कांग्रेसी मालिक ने अपने पालतू पत्रकार दीपक चौरसिया को ‘आप’ को बदनाम करने के मिशन पर लगाया!

Dr. Kumar Vishwas : एक थी जेसिका लाल। एक था 'बार'। एक अहंकारी कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा का बिगड़ैल शराबी बेटा मनु शर्मा आधी रात उस 'बार' में आता है, और शराब मांगता है। बारटेंडर जेसिका कहती हैं, कि बार बंद हो चुका है, और शराब नहीं दी जा सकती। अमीरी के नशे और पिता के सत्ता की सनक से लैस, शराब में धुत्त मनु शर्मा जेसिका पर गोली चला देता है। जेसिका की मृत्यु हो जाती है। मामला दर्ज़ होता है, लेकिन पिता के मज़बूत सियासी बाज़ू के आगे कानून कि पकड़ ढीली पड़ने लगती है। फिर आप और हम जैसे लाखों लोग, बच्चे, बूढ़े, महिलाएं, युवा, सब मोमबत्तियां ले कर 'Justice for Jessica' का नारा बुलंद करते हैं। सुप्रीम कोर्ट दखल देता है, जिसके फलस्वरूप मनु शर्मा को आजीवन क़ैद की सजा मिलती है।

लेकिन… अरबों रूपए और दर्ज़नों 5-स्टार होटलों के मालिक कांग्रेसी नेता (वर्त्तमान में हरियाणा से विधायक) विनोद शर्मा के प्रेम में पड़ी शीला सरकार के मनु शर्मा के प्रति स्नेह-भाव के कारण दिल्ली सरकार की सिफारिश पर 5 सालों में 36 बार parole पर हत्यारे मनु शर्मा को जेल से बाहर घूमने की अनुमति मिली (जिसमें एक बार पुनः शराब के नशे में मनु शर्मा ने मारपीट भी की थी और गोली भी चलाई थी).

इन सब ख़बरों के बाहर आने का दोषी विनोद शर्मा ने मीडिया को माना, और मीडिया को पालतू बनाने के लिहाज़ से उन्होंने 'इंडिया न्यूज़' नाम का चैनल खड़ा किया। 'इंडिया न्यूज़' से 'इण्डिया' और 'न्यूज़' दोनों को दूर रखने के लिए 'दीपक चौरसिया' नाम का एक पत्रकार नियुक्त किया, जिसने 5 हज़ार से अपनी नौकरी शुरू की थी, और एक करोड़ प्रति-माह के इस ऑफर के लिए सबकुछ बेचने को तैयार हो गया।

अब, जब कांग्रेसी मालिक को लगा, कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी के हाथों कांग्रेस की हार सुनिश्चित है, तो उन्होंने अपने पालतू पत्रकार को इस काम पर लगाया, कि 'आप' को बदनाम करने के लिए हर सम्भव काम करो, और इसके लिए जितने 'पेडिग्री' कि आवश्यकता है, वो लेते जाओ। आप सब को शायद याद हो, कि ऐसे ही एक प्रयास के दौरान मैंने इनके ही बुलाये हुए 7 पहलवानों को एक साथ चित किया था।

इसी स्वामिभक्ति के सिलसिले में 'स्टिंग ऑपरेशन' का जाल बुना गया। कांग्रेस की चोर राजनीति में मुझे घेरने की कोशिश कि गई। कुछ न मिला तो कैश में पैसे दे कर वीडियो बनाने की कोशिश की गई, लेकिन जब कैश के लिए रसीद और चेक की साफ़-साफ़ बात कर दी गई, तो उनका ये प्रयास भी विफल हुआ। जब कुछ हाथ न लगा, तो '5-स्टार होटल' और 'बिज़नेस क्लास टिकट' को 'अपराध' बना कर प्रस्तुत किया। उनको इतना तो ज्ञान होना चाहिए कि कविता सुनाने के लिए पैदल तो न मुम्बई-कोलकाता की यात्रा की जा सकती है, न अमेरिका-जापान की।

पिता के आशीर्वाद, माँ की दुआ, लाखों-करोड़ों श्रोताओं के प्रेम और ईश्वर के आशीष का फल है, कि आज मुझे आप लोग ये सुविधाएँ, पारिश्रमिक और बहुत सारा स्नेह प्रेमपूर्वक देते हैं। 100 रूपए के कवि-सम्मलेन कर के रोडवेज़ की बस से घर लौटने वाले कवि के हैसियत से आगे बढ़ कर दुनिया भर में बुलाया जाने लगा हूँ। श्रोताओं के प्रेम ने मुझे बनाया है, तुम्हारी तरह कांग्रेसी मालिक का पट्टा लगा कर पेडिग्री खा कर नहीं बना हूँ। तुम्हारी दो कौड़ी के 'ऑपरेशन' और उसके ज़रिये कि जाने वाले ब्लैक-मेलिंग के आगे वही लोग नतमस्तक होते होंगे, जो झूठे होंगे। आपको बता दूं, कि न तो आपने कभी असली कवि देखा होगा, और न असली हिंदुस्तानी।

अब पाला खिंच चुका है! 4 दिसम्बर को पूरी दिल्ली बता देगी, कि जब-जब पैसे के दम्भ और देशभक्ति जूनून के बीच द्वंद्व हुआ है, तब-तब दम्भ चारों खाने चित हुआ है। मेरी कविता पर सवाल उठा कर जो लाखों-करोड़ों युवाओं की श्रद्धा, प्रेम और भरोसे का जो तुमने मज़ाक बनाया है, इसकी गूँज तुम्हें 8 दिसंबर को कनपटी के नीचे सुनाई देगी।

मेरे सभी दोस्तों, चाहने वालों के लिए इतना ही, कि

"सूरज सितारे चाँद मेरे साथ मेँ रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे
शाख़ों से टूट जायें वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे"

कवि और आम आदमी पार्टी के नेता डा. कुमार विश्वास के फेसबुक वॉल से.


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