ऐसा लगा कि सीएम ने पत्रकारों को अपमानित करने ही बुलाया है

देहरादून: आज पत्रकारिता दिवस के दिन जब हर जगह पत्रकारों के हित में योजनाओं की घोषणा करके सरकारें पत्रकारों को खुश करने की कोशिशों में लगी हुई हैं उत्तराखण्ड के सीएम ने पत्रकारों को बुलाकर जिस तरह अपमानित किया है उसे पत्रकार बिरादरी याद रखेगी. उत्तराखण्ड आपदा के समय अपनी जिम्मेदारियां ठीक से ना निभाने के कारण मीडिया के द्वारा निशाने पर लिए जाने से विजय बहुगुणा पहले से ही नाराज चल रहे थे. यही वजह रही कि मुख्यमंत्री की तरफ से पहले ही सख्त हिदायत दी गयी थी कि केवल पांच ही पत्रकार मुलाकात के लिए आ सकते हैं
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उत्तराखण्ड पत्रकार यूनियन के प्रदेश महामंत्री विश्वजीत सिंह नेगी ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में बताया कि आज जब वो प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री से मिलने गये तो मुख्यमंत्री ने जिस तरह का व्यवहार किया उससे वो स्वयं और पूरी पत्रकार बिरादरी बहुत आहत है. उन्होंने कहा कि जब मैंने सीएम साहब से कहा कि हम ज्ञापन लाये हैं और उसे पढ़कर सुनाना चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि "मैं तुमसे ज्यादा पढ़ा लिखा हूं, जज रहा हूं, मैं खुद पढ़ लूंगा." इस पर मैने उन्हें ज्ञापन दे दिया. कुछ देर देखने के बाद उन्होंने कहा कि क्या लिखा है तो मैने कहा कि सर आप ही कह रहे थे पढ़ लूंगा. तो उन्होंने कहा कि "मैं सचिव से दिखवा लूंगा, तुम लोग जाओ."  
 
जब नेगी ने उत्तराखण्ड आपदा को कवर करते समय हुए नुकसान के लिए मुवाअजे तथा कुछ पत्र-पत्रिकाओं के विज्ञापनों को राजनीतिक कारणों से रोकने के बारे में बात करनी चाही तो मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ लिखोगे तो ऐसा ही होगा. उनसे कहा गया कि सम्मानित पद पर बैठे व्यक्ति का ऐसा रवैया सही नहीं है तो उन्होंने कहा कि मुझे सही गलत मत समझाओ और निकल जाओ यहां से. इस पर जब विश्वजीत सिंह नेगी ने कहा कि आप पत्रकारों को बुलाकर इस तरह उन्हें अपमानित कर रहे हैं ये व्यवहार अशोभनीय तथा अस्वीकार्य है. अचानक मुख्यमंत्री ने गुस्से में सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर कहा कि इन्हें तुरंत बाहर करो और कोई भी पत्रकार नहीं दिखाई देना चाहिए.
 
विश्वजीत सिंह ने कहा कि उत्तराखण्ड में पत्रकारों के लिए आवास की कोई व्यवस्था नहीं है और ना ही बाहर से आने वाले पत्रकारों के लिए रुकने की कोई सुविधा है. प्रदेश में पत्रकारों को कोई सुविधा नहीं मिलती है. इन्हीं सब मसलों पर बात करने के लिए हम गये थे. लेकिन मुख्यमंत्री के इस व्यवहार से सभी पत्रकार बहुत गुस्से में हैं ऐसा लगा कि सीएम ने पत्रकारों को अपमानित करने ही बुलाया है. सभी पत्रकार इसके खिलाफ एकजुट हैं तथा इसके खिलाफ हर मोर्चे पर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं. हर मोर्च पर विफल सीएम ने विपक्ष को भी मुद्दा दे दिया है.

 

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