आज सचिन रिटायर हो गये. लोग रिटायर होते हैं तो उन्हें कुछ ना कुछ तोहफा दिया जाता है. अब वो भगवान हैं तो जब भगवान रिटायर होंगे तो तोहफा भी कुछ अलग होना चाहिए. यही सोचकर लगता है सरकार ने भारत रत्न दे दिया. पर ये क्या भगवान को भारत रत्न. ये क्या बात हुई. ऐसा भी कहीं होता है भगवान को भी वही तोहफा जो आम इंसानों को दिया जाता है.
हां भाई! इतना चौंकने की क्या जरूरत है आम इंसानों को ही तो अब तक भारत रत्न मिलता आया है. मैं जानता हूं मेरी बात पर तो यकीन करेंगे नहीं आप तो मैं उदाहरण के लिए कुछ नाम लाया हूं. जवाहरलाल नेहरू, राधाकृष्णन, अम्बेडकर, जेपी, सीवी रमन, विनोबा भाबे, अब्दुल कलाम. इन नामों से कुछ याद आया. ये सब आम इंसान थे और इन सबको भारत रत्न भी मिला था. अब जरा इनके सामने भगवान को रखो. कहीं ठहरते हैं ये लोग अपने भगवान के सामने. है किसी भी भारत रत्न के पास इतने रिकार्ड जितने सचिन के पास? नहीं ना.
तो आखिर सचिन को भारत रत्न मिल गया है. सारा भारत खुश है. ऐसा ही चारों तरफ गौरवगान हो रहा है. लेकिन कोई मुझसे नहीं पूछ रहा है कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूं. चलिए मैं खुद ही बता देता हूं. मैं बहुत उदास हूं. कहा जा रहा है कि 24 साल तक देश के लिए खेलते हुए आज रिटायरमेंट ले ली. कौन से देश के लिए भारत या बीसीसीआई, वही बीसीसीआई जिसने कभी ये नहीं माना कि वो देश के खेल मंत्रालय के नियमों के अधीन आती है. वही खेल जिसने इस तरह से खेलों में भ्रष्टाचार घुसाया कि आज सट्टेबाजी को वैध किये जाने की बात होने लगी है. यानि कि अगर ये खेल है तो सट्टेबाजी तो रुकेगी नही. और उसी खेल के महान खिलाड़ी आज हमारे लिए रत्न है.
एक और बात, सब ये मांग कर रहे थे खासकर मीडिया भी खूब चिल्ला रहा था कि सचिन ने इतना कुछ देश कि लिए किया है (खैर क्या किया है ये तो कहने वाले ही जाने) देश का नाम ऊंचा किया है तो उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया जाना चाहिए. आज दे भी दिया गया. लेकिन अकेले सचिन को नहीं बल्कि भारत के प्रसिद्ध रसायन शास्त्री सीएन राव को भी दिया गया. अब जब आप मानते हैं कि वास्तव में इतना बड़ा पुरस्कार है तो क्यूं नहीं दूसरे को भी उतना ही कवरेज देते. लेकिन रहने दीजिए लगता है कि अब तो भारत रत्न भी टीआरपी का मसला हो गया है.
लेखक विवेक सिंह युवा पत्रकार हैं. इनसे सम्पर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.