कवरेज करने गए पत्रकार की पिटाई, मोबाइल छीना

पिछले दिनों दिल्ली में कोंडाली सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में दो कर्मचारियों की मौत और पाच गंभीर घायल की खबर टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में सुनकर दैनिक जागरण यमुना पार के वरिष्ठ संवाददाता राजीव अग्रवाल ने हाल ही में वेस्ट दिल्ली से ट्रांसफर होकर आये नीरज वर्मा को जबरन खबर का कवरेज करने के लिए मौके पर जाने को कह दिया. नीरज वर्मा को अपराध बीट से जुडी खबरों को कवर करने का कोई तजुर्बा नहीं है. फोटोग्राफर का वीकली आफ होने की वजह से नीरज अकेले ही कोंडली का पता पूछते पूछते मौके पर पहुंच गया.

चूंकि उसे इस तरह की खबर करने का कोई अनुभव नहीं था सो उसने मौके की नजाकत को समझे बिना ही कॉपी पेन निकाल कर मृतकों के परिजनों से सवाल जवाब शुरू कर दिया. फिर क्या था, गुस्साए परिजनों ने नीरज को पीटना चालू कर दिया. इसके आलावा उसकी कॉपी पेन और मोबाईल छीन कर मौके से भगा दिया. फटेहाल नीरज ने किसी से मोबाइल मांग कर राजीव अग्रवाल को फ़ोन कर आपबीती सुनाई, लेकिन राजीव ने उसे आश्वासन देने या मौके पर पहुंच नीरज का मोबाइल दिलाने के बजाये उसे खबर कवर करने की नसीहत दे डाली.

साथ ही ये भी कहा कि इस नौकरी में पिटाई तो होती ही रहती है. उसके बाद बेचारा नीरज मौके से दूर खड़ा अपने हाल पर रो ही रहा था तभी दूसरे स्थानीय पत्रकार मौके पर आ गए. नीरज ने उन्हें आपबीती बताई तब उन्होंने जैसे-तैसे करके नीरज का मोबाइल वापस करवाया. इतना ही नहीं, स्टाफ के साथ मारपीट की घटना को राजीव अग्रवाल ने अपने बॉस कविलाश मिश्र और प्रबंधन को बताना भी उचित नही समझा. इससे पहले भी कई लोगों के साथ मारपीट की घटना घट चुकी है. राजीव अग्रवाल पर अपने सहयोगी साथियों से लगातार बदसलूकी करने का आरोप है. राजीव अब तक छह लोगों का पत्ता कविलाश के जरिये पूर्वी दिल्ली से साफ़ करवा चुका है.

उधर, इस संबंध में जागरण से जुड़े लोगों का कहना है कि राजीव अग्रवाल पर लगाए गए आरोप झूठे हैं. नीरज वाले प्रकरण में जलबोर्ड के बड़े अफसरों से शिकायत की गई है और हमले के मामले में कार्रवाई कराई जा रही है. कुछ लोग जो बेहतर परफार्म नहीं कर पाते, वह ही ऐसी बातें उड़ाते रहते हैं.

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