कप्तान को मरता छोड़ भाग खड़े हुये तो इनाम में मिली लखनऊ की कलेक्टरी

यूपी के किसी भी आईपीएस अफसर से अगर पूछा जाये कि वह किस आईएएस से सबसे ज्यादा गुस्सा करते हैं तो उनमे से अधिकांश के जवाब में एक ही नाम सामने आयेगा और वह नाम है राजशेखर। जिन्हें लखनऊ का कलेक्टर बनाया गया है। उनके कारनामों से प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अफसरों के बीच भयंकर टकराव होते-होते बचा था। मगर कुछ अफसर अपने हुनर में माहिर होते हैं। राजशेखर भी जानते हैं कि नेताओं को कैसे मैनेज किया जाता है लिहाजा इतना विवाद होने के बावजूद भी उन्हें लखनऊ के डीएम जैसा महत्वपूर्ण ओहदा दे दिया गया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब राजशेखर मुरादाबाद में डीएम हुआ करते थे। जनपद में एक स्थान पर एक धार्मिक ग्रन्थ के पन्ने फटे हुये पाये गये थे जिसके बाद हजारों लोग सड़कों पर आ गये थे और गाडिय़ों पर पथराव शुरू कर दिया गया था। जब हालात नहीं संभले तो वरिष्ठï पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार जिलाधिकारी राजशेखर के साथ मौके पर रवाना हुये। हर जिले में परम्परा है कि ऐसे किसी भी स्थान पर जाते समय डीएम और एसएसपी एक ही गाड़ी में होते हैं और दूसरी गाड़ी पीछे आती है। यहां भी यही हुआ।

जब दोनों अफसर घटना स्थल पर पहुंचे तो भीड़ बहुत आक्रोशित थी। पहले एसएसपी गाड़ी से उतरे और भीड़ ने उन्हें घेर कर नारेबाजी शुरू कर दी। होना यह चाहिए था कि डीएम को भी उतर कर भीड़ को समझाना चाहिए था। मगर डीएम साहब एसएसपी को भीड़ में घिरा देख कर अपनी गाड़ी लेकर भाग खड़े हुये। पीछे आ रही एसएसपी की गाड़ी के ड्राइवर ने समझा कि कप्तान साहब डीएम साहब के साथ उनकी गाड़ी में निकल गये, लिहाजा उसने भी अपनी गाड़ी डीएम की गाड़ी के पीछे ही लगा दी। राजशेखर इतने घबराये हुये थे कि रास्ते में आते पुलिस बल को भी घटना स्थल पर भेजने की जगह अपने साथ मुरादाबाद ले गये। उत्तेजित भीड़ ने एसएसपी को अकेला देख कर मार-मार कर अधमरा कर दिया।

लहूलुहान एसएसपी ने पेट्रोल पम्प के एक कमरे में छुप कर किसी तरह अपनी जान बचायी। उनके शरीर में कई फ्रेक्चर हुये और कई महीनों तक वह अस्पताल में ही रहे। यह प्रदेश की पहली घटना थी, जब कोई कलेक्टर एसएसपी को इस तरह छोड़ कर भाग खड़ा हुआ हो। पूरे प्रदेश के आईपीएस अफसरों में इस बात को लेकर भयंकर रोष फैल गया। खुफिया विभाग ने भी शासन को रिपोर्ट दी कि पुलिस कर्मी इतने उत्तेजित हैं कि वह डीएम की पिटाई कर सकते हैं। कोई और डीएम होता तो निलंबित हो जाता मगर राजशेखर बसपा कैम्प में भी बेहद दुलारे थे, लिहाजा उन्हें सिर्फ हटाया गया।
इस घटना के बाद उन्हें जब जिले में भेजने की बात आयी तो पहले यह पता किया गया कि कहीं पुलिस विभाग में राजशेखर को लेकर कोई रोष तो नहीं है। लखनऊ प्रदेश की राजधानी होने के साथ-साथ बेहद संवेदनशील भी है। यहां के डीएम को एसएसपी के साथ लगातार तालमेल बनाना पड़ता है। निवर्तमान डीएम अनुराग यादव ने एसएसपी से बेहतर तालमेल करके पुराने लखनऊ को जैसे-तैसे करके संभाला था। राजशेखर को लखनऊ का डीएम बनाने के बाद पुलिस महकमे में खासी नाराजगी है। अगर यह नाराजगी बढ़ी तो सरकार को इस फैसले से लेने के देने पड़ सकते हैं।

लेखक संजय शर्मा लखनऊ वरिष्ठ पत्रकार हैं और वीकएंड टाइम्स वीकली हिंदी दैनिक के संपादक हैं.


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