कल्पतरु की काली कहानी, आखिर कोई कार्रवाई क्यों नहीं!

उत्तर प्रदेश मथुरा की चिटफंड कंपनी केबीसीएल इंडिया लिमिटेड (कल्पतरु) देश के विभिन्न हिस्सों में छोटे निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगा रही है। यह मामला अकेले उत्तर प्रदेश का नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के अलावा पांच राज्यों में केबीसीएल इंडिया लिमिटेड के फर्जीवाड़े की आशंका है जो खासकर गरीबों को अपना निशाना बना रही है। इसके पुख्ता सबूत हैं इसलिए जनहित में प्रार्थना है कि कृपया केबीसीएल इंडिया लिमिटेड की जांच कर, ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि कोई धोखाधड़ी का शिकार न हो। तत्काल इसके बैंक खातों के संचालन पर रोक व चल-अचल संपत्ति कुर्क कराकर इस खेल को रोकने की कृपा करे।

जानकारी के अनुसार अनुमानित ठगी 5 हजार करोड़ रुपये की हो सकती है। देश में लोग जितनी तेजी से समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं, उतनी तेजी से यहां ठग व दलालों का गिरोह भी फैल रहा है। केबीसीएल इंडिया लिमिटेड पैसे दोगुने करने के नाम पर लोगों को चूना लगा रही है। यह कंपनी गाय, भैंस, जमीन और फिक्सड डिपॉजिट के नाम पर लोगों को चूना लगा रही है। रातोंरात अमीर बनने का ख्वाब दिखाने वाली कंपनियों की धोखाधड़ी जारी है। यह ठगी का तगड़ा माध्यम है और इसकी रोकथाम के लिए जरूरी है कि बड़े स्तर पर कार्रवाई हो।

मथुरा की चिटफंड कंपनी केबीसीएल इंडिया लिमिटेड (कल्पतरु) ने खुद को शासन-प्रशासन से बचाने के लिए मीडिया में भी पैर जमाने की कोशिश की है। केबीसीएल इंडिया लिमिटेड ने कल्पतरू एक्सप्रेस अखबार शुरू किया है। मीडिया की आड़ में केबीसीएल इंडिया लिमिटेड को चिटफंड का अवैध कारोबार करने का लायसेंस मिल गया है। अब मीडिया को ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। आज न जाने कितने समाचार पत्रों और पत्रिकाओं सहित, टीवी चौनल्स में कई चिटफंड कंपनियों का पैसा लगा है या फाइनेंस का वही माध्यम प्रमुख है। अब मीडिया को ढाल की तरह इस्तेमाल किये जाने वालों की कमी नहीं रही है। इससे आम लोगों का विश्वास मीडिया से उठता जा रहा है।

इस चिटफंड कंपनी केबीसीएल इंडिया लिमिटेड में आज भी धड़ल्ले से लोगों का पैसा इन्वेस्ट कराया जा रहा है और इस रकम का बड़ा हिस्सा जोखिम भरे कारोबार में लगाया जा रहा है। एजेंटों के जरिए कंपनी ने करोड़ों रुपए इकट्ठा किया है। एजेंटों के जरिए केबीसीएल इंडिया लिमिटेड की नयी ब्रांचें खोली गई है। जाहिर सी बात है कि एक स्थानीय एजेंट जो जमा जुटाने के लिए 25 फीसदी कमीशन कमा रहा है, लोगों में आसमानी लक्ष्य का विश्वास जगाता है। इनमें से ज्यादातर एजेंट गैर पंजीकृत चिटफंडों से जुड़े होते हैं जिन्हें दोस्ताना और नजदीकी कर्जदाता माना जाता है और ये ही लोगों को लूट रहे हैं।

पूरी तरह साफ हो चुका है कि रुपए जमा करने पर दोगुना और चौगुना रकम देने का झांसा देकर हजारों करोड़ रुपए वसूले गये है। जाहिर सी बात है कि जब निजी और सरकारी बैंक 8-10 फीसदी ब्याज पर एफडी दे रहे हैं, तो कोई चिटफंड कंपनी जमाधन को आखिर कैसे दोगुना और चौगुना कर सकती है? चिटफंड कंपनी केबीसीएल इंडिया लिमिटेड (कल्पतरु) रकम दोगुनी होने का लालच देकर निवेशकों की संख्या बढ़ा रही है। पहले इस चिटफंड कंपनी ने जनता को बेवकूफ बनाकर पैसे जमा कराये, फिर उस पैसे से अखबार, चैनल खोले और आज दलाली करके केबीसीएल इंडिया लिमिटेड को प्रामाणिक बनाने का खेल चल रहा है।

यहां यह बता देना लाजिमी होगा कि पिछले दिनों मध्यप्रदेश में ग्वालियर जिला प्रशासन द्वारा करोड़ों का धोखाधड़ी करने वाली मथुरा की इस चिटफंड कंपनी के खिलाफ कार्यवाही कर सील कर दिया था पर इस केबीसीएल इंडिया लिमिटेड (कल्पतरु) की शाखाएं आज भी उत्तरप्रदेश में डंके की चोट पर संचालित हो रही है। वही कल्पतरु उत्तर प्रदेश में संचालित हो रही है जिसके खिलाफ पुलिस ने मध्य प्रदेश में कार्यवाही की थी। ग्वालियर के इंदरगंज थाने की पुलिस ने केबीसीएल इंडिया लिमिटेड के 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। मध्य प्रदेश में केबीसीएल इंडिया लिमिटेड के मालिक और एमडी श्री जयकृष्ण सिंह राणा की गिरफ्तारी के लिए सरकारी तौर पर ईनाम घोषित किया गया है। पुलिस को श्री जयकृष्ण सिंह राणा की तलाश है। कम्पनी के मालिक जयकृष्ण सिंह राणा उत्तरप्रदेश के आगरा और मथुरा में रह रहा है लेकिन पुलिस और प्रशासन उसको अब भी पकड़ने में नाकाम है।

सच्चाई यह है कि चिटफंड कंपनी केबीसीएल इंडिया लिमिटेड इन भोले-भाले लोगों के ही नहीं इस देश के भविष्य से भी खिलवाड़ कर रही है। सच कड़वा है कि भोले-भाले निर्धन लोगों की खून पसीने की जिन्दगी भर की कमाई एशोआराम, अय्याशियों, मंहगी गाड़ियों और रंगरेलियों मे उड़ाई जा रही है। लाखों रुपए खर्चकर बार गर्ल्स बुलाई जाती है। बदनसीबी इस बात की भी है कि अगर ईमानदारी से खोजे जाएं तो सारे सुबूत मौजूद हैं लेकिन आम जनता की शिकायत सुनने और उस पर अमल न किया जाना समझ के बाहर की बात है।

देश के विभिन्न हिस्सों व मथुरा जिले में करोड़ों-अरबो का कारोबार करने वाली चिटफंड कंपनी केबीसीएल इंडिया लिमिटेड (कल्पतरु) ने अपने अखबार के कुछ पत्रकारों और लोगों को ही अपना माईबाप बनाकर उन्हे कंपनी एक मुश्त मोटी रकम दे रही हैं, जिससे कंपनी के हौसले बुलंद है। आमतौर पर ऐसे मामलों में ऐसा ही होता है। व्यवस्था ही कुछ ऐसी है कि शिकायतकर्ता पुलिस, प्रशासन और कंपनी के बीच उलझकर रह जाता है। अगर अब भी कोई उचित कदम नहीं उठाया तो यह कंपनी लाखों लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाने में सफल हो जाएगी।

यह आर्थिक धोखाधड़ी कितनी गंभीर है, अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मध्यप्रदेश में हाईकोर्ट ने इस तर्क के साथ मामले की जांच सीबीआई को सौंपी कि मध्यप्रदेश राज्य सरकार प्रकरण की पड़ताल में सक्षम नहीं है। राज्य के पास इतने संसाधन और अधिकार नहीं हैं कि वह देश के दूसरे प्रदेशों में सक्रिय फर्जी चिटफंड कंपनियों के खिलाफ जांच कर सकें। इंसाफ की खातिर यही बेहतर होगा कि जांच सीबीआई से कराई जाए। पुलिस, प्रशासन या कोर्ट ने इसे क्लीन चिट दिया या इस कंपनी ने स्वत ही खुद को बेदाग मान लिया। इस कंपनी से गांव का आम आदमी से लेकर जिला मुख्यालय का लखपति भी अच्छी खासी चपत लेने जा रहा है।

वर्तमान में के बी सी एल इंडिया लिमिटेड Kalptaru Buildtech Corp. Ltd. के रूप में रियल स्टेट में बिल्डर बन गई है तथा बड़े ही गुपचुप तरीके से चुरमुरा में निवेशकों को अलॉट की गई जगह को दोबारा बेचा जा रहा है। कभी रुपए दूने करने के नाम पर तो कभी जमीन के प्लाट, बंगले देने के नाम पर कल्पतरु लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ा रही हैं। केबीसीएल इंडिया लिमिटेड लोगों से कम समय में जमा राशि दुगुनी करने के नाम पर और नियम विरुद्ध तरीके से सेविंग, माइक्रो फाइनेंस, चेन सिस्टम, फ्लैट, प्लॉट आदि में लोगों की गाढ़ी कमाई निवेश करवा रही है। निवेशकों की तादाद करीब 5 लाख है। सहारा को भी कोर्ट की वजह से अच्छी खासी रकम निवेशकों, जमाकर्ताओं को लौटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

सभी सुबूत, कागजात, गोपनीय जानकारी और दस्तावेज संलग्न हैं। गौरतलब है कि क्या ये शिकायतें दो-चार दिन में अचानक पैदा हो गई हैं? नहीं, सच तो यह है कि इससे पहले इन शिकायतों को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। कुल मिलाकर ऐसी धोखाधड़ी के पीछे सरकारी लापरवाही का योगदान ही अधिक है साथ ही भारत में आर्थिक जागरुकता की कमीं भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण प्रतीत होता है। आयकर विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कई व्यवसायी भी काले धन को इन कंपनियों में जमा करके दोगुना करने के लालच में रहते हैं। ऐसा ही एक बड़ा वर्ग पुलिस में एफआईआर तक दर्ज करवाने से खौफ खाता है क्योंकि उन्हें मामला दर्ज करवाने पर आय स्रोत सार्वजनिक होने का डर सताता है।

इस चिटफंड कंपनी ने राजस्थान में भी लोगों को कम समय में जमा राशि दुगुनी करने के नाम पर धोखाधड़ी की है। चिटफंड कंपनी केबीसीएल इंडिया लिमिटेड (कल्पतरु) द्वारा पैसा देश के बाहर भी गया है। केबीसीएल इंडिया लिमिटेड हवाला कारोबार में भी लिप्त है। किसी भी नान-बैंकिंग कंपनी को आर्थिक लेनदेन करने का अधिकार नहीं है। इस कंपनी ने आरबीआई में अपना पंजीयन नहीं करवाया है। कल्पतरु ग्रुप के कारोबार में वह पैसा लगा हैं जो कि चिटफंड कंपनी के बी सी एल इंडिया लिमिटेड के जरिए इकठ्ठा किया गया हैं। धन परिचालन योजनाएं इनामी चिट और धन परिचालन स्कीम (पाबंदी) अधिनियम 1978 के अंतर्गत प्रतिबंधित हैं इसलिए मेरी जनहित में प्रार्थना है कि कृपया कड़ा रुख अख्तियार कर इस चिटफंड कंपनी की धोखाधड़ी को रोका जाए तथा उत्तरप्रदेश के मथुरा जिला के फरह मे स्थित गावं चुरमुरा की भूमि कुर्क कराकर, कंपनी के कर्ताधर्ताओं और संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कृपा करें, साथ ही कंपनी के दूसरे व्यवसाय, प्लांट व दफ्तरों पर तालाबंदी की कार्रवाई के आदेश देने की कृपा करे।

इनके गलत कारोबार के चलते पूरा उद्योग बर्बाद हो रहा है जो समाज के निचले स्तरों से जुड़ा होने के चलते चमत्कारिक काम कर सकता था। चिटफंड कंपनियों का कारोबार अवैध है अत जनहित में उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया जाना चाहिए इसलिये आप से जनहित में गुजारिश है कि कृपया जालसाज कंपनी के बी सी एल इंडिया लिमिटेड की निष्पक्ष जांच करवाकर, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि कोई धोखाधड़ी का शिकार न हो। के बी सी एल इंडिया लिमिटेड (कल्पतरु)के मुख्यालय गावं चुरमुरा मे, निवेशकों को अलॉट की गई जगह को दोबारा बेचा जा रहा है। कृपया इस पर तुरंत स्टे लगाकर धोखाधड़ी को रोका जाए। जब मूल्य आम जनता के हित से जुड़े है तो यह मामला बेहद गम्भीर रूप से चिन्ताजनक और विचारणीय बन जाता है। उसे देखना समझना अब जरूरी हो गया है। देश के राज्यों में मुकद्दमे में कल्पतरु कंपनी की ओर से पैरवी के दौरान मुख्य तथ्यों को हमेशा छिपाया गया है।

भोले-भाले ग्रामिणो, बेरोजगारो को ना-ना प्रकार की स्क्रीम बताकर उनके दिलो-दिमाग में लोभ लालच का बीज अंकुरित करके चिटफंड कंपनी के बी सी एल इंडिया लिमिटेड (कल्पतरु) उन्हें ठगने का काम कर रही है। किस तरह रिजर्व बैंक के नियमों में मौजूद कमियों का फायदा उठाते हुए हर गली-कूचे में लाखों की संख्या में निवेशकों को चूना लगाने वाले इस घोटालेबाज कंपनी ने हजारों करोड़ का घोटाला किया है। मामला आज सबके संज्ञान में है। यदि एक मामले में पुलिस कार्रवाई कर दे तो कई अन्य छिपे मामले भी तत्काल सामने आ जाएंगे। संभव है, कुछ लोग इन महाठगों के जाल से बच जाएं। देर से मिला न्याय, न्याय नहीं होता। अगर सही कदम नहीं उठाए गए तो देश की भोली जनता जबरदस्त घाटा झेलेगी।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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