काटजू के बयान पर बिहार में बवाल, नीतीश चुप, पत्रकार आपस में बंटे

पटना। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने कहा है कि बिहार में नीतीश सरकार द्वारा प्रेस की आजादी पर अंकुश और स्वतंत्रता के उल्लंघन मामलों की जाच तीन सदस्यीय समिति करेगी। काटजू ने कहा कि पत्रकार राजीव रंजन नाग, अरुण कुमार और कल्याण बरुआ की सदस्यता वाली एक उपसमिति बिहार आकर जांच करेगी। यह समिति सरकार के खिलाफ लिखी जा रही खबरों के बाद अखबारों और पत्रिकाओं के पत्रकारों की प्रताड़ना और उन पर हमले के आरोपों की जाच करेगी।

उन्होंने कहा कि यह उपसमिति सभी आरोपों की जांच करेगी। इसमें सरकार के निर्देश पर समाचार पत्र मालिकों के दबाव में पत्रकारों के तबादले, प्रताड़ना के आरोप भी शामिल है। बिहार में पत्रकारों पर हुए हमलों की भी विस्तार से जाच की जाएगी। प्रेस परिषद अध्यक्ष के बयान से राज्य सरकार आक्रोशित है। भाजपा नेता और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी तथा जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने काटजू को आडे़ हाथ लिया है। हालाकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस विषय में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

मोदी ने कहा कि काटजू ने राजनीति से प्रेरित बयान दिया है। गरिमापूर्ण पद पर रहते हुए काटजू को ऐसे बयान से बचना चाहिए। ऐसा बयान देना है तो सक्रिय राजनीति में उतरना चाहिए। तिवारी ने कहा कि काटजू ने अखबारों की सुर्खियां बनने के लिए नीतीश सरकार के खिलाफ यह बयान दिया है। भारतीय प्रेस परिषद अध्यक्ष के बयान को लेकर विपक्षी दलों को भी नीतीश सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया। राजद के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे ने आरोप लगाया कि बिहार में मीडिया की स्वतंत्रता का गला घौंटा जा रहा है। काटजू के बयान से राजद के आरोप सच साबित हुए हैं।

उन्होंने कहा कि काटजू ने जो कहा है वह बिल्कुल सच है। राजद की पूर्व की सरकारों के कार्यकाल में भी बिहार में पत्रकारों की आजादी का अतिक्रमण नहीं किया गया जितना आज हो रहा है। बिहार प्रदेश कांग्रेस ने भी कहा कि राज्य में सरकार ने प्रेस से बोलने का अधिकार छीन लिया है। भाकपा माले के राज्य सचिव नंदकिशोर प्रसाद ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार के कार्यकाल में मीडिया बुरे दौर से गुजर रहा है। प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू की टिप्पणी को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। राज्य के कुछ वरिष्ठ पत्रकार काटजू के बयान से इत्तेफाक नहीं रखते तो कुछ के मुताबिक उनका बयान हकीकत के आस-पास है। जाने-माने पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने कहा कि काटजू का बयान विवादास्पद है। उन्होंने कहा कि वह अपनी जानकारी पर बोल रहे हैं और उन्होंने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम भी बनाई है।

उन्होंने कहा कि हकीकत का पता न होने पर उन्हें बयान देने से बचना चाहिए था। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर अब जांच के बाद ही बोलेंगे। काटजू के बयान को जल्दबाजी में दिया गया बयान बताते हुए किशोर ने कहा कि बिना जांच के किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता है। बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते है, 'काटजू के बयान में गलत क्या है? बिहार के आम से लेकर खास यानी हर तरह के लोग यह जानते है कि सरकार यहां प्रेस का कैसे उपयोग कर रही है। आज सभी लोग जानते हैं कि यहां के प्रेस सत्ता पक्ष के गुणगान में लगे है।

उन्होंने कह कि वह जब काटजू पटना में एक समारोह के दौरान प्रेस की आजादी पर बोल रहे थे तो कुछ लोगों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया था। जिससे वहां मौजूद लोग भड़क गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि यहां क्या स्थिति है। बिहार टाइम्स के संपादक अजय कुमार ने काटजू के बयान को हकीकत के करीब बताते हुए कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि आज पूरे देश में काटजू के बयान की खबरें छप रही है या दिखाई जा रही है। परंतु स्थानीय अखबारों ने इस खबर को कम महत्वपूर्ण मानते हुए उसे कम स्थान दिया है।

उन्होंने कहा कि काटजू को बिहार की हकीकत मालूम हो गई है। वह अध्यक्ष जैसे बड़े ओहदे पर है और प्रेस की आजादी दिलाना उनका अधिकार है। कुमार कहते है कि अगर सत्ता पक्ष के लोगों की खबरें सही तरीके से नहीं छपती है तो उन अखबारों का सरकारी वज्ञापन बंद हो जाता है। उधर, राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने काटजू के बयान को चर्चा में आने के लिए दिया गया बयान बताया। उन्होंने कहा कि काटजू आजकल किसी भी राज्य में जाकर विवादास्पद बयान देकर चर्चा में आना चाहते है। अगर उन्हें चर्चा में ही आना है तो राजनीति में आना चाहिए।

ज्ञात हो कि काटजू ने शनिवार को गया में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा था कि बिहार में प्रेस आजाद नहीं है। पत्रकारों का स्वतंत्रता के साथ खबर लिखना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन बिहार में पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से समाचार लिखने पर सरकार उन्हें परेशान करती है। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के अधीन है। इससे पहले, पटना में शुक्रवार को एक समरोह में काटजू ने कहा था कि उन्हें जो जानकारी मिली है वह प्रेस के लिए अच्छी नहीं है। अगर यहां कोई सरकार या सरकारी अधिकारी के खिलाफ लिख दे तो उसे परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि लालू के शासनकाल की तुलना में बिहार में विधि-व्यवस्था की स्थिति में सुधार जरूर हुआ है। लेकिन प्रेस की आजादी में कमी आई है। साभार : जागरण

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