारे भगवान को नहीं मानता इसलिए हम पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में भी इन्ही संघियों का शासन है। वहाँ इन्होने आदिवासियों की ज़मीनें छीनने के लिए सलवा जुडूम के नाम से एक गुंडा ब्रिगेड बनाई। इस गुंडा दल ने हजारों आदिवासी लड़कियों से बलात्कार किये। लड़कियों ने कोर्ट में बयान दिए। लेकिन इन संघियों ने एक भी बलात्कारी को गिरफ्तार ही नहीं किया। इनके राज में एसपी और कलेक्टर भी यही कहते रहे की ये लडकियां तो सलवा जुडूम को बदनाम करने के लिए झूठा इलज़ाम लगा रही हैं। हांलाकि उसी सलवा जुडूम को सर्वोच्च न्यायलय ने भारत के संविधान के विरुद्ध घोषित किया। इन हिंदुत्ववादी आतंकवादियों का पूरा बहुमत आने दो मुल्क में फिर देखना ये ज़ुल्म करने में हिटलर को भी पीछे छोड़ देंगे। उसने तो सिर्फ सत्तर लाख लोगों की हत्या करी थी। ये देखना क्या क्या करते हैं ?

Swami Balendu : भाजपा के जो नेता आसाराम को क्लीन चिट देते हुए ये कह रहे हैं कि वो निर्दोष हैं, उन्होंने आसाराम के पुरुषत्व का टेस्ट किया था क्या? उनकी नज़रों में वो नाबालिग बच्ची झूठ बोल रही है, मेडिकल टेस्ट भी झूठा है परन्तु आसाराम सच्चे हैं! जरा कल्पना करिए उनके चाल, चरित्र और चेहरे का जो वोट के लिए बलात्कारियों के समर्थन में खड़ी होते है!

Isht Deo Sankrityaayan : एक वो बापू थे जो केवल अपने ब्रह्मचर्य का परीक्षण करते थे. एक ये बापू हैं जो केवल दूसरों के ब्रह्मचर्य का परीक्षण करते हैं. वो पहले दीक्षित करते थे, फिर परीक्षण करते थे. ये पहले परीक्षण करते हैं, फिर दीक्षा देते हैं. मने, नए वाले ज़माने में एंट्रेंस टेस्ट टाइप का मामला है कुछ. ख़ैर! संतोष की बात ये है कि हैं दोनों गुजरात के ही.

Vineet Kumar : अंधविश्वास, पाखंड और धर्म के नाम पर घोर अमानवीय कर्म के खिलाफ लगातार सक्रिय रहनेवाले नरेन्द्र दाभोलकर की पुणे में सरेआम हत्या कर देने की खबर के अभी चौबीस घंटे भी नहीं हुए थे कि दागदार, विवादास्पद महंत और स्वघोषित बापू आसाराम के 15 साल की एक छात्रा के साथ बलात्कार करने की खबर आने लगी. आसाराम बापू के गुरुकुल में इस तरह के घिनौने काम धर्म के नाम पर होते हैं, आत्मा की शुद्धि की जाती है, दुरात्मा को दूर किया जाता है..आपको ऐसी खबरें पढ़कर हैरानी नहीं होती कि टच स्क्रीन, एलइडी टीवी, और विकास के नाम पर लोहे-लक्कड़ के कबाड़ लेकर ये समाज आज से दो सौ-तीन सौ साल पीछे चला जा रहा है जहां धर्म और रीति-रिवाज, परंपरा के नाम पर कुछ भी किया जाना जायज हुआ करता था..बीच में सारे सुधार आंदोलन गए तेल लेने..आप जब-जब मानवीय पक्षों,अधिकारों और संवैधानिक प्रावधानों को छोड़कर अंध आस्था मैराथन की तरफ बढ़ेंगे, ऐसे पाखंड़ी आपके साथ वही सब करेंगे जैसे कि राह चलते गुंड़े,मवाली, बस में सवार मनचले और पब्लिक प्लेस में लफंगे किया करते हैं.

Vineet Kumar : आसाराम बापू को मालदार बनाने में जितना मध्यवर्ग और उसका ग्राहक बना निम्न मध्यवर्ग जिम्मेदार है, उससे कहीं ज्यादा जिम्मेदार वो तमाम टीवी चैनल हैं जिसने रोज सुबह धर्म और आस्था के प्रतीक पुरुष के रुप में ऐसे लोगों को घर-घर पहुंचाया जिस पर कभी बलात्कार के आरोप लगते है, कभी आश्रम के पास से बच्चों के शव मिलते हैं, कभी यौन हिंसा पर बेहूदगी की हद तक बयान देता है और जिस पर करोड़ों रुपये की जमीन कब्जाने के मामले चल रहे हों. नहीं तो आप ही बताइए न, आज से दस-बारह साल पहले आपको पता था कि ये आसाराम बापू भी ऐसा कोई महंत है जिसके पास कल को इतनी संपत्ति हो जाएगी कि वो मीडिया को टुकड़ो-टुकड़ों में खरीदने में सफल हो जाएगा

Vineet Kumar : आपको याद है न निर्मल बाबा को लेकर जब प्रभात खबर, न्यूज एक्सप्रेस न खबरें छापनी-दिखानी शुरु की तो फिर बाकी चैनल और मीडिया संस्थान भी उसके खिलाफ स्टोरी करने लगे लेकिन निर्मल समागम का प्रसारण जारी रखा. एबीपी न्यूज का इस संबंध में तर्क था कि चूंकि व्यावसायिक करार है तो रोक नहीं सकते और अंदरखाने से खबर आयी कि चूंकि अगले कुछ ही दिनों में करार खत्म होनेवाला है तो वो इसके खिलाफ स्टोरी में कूद रहा है. असल में ये सारे बाबा, महंत, धर्म के धंधेबाज रिलिजन एज ए इन्डस्ट्री के बड़े आसामी और शेयरधारक हैं जिनका एक हिस्सेदार मीडिया भी है. अभी घंटे-दो घंटे के लिए भले ही वो ऐसे महंतों के खिलाफ स्टोरी दिखा दे लेकिन बाद में मत्था टेकने इसी के दरबार में जाएगा..बस होता भर इतना है कि ऐसे वक्त में इन महंतों का मीडिया पर खर्चा थोड़ा बढ़ जाता है.

फेसबुक पर आसाराम प्रकरण को लेकर आ  रही टिप्पणियों में से कुछ चुनिंदा.

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