ओम प्रकाश चौटाला एवं अजय चौटाला को दस साल की सजा

नई दिल्ली। रोहिणी की विशेष सीबीआई कोर्ट ने जेबीटी भर्ती केस में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को 10-10 साल की सजा सुनाई है। इनके अलावा आईएएस संजीव कुमार और विद्याधर को भी 10 साल की सजा सुनाई गई है। कोर्ट के बाहर भारी हंगामे के बीच कोर्ट ने इन्हें ये सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के दौरान चौटाला समर्थकों ने जमकर हंगामा किया और उत्‍पात मचाया। पुलिस ने लाठियां भांजकर स्थिति को काबू में किया।

कोर्ट ने कुल 55 आरोपियों में से ओमप्रकाश और अजय चौटाला सहित कुल 9 आरोपियों को 10-10 साल की सजा, एक आरोपी को 5 साल और बाकी सभी आरोपियों को 4 – 4 साल की सजा सुनाई है। सजा की घोषणा होने के साथ ही दिल्ली में हरियाणा के सीएम भूपेंदर सिंह हुड्डा के आवास के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस किसी भी आशंका से निपटने के लिए तैयार है। पुलिस ने ओमप्रकाश चौटाला जिस अस्पताल में भर्ती हैं उसके बाहर की भी सुरक्षा बढ़ा दी है।

सजा का ऐलान होने के बाद से चौटाला के समर्थक गुस्‍से में हैं। दूसरी ओर चौटाला ने कोर्ट में अर्जी देकर कहा है कि उनकी उम्र और बीमारी का लिहाज़ करते हुए उन्हें दो हेल्पर दिए जाएं। रोहिणी कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद अब चौटाला के वकील हाई कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने चौटाला समर्थकों के हंगामे की निंदा की है। हरियाणा कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि हमारा यह मानना है कि आप अपनी पार्टी के हजारों कार्यकर्ता कोर्ट के बाहर ले जाकर इस तरह कोर्ट का मजाक नहीं उड़ा सकते। इस तरह सबको परेशान करके, शोर मचाकर, नारे लगाकर अगर कोर्ट की प्रक्रिया में बाधा पहुंचाते हैं तो यह दिखाता है कि आपका न्यायिक प्रक्रिया पर कोई विश्वास नहीं है।

हालांकि बाद में तबियत खराब होने के बाद ओम प्रकाश चौटाला को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। कोर्ट ने इन्‍हें 1999-2000 में हुए टीचर भर्ती घोटाले में दोषी पाया है। सत्ता में रहते हुए पिता-पुत्र ने टीचरों की भर्ती में जमकर फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। हरियाणा में ये घोटाला जेटीबी घोटाले के नाम से मशहूर है। 1999-2000 में हरियाणा में जूनियर बेसिक ट्रेनिंग टीचरों के लिए 3206 पद निकाले गए। 18 जिलों में भर्ती होनी थी, लेकिन घोटालेबाजों ने मेरिट लिस्ट में फर्जीवाड़ा किया। अधिकारियों पर बेजा दबाव बनाया। फर्जी इंटरव्यू कराएं और मनमाने तरीके से पैसे लेकर टीचरों की नियुक्तियां की।

इसमें ओमप्रकाश चौटाला के पूर्व राजनीतिक सलाहकार शेर सिंह बड़शामी, चौटाला के पूर्व ओएसडी और आईएसएस अधिकारी विद्याधर और आईएएस अधिकारी संजीव ने अहम भूमिका निभाई है। गलत तरीके से तीन हजार लोगों की भर्ती किया गया। 18 जिलों में भर्ती होनेवाले शिक्षकों की लिस्ट बन चुकी थी, शिक्षा अधिकारी पर लिस्ट बदलने के लिए दबाव बनाया गया। तब दोबारा रिजल्ट निकाला गया, जिसमें योग्य उम्मीदवारों को नहीं लिया गया। ऐसे लोग भर्ती किए गए जो योग्यता नहीं रखते थे। (इनपुट आईबीएन)

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