कटारिया के मामले में अपनी ही आग से झुलसती सीबीआई

मुंबई। राजस्थान में विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया को फांसने के मामले में सीबीआई बगलें झांक रही है। सबूतों के मामले में सीबीआई झूठी साबित हो रही है। मुंबई की विशेष अदालत में चल रहे इस केस में कटारिया इसीलिए जमानत पर हैं। कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से हाजिर रहने की बाध्यता से भी आजाद कर दिया है। मामला कुख्यात अपराधी सोहराबुद्दीन की मौत से जुड़ा हुआ है। इस मामले में सीबीआई ने कटारिया को आरोपी बना दिया, उनके खिलाफ चार्जशीट भी पेश कर दी। चार्जशीट में कहा गया कि सोहराबुद्दीन की हत्या में कटारिया का भी हाथ है। लेकिन अब अपने लगाए आरोपों को वह साबित नहीं कर पा रही है। ऐसा लग रहा है कि अपनी जलाई गुई आग में सीबीआई खुद झुलस रही है।

कुख्यात अपराधी सोहराबुद्दीन को राजस्थान में आतंक का पर्याय माना जाता था। उसकी मौत के मामले में कटारिया के खिलाफ लगाए गए आरोप में सिर्फ एक बात कही गई है कि 27 दिसम्बर, 2005 से 30 दिसम्बर, 2005 तक आईपीएस ऑफिसर डीजी वणजारा उदयपुर के सर्किट हाउस में रुके थे। उसी दौरान राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री कटारिया का भी स्टाफ भी वहीं पर रुका हुआ था। जिन तारीखों की घटनाओं का हवाला देकर सीबीआई ने कटारिया को फांसने की चार्जशीट तैयार की है, उन दिनों वे मुंबई में भारतीय जनता पार्टी के राष्ठ्रीय अधिवेशन में भाग लेने के लिए मुंबई आए हुए थे। साथ ही इस अधिवेशन के दौरान रोज सुबह से शाम तक कटारिया मुंबई में कितने ही कार्यक्रमों में भी शामिल रहे हैं। जिनकी खबरें जिनमें प्रकाशित हुई, इन समाचार पत्रों में कटारिया के मुंबई में होने की गवाही है। जिन तारीखों को कटारिया के उदयपुर में होने की बात कही गई है, उन दिनों वे मुंबई के बांद्रा स्थित रिक्लेमेशन ग्राउंड पर बीजेपी के राष्ट्रीय अधिवेशन में मौजूद थे। जिसके दस्तावेजीय सबूत मौजूद हैं। मीडिया विशेषज्ञ निरंजन परिहार के साथ वे सहारा समय टेलीविजन चैनल के स्टूड़ियो में भी एक लाइव कार्यक्रम में उपस्थित थे, जिसकी प्रसारण की तारीख को सीबीआई झुठला नहीं सकती। सिद्धराज लोढ़ा के समाचार पत्र शताब्दी गौरव, गोविंद पुरोहित के जागरूक टाइम्स, सुरेश गोयल के प्रातःकाल सहित मुंबई के विभिन्न समाचार पत्रों में उन तारीखों के दौरान कटारिया के मुंबई के विभिन्न कार्यक्रमों की खबरें और तस्वीरें भी छपी हैं, सीबीआई उन्हें गलत साबित नहीं कर सकती। उन्हीं दिनों मुंबई में माथुर भी बीजेपी अधिवेशन में मौजूद थे। सीबीआई द्वारा बताए जा रहे दिनों में दोनों नेताओं के उदयपुर में नहीं होने की बात साबित हो चुकी है। यहां तक कि दोनों नेताओं के मुंबई आने-जाने के टिकट और कटारिया के गोवा यात्रा के सबूत भी मौजूद हैं।

सीबीआई ने स्पेशल कोर्ट को बताया है कि कटारिया 27 दिसम्बर, 2005 से 30 दिसम्बर, 2005 तक उदयपुर में रहकर सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की राजिश रचने में शामिल थे। लेकिन अब सीबीआई की सांसें फूल रही है। क्योंकि इन तारीखों में कटारिया और ओम प्रकाश माथुर के मुंबई और गोवा में रहने के दस्तावेजी सबूत हैं। इनके अलावा भी बहुत सारी बातें गलत साबित हो रही है। सीबीआई की चार्जशीट में उसी दौरान उदयपुर के जग मंदिर में कटारिया, बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश माथुर और वणजारा की मीटिंग हुई बताई गई है। इसी मीटिंग मैं सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की साजिश किया जाना बताया गया है। कहा गया है कि इसी बैठक में सोहराबुद्दीन को मारने की साजिश रची गई। लेकिन बहुत ही हास्यास्पद बात यह है कि सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर इससे एक महीने पहले 26 नवम्बर, 2005 को ही हो गया था। इससे भी ज्यादा आश्चर्यजनक बात यह है कि जिन तारीखों को कटारिया और माथुर का उदयपुर में होना बताया गया है, उन तीखों को वे वहीं पर थे ही नहीं।

सीबीआई ने जिन तारीखों और घटनाओं के बहुत सारे तार जोड़कर कटारिया के खिलाफ आरोप तय किए हैं, वे तारीखें ही सीबीआई का साथ नहीं दे रही हैं। कोर्ट में सीबीआई झूठी साबित होने जा रही है। अब हालात यह है कि कटारिया पर अपने आरोपों को साबित करने में जलालत का सामना कर रही सीबीआई का गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को फांसने को पैतरा ढीला पड़ सकता है। माना जा रहा था कि कटारिया को फंसाने के बाद सीबीआई मोदी और वसुंधरा पर शिकंजा कसेगी। लेकिन अब सीबीआई अगर मोदी और वसुंधरा को फांसना ही चाहती है, तो उसे नई तरह के कई मजबूत झूठ गढ़ने होंगे। सबूत झूठे साबित हुए, कटारिया इसी कारण जमानत पर हैं।

लेखक निरंजन परिहार वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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