कंवल भारती केस : मानवाधिकार आयोग द्वारा डीजीपी को निर्देश

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा रामपुर में दलित चिन्तक कँवल भारती की फेसबुक टिप्पणी पर मनमाने गिरफ्तारी के विरोध में भेजी गयी शिकायती पत्र के सम्बन्ध में डीजीपी, उत्तर प्रदेश को निर्देश निर्गत किये हैं.

आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के बाद फेसबुक पर समाजवादी पार्टी की सरकार की तल्ख़ आलोचना करने पर हुई श्री भारती की गिरफ़्तारी के तत्काल बाद भेजी अपनी शिकायत में डॉ ठाकुर ने कहा था कि श्री भारती की टिप्पणी किसी भी प्रकार से धार्मिक उन्माद फैलाने से जुडी नहीं थीं, बल्कि मात्र एक कथित घटनाक्रम पर बुद्धिजीवी विचार थे.

अतः उनकी गिरफ़्तारी प्रशासनिक ताकत का खुला दुरुपयोग है. यह प्रकरण आयोग के समक्ष रखा गया और शिकायत पर विचार करने के बाद आयोग ने निर्देशित किया कि इसे डीजीपी, यूपी को उचित कार्यवाही हेतु भेजी जाये. डॉ ठाकुर ने कहा है कि मानवाधिकार से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा होने के नाते वे डीजीपी के स्तर पर न्याय के लिए पूरा प्रयास करेंगी.


सेवा में,
जस्टिस के जी बालाकृष्णन,
अध्यक्ष,
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग,
भारत सरकार,
नयी दिल्ली
विषय- दलित लेखक और चिन्तक श्री कँवल भारती प्रकरण में पुलिस कार्यवाही विषयक
महोदया,

कृपया निवेदन है कि मैं डॉ नूतन ठाकुर, एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ जो प्रशासन में उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता तथा मानवाधिकार आदि के क्षेत्र में कार्यरत हूँ. मैं आपके सम्मुख उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले का एक प्रकरण प्रस्तुत कर रही हूँ जिसमे साफ़ दिखता है कि एक व्यक्ति के मानवाधिकारों का किस प्रकार खुला उल्लंघन किया गया है.

यह प्रकरण रामपुर जिले के श्री कँवल भारती, दलित लेखक और चिन्तक, से जुड़ा है. समाचारपत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार कल श्री भारती ने निम्न टिप्पणी फेसबुक पर की थी-
“यूपी में सपा की सरकार ने दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबित करने का यह कारण बताया है कि उन्होंने रमजान के महीने में एक मस्जिद की दीवार गिरवा दी थी, जो अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनायी जा रही थी. लेकिन रामपुर में रमजान के महीने में ही जिला प्रशासन ने सालों पुराने एक इस्लामिक मदरसे पर बुलडोजर चलवा दिया गया और विरोध करने पर मदरसा संचालक को जेल भेज दिया. पर अभी तक किसी अफसर को अखिलेश सरकार ने न तो निलंबित किया है और न ही हटाया गया है. जानते हैं क्यों? क्योंकि यहाँ अखिलेश का नहीं, आज़म खान का राज चलता है. उनको रोकने की मजाल तो खुदा में भी नहीं है”

श्री भारती की इस टिप्पणी पर श्री फ़साहत अली खान, जो उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री आजम खान के मीडिया प्रभारी बताए जा रहे हैं, द्वारा रामपुर के सिविल लाइन्स थाना में धारा 153ए और 295 ए आईपीसी जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर करवाया, जो दो वर्गों में वैमनस्यता फैलाने और धार्मिक भावनाओं के अपमान से सम्बंधित हैं.

इस मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि रामपुर पुलिस ने तत्काल श्री भारती को गिरफ्तार भी कर लिया और कई घंटे थाने पर बैठाया किन्तु मा० मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट ने पेशी होते ही तत्काल जमानत दे दी.

पूरी मीडिया में यह बात कही जा रही है कि यह कार्यवाही श्री आज़म खान के इशारे पर की गयी.

आप सहमत होंगे कि श्री भारती की यह टिप्पणी किसी भी प्रकार से धार्मिक उन्माद फैलाने और वैमनस्यता फैलाने से जुडी नहीं है. इस टिप्पणी में किसी धर्म विशेष से जुडी कोई भी टिप्पणी दूर-दूर तक नहीं की गयी है. जो भी टिप्पणी है, वह मात्र एक कथित घटनाक्रम, कुछ प्रशासनिक कार्यवाही और कुछ व्यक्ति विशेष पर है. इस तरह श्री भारती ने इस मामले में मात्र अपने कुछ विचार और अपनी टिप्पणी अत्यंत शालीन तरीके से व्यक्त किया है. यह पूरी तरह भारतीय संविधान के अनुच्छेद उन्नीस में प्रदत्त अधिकारों के अंतर्गत है.

रामपुर पुलिस की यह कार्यवाही, चाहे वह श्री आज़म खान के कहने पर की गयी हो अथवा अपनी मर्जी से, प्रथमद्रष्टया ही अत्यंत निंदनीय जान पड़ती है और मानवाधिकार का पूरी तरह उल्लंघन और हनन है. यह प्रशासन की शक्ति का पूर्ण दुरुपयोग भी है जहाँ एक चिन्तक और विचारक को मात्र अपनी अभिव्यक्ति के लिए आपराधिक कृत्य में दण्डित किया गया और उन्हें गिरफ्तार किया है.

इस मुकदमे के वादी द्वारा एफआईआर लिखवाना तो उनका संवैधानिक और विधिक अधिकार था पर पुलिस द्वारा यह न्यूनतम अपेक्षा की जाती है कि छानबीन और सही विवेचना के बाद ही वह गिरफ़्तारी करेगी. लेकिन इस मामले में मुक़दमा दर्ज होने के साथ ही आनन-फानन में की गयी गिरफ़्तारी यह साफ़ दर्शा देती है कि इसका उद्देश्य श्री भारती को डराना, धमकाना और उनका पूरी तरह से मानमर्दन करना था.

कृपया ज्ञातव्य हो कि श्री भारती एक जाने-माने दलित चिन्तक और लेखक हैं जो दर्जनों पुस्तक लिख चुके हैं और जिन्हें डॉ अम्बेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.

किसी भी प्रशासनिक तंत्र द्वारा ऐसा किया जाना संविधान और देश के क़ानून का खुला उल्लंघन है. अतः मैं आपके यह निवेदन करती हूँ कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा तत्काल इस प्रकरण की जांच कराई जाए और जांचोपरांत नियमानुसार समस्त आवश्यक कार्यवाही किये जाने हेतु उत्तर प्रदेश शासन को निर्देशित करने की कृपा की जाए. साथ ही श्री कँवल भारती को बिना पुख्ता सबूत और आधार के एफआईआर दर्ज करते ही गिरफ्तार करने के सम्बन्ध में उन्हें समुचित मुआवजा भी दिये जाने के आदेश पारित करने की कृपा करें. कृपया प्रकरण अत्यंत गंभीर होने और पूरे देश के जन मानस से जुड़ा होने के नाते इस पर तत्काल कार्यवाही कराये जाने की कृपा करें.

पत्र संख्या-  NT/KB/Ram/01
दिनांक-  07/08/2013
भवदीय                                                                                                                                     डॉ नूतन ठाकुर
लखनऊ
 

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