कांग्रेस भी पार्टी है, धर्मशाला या अनाथालय तो नहीं है!!

रघुवीर सहाय की कविता की तर्ज पर कहा जाय तो चढ़ो चढ़ो जल्दी चढ़ो … भाजपा और कांग्रेस दोनों आप पार्टी को सूली पर चढ़ाने को बेताब हैं। कांग्रेस की बगैर शर्त समर्थन की पेशकश भी ऐसी ही कोशिश है। कि देखो समर्थन के बावजूद आप वाले आँख चुरा रहे हैं, कि वे सरकार बनाने से डरते हैं, कि वे झूठे वादों को कभी पूरा नहीं कर सकते। आप की मुश्किल शायद यह है कि कांग्रेस इतनी भली हुई कबसे? उसका भरोसा क्या? कौन जाने मौका देखकर कब सरे राह पीठ से उतार कर चलती बने! … 
 
हाँ, कांग्रेस गारंटी दे कि चाहे कुछ भी हो, विरोध करेंगे पर सरकार बनाने को दिया औपचारिक समर्थन पांच साल तक कायम रहेगा, आप अपना जादू दिखाए – तो बात बन सकती है। … मगर साहब, यह बिसात है। सियासत है। कांग्रेस भी पार्टी है, धर्मशाला या अनाथालय तो नहीं है!!
 
जनसत्ता के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वाल से

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