कहिए- ”दैनिक जागरण को बंद करा देगा भड़ास”

एक मित्र ने फोन किया और गिरफ्तारी व जेल जीवन के बाबत पूछने लगे. मैंने उन्हें बताया. साथ में ये भी बताया कि जागरण प्रबंधन ने नोएडा में फर्जी मुकदमा लिखाकर मेरे जेल जाने के महीने भर बाद कंटेंट एडिटर अनिल सिंह को भी गिरफ्तार करा दिया और जेल भिजवा दिया. ऐसा इसलिए क्योंकि जागरण के गोरखधंधों को भड़ास लगातार उजागर करता रहा है और कर रहा है, सो दैनिक जागरण के मालिक चिढ़े हुए हैं और अपने गुर्गा टाइप मैनेजरों के जरिए जितने कुकर्म भड़ास के खिलाफ कर सकते हैं, कर रहे हैं. इनकी पूरी कोशिश थी कि मैं जेल से न निकलूं और भड़ास को बंद करा दिया जाए.

तब उस मित्र ने कहा- ''यार, जागरण वाले भड़ास क्या बंद कराएंगे, भड़ास वाले जरूर एक दिन जागरण बंद करा देंगे.''

मैं उनका डायलाड सुनकर चौंका. पूछा- ''ये कैसे भला?

उन्होंने फरमाया- ''देखो, भड़ास के पास क्या है? कुछ नहीं है. सिर्फ एक वेबसाइट है जिसका सारा डाटाबेस अलग जगह पर आप लोगों ने सेफ कर रखा है. उसके अलावा जो है वह सिर्फ आप लोगों का साहस और ईमानदारी. ईमानदारी का खात्मा करने के लिए इन लोगों ने रंगदारी और ब्लैकमेलिंग वगैरह की धाराएं लगवाईं व इसे छाप-छाप कर प्रचारित किया ताकि भड़ास व यशवंत की छवि बदनाम हो जाए, पर वे ये लोग नहीं कर पाए, उल्टे भड़ास व यशवंत को इन लोगों ने 'मान्यता' देकर पूरे देश में स्थापित कर दिया. साहस को खत्म करने के लिए इन लोगों ने थाने भिजवाया, जेल भिजवाया, जमानत होने में रोड़ा अटकाया. पर उससे क्या हुआ. सारे कष्टों को सूफियाना आनंद में तब्दील करते हुए यशवंत और भड़ास फिर पहले जैसे हो गए. देखो, जो साहसी व ईमानदार होता है वह मौत से तो डरता नहीं, इसीलिए हर पल वह बेखौफ व बेबाक रहता है. वह उत्पीड़न का हद तो पहले ही जान जी चुका होता है, तभी ऐसी बेबाकी भरा काम कर पाता है…''

उन दोस्त का प्रवचन जारी रहा. मैंने फिर सवाल पूछा- ''ये बताइए कि भड़ास कैसे जागरण को बंद करा देगा?''

उन्होंने फिर समझाना शुरू किया- ''वहीं आ रहा था मैं. असल में अगर भड़ास बंद भी हो गया तो कुछ बंद नहीं हुआ क्योंकि नए नाम से नए ब्लाग व वेबसाइट फिर शुरू हो जाएंगी. लेकिन भड़ास ने जो अलख जगा दी है उससे जागरण के गोरखधंधे दिन प्रतिदिन बाहर आ रहे हैं और जनमानस व शासन-प्रशासन में जागरण की कमजोरी पता चल रही है. एक दिन ऐसा होगा कि कभी शासन के शीर्ष स्तर पर जागरण का कोई अंतरविरोध हुआ तो, जिसकी पूरी संभावना बनती जा रही है, यही सरकार जागरण को उलाट कर रख देगी और सब कुछ इनका खत्म होने की ओर बढ़ जाएगा. देखते ही देखते अरबों खरबों का इनका कारोबार जमीन पर आ जाएगा. सो, आप यह न कहिए कि जागरण वाले भड़ास को बंद करा देंगे, यह कहिए कि भड़ास वाले जरूर एक दिन जागरण को बंद करा देंगे.''

मैंने मन ही मन सोचा कि बंदा तो गजब फिलासफी समझा रहा है. और, फिलासफी में दम भी दिक्खे है. छोटी लड़ाइयां कब बड़े क्रांति का रूप ले लेती हैं, पता ही नहीं चलता. छोटे आंदोलन कब देशव्यापी होकर तख्त उलाटने और ताज उछालने वाली आंधियों में तब्दील हो जाते हैं, पता ही नहीं चलता. यह सच है कि आज दैनिक जागरण जैसा महादैत्याकार समूह जो चाहे वह इस देश में कर करा सकता है, लेकिन इस महादैत्याकार समूह ने पंगा अगर किसी से माना तो एक अदने से भड़ास जैसे पोर्टल से माना, सड़क छाप यशवंत से माना. तो, जागरण ने एक तरह से भड़ास व यशवंत को ये मौका दे दिया, मान्यता दे दिया कि अब जागरण को पूरी तरह से टारगेट करो, इसके खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दो क्योंकि जागरण वाले तुम्हें महान मानने लगे हैं, तुमसे डरने-घबराने लगे हैं. सो, जागरण खुद अपने नाश की बुनियाद रख चुका है. जिस तरह कभी रावण ने अपने घमंड में चूर होकर ऐसे-ऐसे कृत्य किए कि अपने दुश्मनों को खुद अपने पास बुला बैठा. तब रावण चक्रवर्ती था, धन-संपदा और सिंहासन का शेर था. और राम थे कि जंगल में टहल रहे थे. रो रहे थे. कलप रहे थे. घूम रहे थे. और बाद में क्या हुआ, सब जानते हैं.

जागरण ने जो कुछ भड़ास के साथ किया, इसका मैसेज तो हर जगह पहुंच रहा है. भड़ास पिछले साढ़े चार साल से क्या कर रहा है, यह भी पूरा देश जान रहा है. जागरण द्वारा पत्रकारिता की जगह भ्रष्टाचारिता के अपनाए गए रास्ते के बारे में सबको पता चल रहा है, पहले धीरे धीरे पता लगता था, और कुछ एक सर्किल में ही पता लग पाता था, अब तेजी से और देशव्यापी पता लग रहा है. जागरण की उगाही पत्रकारिता की चर्चा जिले-जिले में है. कुछ दिनों में ब्राडबैंड के गांवों में पहुंचे के साथ गांव गांव में होने लगेगी. तब तक भड़ास के साहस से सिंचे भड़ास जैसे सैकड़ों मंच खड़ा हो चुके होंगे. फिर, जागरण जहां छपा करेगा, उसी में तैनात कर्मचारी उसे पढ़ा करेंगे, उसके बाहर निकलने की स्थिति ही नहीं आएगी.  ऐसा इसिलए की जागरण सबसे फ्राड अखबार का दर्जा पा चुका होगा और जन-मानस इसे देखते ही चोर अखबार बोलना शुरू कर देंगे.

तब, एक दिन ऐसा आएगा जब जागरण की ब्रांड वैल्यू विश्वसनीयता के पैमाने पर जीरो हो जाएगी, तब इनके पास अखबार बंद करके प्रापर्टी डीलिंग करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा और प्रापर्टी डीलिंग भी ये चैन से कर पाएंगे, इसमें संदेह है क्योंकि इनके सताए हुए नेताओं अफसरों पत्रकारों आम लोगों की इतनी लंबी फौज है कि कोई न कोई इनका हालचाल लेता ही रहेगा. बड़ा ब्रांड किस क्षण पतन के रास्ते पर चल पड़ता है और कुछ ही वर्षों में खत्म हो जाता है, यह जानने बताने के लिए आज अखबार और नई दुनिया अखबार का उदाहरण काफी है. नई दुनिया का मालिक जागरण हो चुका है, यह आज का सच है. कल का सच न जागरण को पता और न जमाने को, पर ब्रह्मांड के संचालित होने का ट्रेंड बताता है कि सब कुछ घूमता बदलता रहता है, सो बदलेगा, नीचे वाले उपर आएंगे और उपर वाले बिलकुल उपर चले जाएंगे. इतिहास के पन्ने तो यही ट्रेंड समझाते हैं. वर्तमान का कहानियां भी इन्हीं पगडंडियों से जाती हैं. अर्श से फर्श और फर्श से अर्श के मुहावरे कहानियां घटनाएं इसी दुनिया की हैं. सो, हो सकता है. बिलकुल हो सकता है. यह जरूर है कि तब हम हों न हों. भड़ास हो न हो. पर इतिहास के रास्ते पर कहीं नाम जरूर लिखा मिलेगा. क्रांति के राह पर जरूर कहीं इसकी चर्चा चस्पा होगी.

खैर, अपन लोग किसी के प्रति बुरा भाव मन में नहीं रखते. जो अपना दायित्व है, वह ईमानदारी से पूरी करते हैं. पत्रकारिता आप तभी कर सकते हैं जब आप पूर्वाग्रह से ग्रस्त न हों. जो खबर सामने आए, छापिए, वो चाहे खुद आपके खिलाफ हो या फिर उपर वाले के. इसके बदले में आपको कैसा और किस रूप में प्रसाद मिलता है, उसकी चिंता नहीं करें क्योंकि हम लोगों ने कलम को हथियार बनाया है, पत्रकारिता को मिशन के तौर पर माना है,  पत्रकारिता के माध्यम से सच बोलने का जो बीड़ा उठाया है तो इसमें बाइडिफाल्ट संघर्ष, मुकदमा, धमकी, जेल, थाना, पुलिस, परेशानी, उत्पीड़न… सब निहित है और यही एक तरह से हम लोगों के लिए पुरस्कार भी है. 

लोकतंत्र में चौथा स्तंभ बना ही इसलिए कि आप जनता के साथ खड़े रह कर बाकी के तीन स्तंभों के पतन, खराबी, जनता से दूरी के बारे में उन्हें लगातार आगाह करते रहेंगे, समझाते रहेंगे, लाइन पर लाते रहेंगे. लेकिन चौथे खंभे वाले अब बाकी तीन खंभों वाले के साथ मिलकर जनता से उतने ही दूर खड़े हो गए हैं जितने दूर बाकी तीन खंभे वाले हैं.

सो, जनता के साथ खड़े होकर जो पत्रकारिता करेगा तो उसे वही सब झेलना पड़ेगा जो एक आम आदमी को इस सिस्टम में झेलना पड़ता है. आप को अगर जनता की तरह, आम आदमी की तरह जीना अच्छा लगता है, मजा आता है, संगीतमय सा लगता है तो आप इस संघर्ष को इंज्वाय करेंगे अन्यथा आपकी भी फट जाएगी और चुपचाप जनता के बीच से निकलकर कोई कोना पकड़कर 'बच गए बच गए' टाइप की मुद्रा में बाकी जीवन डर डर कर मर मर कर गुजारेंगे.

पत्रकार सिर्फ एक बार मरता है, जब मौत आती है. भ्रष्ट लोग बार बार मरते रहते हैं क्योंकि असल में वो जिंदगी ही दूसरों के कंधों पर पैर रखकर, दूसरों को अपनी बैसाखी बनाकर गुजारते हैं. तो उन्हें डर लगा रहता है कि कहीं बैसाखी न हट जाए, कहीं कंधे न दूर चले जाएं. वे दूसरों को दुखी करके अपनी खुशी के लिए राह बनाते हैं सो जाहिर है कि उनकी खुशी निष्कंटक नहीं रह सकती, वह तमाम तरह के भयों से संक्रमित होती रहेगी.

सो, हे जागरण वालों, हे संजय गुप्ता, हे महेंद्र मोहन गुप्ता, हे निशिकांत ठाकुर और… हे सो मेनी गुप्ताज एंड मनी मैनेजर्स…. तुम लोग कर दो भड़ास की सांस बंद, कोई फर्क नहीं. लेकिन भड़ास ने जो अलख जगा दी है तो उससे तुम लोगों की लठैती कब तक चलेगी, उसे जरूर सोच लेना… याद रखना. भड़ास कोई संस्थान, समूह और कंपनी नहीं है कि बंद होने से अरबों खरबों का कारोबार चौपट हो जाएगा. भड़ास सिर्फ एक जिद और जुनून है. भड़ास सिर्फ एक अलख है. भड़ास सिर्फ एक रास्ता है. भड़ास सिर्फ एक सिंबल है. भड़ास सिर्फ एक ट्रेंड है.

भड़ास सिर्फ यह संदेश देने के लिए है, यह बताने के लिए है कि हालात चाहें जितने बुरे हों, कुछ ऐसा है जो उम्मीद जगाए है कि वो सुबह कभी तो आएगी, जब चीजें ठीक होंगी… भड़ास सिर्फ यह बताने के लिए है कि हर मुश्किल उठाकर भी सच कहने वाले हर दौर में जिंदा रहते हैं. और भड़ास ने ये काम कर दिया है. भड़ास ने बहुतों को इंस्पायर कर दिया है. भड़ास ने बहुतों को राह दिखा दी है. भड़ास ने बहुतों के सोचने का तरीका बदला है. भड़ास ने बहुतों को कूपमंडूक पत्रकारिता से अलग कुछ नया करने का रास्ता समझाया है. और, यही एक पत्रकार के नाते मेरी यही सफलता है. हे जागरण के मालिकों एंड मनी मेकर मैनेजर्स, उम्मीद करता हूं, अगर आप लोगों के खून में थोड़ी भी पत्रकारिता दौड़ रही होगी तो आप समझ पाएंगे कि एक पत्रकार से बात बरास्ते पुलिस और अदालत नहीं की जाती, कलम के जरिए की जाती है. और, कलम आप लोग जाने कब के गिरवी रख चुके हैं, सो आप लोग समझ भी नहीं सकते. इसलिए यही कहूंगा कि ….तुम सितम और करो टूटा नहीं दिल ये अभी…. 

यशवंत
एडिटर
भड़ास4मीडिया

09999330099

yashwant@bhadas4media.com


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