और विलियम दादा भूत बन गए

यह कहानी ट्रेन यात्रा के दौरान मिले एक व्यक्ति ने मुझे सुनाई, जो लंदन से भारत आए थे. उनके पास एक पुरानी डायरी थी जिसमें गहरी काली स्याही से परिवार के बुजुर्गों के नाम लिखे हुए थे. वे काफी बूढ़े हो चुके थे, इसलिए अपने साथ हमेशा एक छड़ी रखते. उन्होंने एक गोल हैट पहना हुआ था, जो शायद उन्हीं के लिए बना था. पहली ही नजर में वे बेहद दिलचस्प अंकल लगे. वे मुझे अपना नाम बताना भूल गए, इसलिए आज भी मैं उन्हें अंकल हैट ही कहता हूं. वे खिड़की के पास वाली सीट पर बैठकर सिगार पी रहे थे. बातचीत में उन्होंने बताया कि उनका भारत आना बहुत जरूरी था. वे गर्मियों की छुट्टियां भारत में ही बिताना चाहते थे, लेकिन अत्यधिक बेसब्री की वजह से उन्हें जनवरी की कड़क ठंड में ही आना पड़ा. अंकल हैट के साथ उनकी पोती थी, जो सफेद कोट में किसी परी की तरह लग रही थी. मैंने उसे कहानियों की एक किताब, धागे से चलने वाली फिरकी और सेब काटने का छोटा चाकू दे दिया.
 
अंकल हैट ने मुझे बताया कि रिश्ते में उनके एक परदादा की कब्र भारत में ही है. वे 1859 की किसी तारीख को ब्रिटेन से भारत पहुंचे थे. वे बेहद भले आदमी थे लेकिन बाद में भूत बन गए और कई बार मेरी पोती तान्या को सपने में दिख चुके हैं. उन्हें इस बात की शिकायत है कि अब कोई उनकी कब्र पर गुलाब नहीं चढ़ाता. हालांकि वे बहुत अच्छे भूत थे.
 
क्या भूत अच्छे भी होते हैं? मैंने पूछा. उन्होंने कहा, बिल्कुल. कुछ भूत बहुत अच्छे होते हैं और मेरे परदादा उन्हीं में से एक हैं. एक घटना के बाद उन्हें भूत बनना पड़ा, जो वे बिल्कुल नहीं बनना चाहते थे.
 
इस दौरान अंकल हैट ने सिगार से लंबा कश लिया और खिड़की के बाहर धुआं फेंकते हुए बोले, उनका नाम मि. विलियम था. भारत आने के बाद उन्होंने चाय का व्यापार किया और बहुत पैसे कमाए. उन पैसों से उन्होंने हैट और सिगार की दुकान शुरू की. दोनों चीजों में विलियम को कमाल हासिल था. तब भारत के बड़े-बड़े अफसरों के घरों में उनके सिगार जाते. साहब लोगों की पत्नियां उनके बनाए हैट पहनती थीं. एक दिन उन्होंने ब्रिटेन की महारानी को एक हैट और सिगार डाक से भेजा. कई महीनों बाद उन्हें पत्र मिला कि रानी साहिबा को हैट बहुत पसंद आई और उन्होंने खुश होकर मि. विलियम को तीन गांवों का राजा बनाया है. यह उनके लिए बहुत खुशी का दिन था. राजा बनते ही उन्होंने एक बग्घी खरीदी और रियासत का भ्रमण किया. उन्हीं दिनों उन्होंने विज्ञान में शोध शुरू किया. कठोर परिश्रम और विश्लेषण के बाद वे इस नतीजे पर पहुंचे कि हाथी और सूअर के पूर्वज एक ही थे, क्योंकि बचपन में दोनों की ही शक्ल में काफी समानता होती है. राजा के तौर पर वे बहुत दयालु और खुले दिल के आदमी थे. हालांकि वे कोई बहुत बड़े राजा भी नहीं थे.
 
अंकल हैट ने अपने बॉक्स से कुछ बिस्किट निकालकर मुझे और तान्या को दिए. इसके बाद वे बोले, एक बार आस-पास के सभी राजाओं की मीटिंग हुई. उसमें विलियम को खासतौर से आमंत्रित किया गया. मीटिंग में वे ढेर सारे हैट और सिगार लेकर आए. तब सबसे बड़े राजा ने एक सिगार सुलगाई और पीने लगे. उन्होंने अपने जीवन में पहली बार सिगार पिया था, इसलिए उन्हें हिचकी आने लगी. काफी देर बाद भी हिचकी नहीं रुकी तो राजा साहब ने विलियम की प्रतिभा पर शक किया और उन्हें नौसिखिया बता दिया. यह बात उन्हें सहन नहीं हुई और उन्होंने उसी वक्त बड़े राजा की पिटाई कर दी.
 
इस घटना से बड़े राजा नाराज हुए और उन्होंने एक पत्र में पिटाई का आंखों देखा हाल लिखकर महारानी के पास लंदन भेज दिया. कुछ दिनों बाद विलियम के पास महारानी का पत्र आया. उसमें लिखा था – इस पत्र को पढ़ने वाला मूर्ख विलियम तुरंत राजा के पद से हटाया जाता है. उसकी शानदार बग्घी में अब बड़े राजा बैठेंगे. 
 
विलियम ने राजपाट छोड़ा और अब वे अपनी हैट व सिगार की दुकान चलाने लगे. साथ ही उन्होंने वायलिन बजाने का भी अभ्यास शुरू किया जिसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली. एक दिन एक लड़की दुकान पर हैट खरीदने आई. उसने कुछ सिगार का ऑर्डर भी नोट कराया और सिक्कों में भुगतान किया. एक हफ्ते बाद जब वह आई तो विलियम ने उससे तुरंत कहा कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं और बहुत जल्द लंदन जाकर हैट का कारोबार करूंगा. लड़की ने कहा कि इसके लिए तुम्हें मेरे पिता से बात करनी होगी. दूसरे दिन विलियम उसके घर पहुंचे. वहां जाकर मालूम हुआ कि उस लड़की के पिता वही राजा साहब थे जिनकी पिछले साल उसने पिटाई की थी. राजा उसे देखते ही छड़ी लेकर पीटने दौड़े. यह मीटिंग सफल नहीं हुई. कुछ दिनों बाद विलियम और उस लड़की ने भागकर शादी कर ली. इससे गुस्साए राजा बंदूक लेकर उसकी तलाश करने लगे. जब वे नहीं मिले तो राजा ने एक मशाल जलाई और उनकी दुकान नष्ट कर दी. राजा के साथ आए सैनिक सभी हैट और सिगार लूट कर ले गए.
 
इस घटना के बाद का इतिहास अज्ञात है. कुछ लोगों का मानना है कि दुकान जला देने के बाद विलियम ने चाय का कारोबार शुरू किया और फिर से धनवान हो गया. वहीं कुछ लोग यह भी कहते हैं कि उसने नाम बदलकर बच्चों को जादू दिखाने का काम शुरू कर दिया था. कई साल बाद वे बहुत धनवान होकर मरे और उन्हें भारत के ही एक कब्रिस्तान में दफनाया गया. हर साल विभिन्न अवसरों पर उनकी कब्र पर गुलाब का फूल चढ़ाया जाता था. साल 1947 के बाद सभी अंग्रेज ब्रिटेन लौट गए, इसलिए यह सिलसिला टूट गया. इसके बाद दादा विलियम भूत बन गए और वे तान्या के सपने में आने लगे. कई लोग बताते हैं कि वे आज भी रात को हैट पहनकर घूमते हैं. अंकल हैट ने कहा, इसलिए मैंने तय कि अब से मैं भी हैट पहनना शुरू करूंगा, ताकि दादा विलियम की आत्मा को शांति मिल जाए.
 
ट्रेन पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी और अंकल हैट अपनी डायरी से मुझे वे फोटोग्राफ दिखाने लगे जिनका सम्बंध विलियम से था. मैं नहीं जानता कि भूत होते हैं या नहीं, लेकिन अंकल हैट और तान्या का मानना है कि विलियम दादा भूत बन गए. इस घटना को कई साल बीत गए हैं. विलियम अभी हैट लगाकर अपनी टूटी दुकान में दिखाई देते हैं या स्वर्ग चले गए, यह पूरे भरोसे के साथ कोई नहीं कह सकता. आज भी जब मैं ट्रेन में बैठता हूं तो खिड़की वाली सीट पर अंकल हैट को ढूंढ़ता हूं. शायद उन्हें विलियम दादा का सही पता मालूम हो.
 
राजीव शर्मा
संचालक – गांव का गुरुकुल

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