कमाई की सेटिंग बिगड़ने के चलते कोतवाल ने की थी पत्रकार से मारपीट!

हापुड़ : सपा सरकार बनने के बाद पत्रकारों के उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं। अधिकारी पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला हापुड़ में हुआ और मीडियाकर्मी को आधी रात के बाद एएसपी सुधीर ने छुड़वाया। कोतवाल को राजेंद्र कुमार यादव को निलंबित करने की मांग को लेकर पत्रकार धरना भी दे रहे हैं। इलेक्ट्रोनिक मीडिया से जुड़े चंदन सिंह अपने एक सहयोगी के साथ आईपीएल मैच के सट्टेबाजों पर पुलिस छापेमारी की कवरेज कर रहे थे, तभी कोतवाल ने उनसे बदतमीजी और मारपीट की।

हापुड़ में सट्टेबाजी का इतिहास काफी पुराना है। कभी यहां मंडी पाटिया पर बारिश पर सट्टा लगता था। जिसमें सैकड़ों लोग बर्बाद हो गए। हार पर रकम चुकता न करने के कारण कई लोग आत्महत्या तक कर चुके हैं। अब उस स्थान पर सरसों तेल का सट्टा होता है। इसके अलावा विधानसभा चुनाव 2012 के दौरान सर्राफा बाजार में कौन बनेगा मुख्यमंत्री, सबसे बड़ा दल कौन सा होगा और हापुड़ से किस पार्टी का उम्मीदवार जीतेगा आदि मुद्दों पर लाखों का सट्टा लगा। पुलिस प्रशासन चुप्पी साधे रहा।

यह इलाका हापुड़ शहर कोतवाली क्षेत्र के मेरठ गेट चौकी क्षेत्र का अहम हिस्सा है। जहां पुलिस को सट्टे से भारी कमाई होती है। इसी चौकी क्षेत्र के तहत मीनाक्षी रोड पर दलित बहुल बस्ती कन्हैयापुरा, कवि नगर आदि इलाका है। यहां के गरीब लोग औकात से बढ़ कर मालदारी की चाहत में 12 घर के गेम पर सट्टा लगाते हैं। यह सट्टा चिड़िया, बल्ला, कबूतर, गेंद, गाय, फूल आदि पर लगता है। इसमें सभी व्यक्ति पैसा लगाते हैं। परंतु पर्ची खुलने वाले एक व्यक्ति को मुनाफा होता है। शेष रकम सट्टा खिलाने वाला हड़पता है। इन सट्टेबाजों से पुलिस की साठगांठ इतनी अच्छी है कि कई बार पकड़े जाने के बाद भी धंधा चलता रहता है।

पुलिस का कहना है कि गरीब क्या सट्टा खेलेगा/ देश में आईपीएल मैच फिक्सिंग के मामलों में बड़े क्रिकेटरों के नाम सामने आने पर पुलिस जागी। मंगलवार रात आठ बजे रेलवे रोड सिटी प्लाजा कांपलेक्स में पुलिस ने छापे मारे। यहां मुंबई चैन्नई क्वालिफाइंग मैच पर सट्टा लगा रहे तीन रईसजादे गिरफ्तार किए। इनसे लैपटाप, मोबाइल आदि बरामद किए गए। यहां पुलिस की सेटिंग का खेल मीडियाकर्मी ने कवरेज कर बिगाड़ दिया। गुस्साए कोतवाल ने सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मीडियाकर्मी को गिरफ्तार कर थाने ले आए। पत्रकार की गिरफ्तारी की खबर पर अन्य मीडियाकर्मियों ने थाने पर हंगामा किया, तो एएसपी रात लगभग 12 बजे थाने पहुंचे। उन्होंने चंदन को छुड़ा कर पत्रकारों का गुस्सा शांत किया।

इसी थाना क्षेत्र के संजय विहार इलाके के चौराहे से गिरफ्तार एक अन्य सट्टेबाज के मामले को पुलिस दबा रही है। पत्रकारों पर हुआ यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी यहां पर कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं। दीपावली पर एक हलवाई की दुकान में छापे मारने पहुंचे पत्रकार सत्यप्रकाश सीमन का पुलिस प्रशासन ने उत्पीड़न किया था। दिल्ली से प्रकाशित एक अन्य अखबार के संवाददाता को डीएम कंपाउंड में एसडीएम ने विरोधी खबर छापने पर भुगतने की धमकी दी थी।

चंदन के साथ हुई घटना के बाद पत्रकार लामबंद हो गए हैं। पत्रकारों ने निर्णय लिया है कि आरोपी कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई ना होने तक वे पुलिस का गुडवर्क तथा सपा की कोई खबर नहीं चलाएंगे। कोतवाल ने भीड़ के सामने चंदन सिंह से मारपीट की थी। पत्रकारों का धरना जारी है। यूपी में अखिलेश सरकार के आने के बाद से पत्रकारों पर पुलिस और नेताओं के हमले जिस तेजी से बढ़े हैं इसका खमियाजा उसे आने वाले लोकसभा चुनावों अवश्‍य भुगतना पड़ेगा।


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