Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

प्रिंट-टीवी...

एडल्ट फिल्में बनाने में भोजपुरी वाले नम्बर वन

साल 2011 की अपेक्षा साल 2012-13 में हिंदी में कम बोल्ड फिल्में बनी। 2012-13 में फिल्म निर्माताओं का रुझान थोड़ी साफ-सुधरी फिल्में बनाने में रहा। हालांकि इस दौरान फिल्म सेंसर बोर्ड की एक्जामिन कमेटी ने दर्जनों फिल्मों को प्रमाण पत्र देने में संकोच दिखाया। जबकि पहले की तरह इस साल भी एडल्ट फिल्मों के मामले में भोजपुरी फिल्में सबसे आगे रहा।

साल 2011 की अपेक्षा साल 2012-13 में हिंदी में कम बोल्ड फिल्में बनी। 2012-13 में फिल्म निर्माताओं का रुझान थोड़ी साफ-सुधरी फिल्में बनाने में रहा। हालांकि इस दौरान फिल्म सेंसर बोर्ड की एक्जामिन कमेटी ने दर्जनों फिल्मों को प्रमाण पत्र देने में संकोच दिखाया। जबकि पहले की तरह इस साल भी एडल्ट फिल्मों के मामले में भोजपुरी फिल्में सबसे आगे रहा।

फिल्म सेंसर बोर्ड की सालाना रिपोर्ट के अनुसार 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2013 के दौरान 744 भारतीय फिचर फिल्मों को प्रमाण पत्र जारी किए गए। इनमें से 286 फिल्मों को यू (सभी के लिए), 325 फिल्मों को यूए (अभिभावक के साथ बच्चों के देखने योग्य) और 133 फिल्मों को ए (केवल वयस्कों के लिए) प्रमाण पत्र जारी किया गया। इस साल बनी कुल फिल्मों में से 17.88 प्रतिशत फिल्मे ए वर्ग वाली रही जबकि 43.68 प्रतिशत फिल्मों को यूए प्रमाण पत्र जारी किया गया। जबकि 2011 में 31.07 प्रतिशत फिल्में ए प्रमाणपत्र वाली थी।

सबसे एडल्ट भोजपुरी सिनेमा : 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2013 के दौरान हिंदी में कुल 65 फिल्मों को सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाण पत्र जारी किए गए। इनमें से 17 फिल्में यू, 32 फिल्में यूए और 16 फिल्मों को ए प्रमाणपत्र दिया गया है। इनमें से 17 फिल्मों के कई दृश्यों में काटछांट के बाद प्रमाण पत्र दिए गए। इस दौरान हिंदी की अपेक्षा मराठी में ज्यादा फिल्में बनी। मराठी की कुल 86 फिल्मों में से केवल 2 फिल्मों को ए प्रमाणपत्र दिया गया। यानि मराठी में सबसे ज्यादा साफ-सुधरी फिल्में बनी। दूसरी ओर भोजपुरी सिनेमा पहले की तरह बोल्ड रहा। पिछले एक साल में भोजपुरी की कुल 48 फिल्मों में से 28 एडल्ट सर्टिफिकेट वाली फिल्में रही। इस दौरान भोजपुरी में केवल एक फिल्म यू (पूरी तरह से साफ-सुधरी) सर्टिफिकेट वाली फिल्म रही। जबकि 2011 में सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाणित की गई 74 भोजपुरी फिल्मों मे से 44 फिल्में ए सर्टिफिकेट वाली फिल्मे थी। 2012-13 के दौरान सबसे ज्यादा फिल्में कन्नड भाषा में बनी। कन्नड भाषा की 103 फिल्मों में 10 फिल्में ए सर्टिफिकेट वाली रही जबकि तमिल भाषा की 89 फिल्मों में से 19 को ए प्रमाण पत्र जारी किया गया।  

विदेशी फिल्मों का जलवा : भारत दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्मे बनाने वाला देश है। इसके बावजूद यह साल दर साल विदेशी फिल्मों का प्रदर्शन बढ़ रहा है। 1 अप्रैल 2012 से 31 मार्च 2013 के दौरान विदेशी फिचर फिल्मों के लिए 72 प्रमाण पत्र जारी किए गए। विडियो वर्ग में विदेशी फिचर फिल्मों के लिए 938 प्रमाणपत्र जारी किए गए। जबकि इस दौरान विडियो वर्ग में भारतीय फिल्मों के लिए केवल 722 प्रमाण पत्र जारी हुए। विदेशी फिचर फिल्मों में 58.53 प्रतिशत फिल्मों को एडल्ट प्रमाण पत्र जारी किया गया।

मुंबई से पत्रकार विजय सिंह 'कौशिक' की रिपोर्ट.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...