एनडी तिवारी की तरह भूपिंदर सिंह हुड्डा की भी है नाजायज औलाद!

मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर एक पत्नी के रहते दूसरी शादी करने और दूसरी शादी से रजत नाम का एक 20 वर्षीय बेटा होने का दावा किया गया है। एनडी तिवारी ने तो आखिरकार अपने जैविक पुत्र को अपना नाम दे दिया तो क्या हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा भी ऐसा कुछ करेंगे। जैसे एनडी तिवारी पितृत्व विवाद में सालों उलझे रहे वैसे ही हुड्डा भी ऐसे ही मामले में फंसते नजर आ रहे हैं।

हुड्डा पर आरोप लगा है कि उन्होंने गैरकानूनी रूप से दूसरी शादी की है और उनका एक बेटा भी है। इसके बाद विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के नेताओं ने हुड्डा से इस्तीफा देने की मांग की। आईएनएलडी के जनरल सेक्रेटरी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि हुड्डा ने 1992 में देहरादून की महिला से शादी की जबकि उससे पहले ही उनकी शादी हो चुकी थी। चौटाला की मांग है कि इस मामले की जांच कराई जाए और हुड्डा को उनके पद से हटाया जाए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

हरियाणा के मुख्य विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल के वरिष्ठ नेता एवं ऐलनाबाद विधायक अभय सिंह चौटाला ने राज्य के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने 11 नवम्बर 1992 को नई दिल्ली में दूसरी शादी रचाई थी और उनकी यह पत्नी हुड्डा से उनके बेटे रजत को पितृत्व अधिकार दिलाने के लिए अदालत में गई है। उन्होंने कहा है कि यह उनकी दूसरी शादी है जो बिल्कुल गैरकानूनी तरीके से की गई।

यह आरोप इंडियन नेशनल लोकदल के पार्टी अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने भी कल पत्रकार वार्ता के दौरान लगाया। दोनों नेताओं ने कथित रूप से संबन्धित महिला के देहरादून की अदालत में पेश शपथ पत्र को आधार बनाते हुए यह मामला उठाया। दोनों का आरोप है कि 1988-89 में कांग्रेस विपक्ष में थी, तब हुड्डा ने युवा कांग्रेस कार्यकर्ता शशि से कथित तौर पर कहा कि वह अपनी पत्नी से तलाक लेने जा रहे हैं। उन्होंने 11 नवम्बर 1992 को दिल्ली में शशि से शादी कर ली कहा गया है कि वर्ष 1994 में शशि से पुत्र रजत का जन्म हुआ। आरोप है कि बाद में शशि को जान से मारने की धमकी दी गई।

शशि अजमेर चली गई और अब देहरादून लौट आई हैं, जहां उन्होंने प्रधान न्यायाधीश प्रथम की अदालत में 9 अक्टूबर 2013 को शपथपत्र पेश कर अपने पुत्र को पितृत्व का अधिकार दिलाए जाने की मांग की है। किए गए दावों के मुताबिक 11 नवंबर, 1992 को भूपेंद्र सिंह ने दिल्ली में शशि के साथ बिरादरी के रीति-रिवाज के अनुसार विवाह कर लिया। शशि ने अपनी शिकायत में बताया कि 1 फरवरी, 1994 को भूपेंद्र सिंह से शशि को एक बेटा हुआ जिसका नाम रजत है। महिला शशि की ओर से भूपेंद्र सिंह पर और भी कई आरोप लगाए गए हैं।

सोमवार को हरियाणा विधानसभा में शून्यकाल शुरू होते ही आईएनएलडी के रामपाल माजरा ने यह मामला उठाया, लेकिन स्पीकर कुलदीप शर्मा ने इसे सदन की कार्यवाही से निकाल दिया। दूसरी तरफ, हुड्डा ने इस मामले पर कुछ भी नहीं कहा है, लेकिन उनके समर्थकों की ओर से इसे चरित्र हनन का मामला बताया गया है। अभय चौटाला ने दावा किया कि उनके पास इसका अदालती हलफनामा है, जिसमें देहरादून के प्रेम नगर की रहने वाली शशि ने 13 दिसंबर 2013 को देहरादून फैमिली कोर्ट में 11 नवंबर 1992 को हुए उनके विवाह को बहाल किए जाने की गुहार लगाई है।

चौटाला ने बताया कि शपथ पत्र के मुताबिक, '1988-89 में शशि युवा कांग्रेस की सदस्य थीं और भूपेंद्र सिंह हुड्डा उस समय विपक्षी पार्टी में एक वरिष्ठ नेता थे। भूपेंद्र सिंह ने शशि को राजनीति में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और दोनों का मिलना-जुलना शुरू हो गया। भूपेंद्र सिंह ने विवाह करने का वायदा करके शशि को अपने प्रभाव में लिया और नई दिल्ली के जनपथ होटल में उससे संबंध बनाए। बाद में शशि को पता चला कि भूपेंद्र सिंह शादीशुदा हैं और उनकी पत्नी आशा जीवित है और एक बेटा भी है।

शशि ने अदालत में दायर मामले में कहा कि जब उसने भूपेंद्र सिंह से इस धोखाधड़ी के संबंध में बात की तो राजनीतिक भविष्य का वास्ता देकर और उन्होंने कहा कि आशा से उनका तलाक होने वाला है। उसके बाद भूपेंद्र सिंह ने घरवालों पर दबाव डालकर शशि का विवाह किसी अन्य व्यक्ति के साथ करा दिया, पर वह शादी नहीं चली।

शशि ने अपनी शिकायत में कहा कि भूपेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी को तलाक दे दिया है लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं कर सकता। 11 नवंबर, 1992 को भूपेंद्र सिंह ने दिल्ली में शशि के साथ बिरादरी के रीति-रिवाज के अनुसार विवाह कर लिया। शशि ने अपनी शिकायत में बताया कि 1 फरवरी, 1994 को भूपेंद्र सिंह से शशि को एक बेटा हुआ, जिसका नाम रजत है। याचिका में शशि ने अपना मौजूदा पता प्रेम नगर, देहरादून का दिया है।

अभय सिंह चौटाला ने कहा कि वैसे वह किसी के पारिवारिक मामलों में दखल नहीं देते लेकिन एक विधायक के नाते उनके पास ये दस्तावेज आए हैं, यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस तुरंत मुख्यमंत्री हुड्डा को पद से हटाए और सच्चाई सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट कराए।

इन आरोपों का मुख्यमंत्री ने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन उनके समर्थक और हरियाणा विधानसभा के पूर्व स्पीकर डॉ. रघुवीर सिंह कादियान और विधायक भारत भूषण बत्तरा ने प्रेस गैलरी में पत्रकारों को बताया कि यह सीधे-सीधे मुख्यमंत्री का चरित्र हनन है। महिला ने देहरादून की अदालत में 17 दिसंबर, 2013 को हिंदू मैरिज ऐक्ट के तहत अर्जी दायर की थी। अदालत ने सुनवाई के लिए 24 जनवरी, 2014 तय कर दी। पर इससे पहले ही महिला ने अदालत में पेश होकर शपथ पत्र देकर अर्जी वापस लेने का आग्रह किया। इसे अदालत ने मंजूर करते हुए अर्जी निरस्त कर दी थी। इन लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला विपक्ष के इशारे पर काम कर रही है।


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