कानपुर में दो पत्रकारों से धक्‍का-मुक्‍की एवं बदतमीजी, क्रास एफआईआर भी दर्ज

सपाराज में पत्रकारों पर हमले और पुलिसिया उत्‍पीड़न दोनों तेज हुए हैं. पूरे राज्‍य में पत्रकारों का उत्‍पीड़न किया जा रहा है. चाहे रायबरेली हो, सुल्‍तानपुर हो, उन्‍नाव हो हर जगह पत्रकारों से पुलिसिया तथा प्रशासनिक बदसलूकी आम हो गई है. इस बार खबर कानपुर से हैं. पीडित पत्रकारों के खिलाफ ही पुलिस ने पैसे वाले व्‍यवसायियों के दबाव में क्रास एफआईआर दर्ज करवा दिया है. मामले की जांच की जा रही है. संभावना कम ही है कि पत्रकारों को न्‍याय मिल पाएगा.

कानपुर के एनआरआई सिटी टाउनशिप में जेसीआई क्‍लब ने गजल नाइट आयोजित की थी. इसमें शहर के बड़े कारो‍बारियों समेत कुछ पत्रकारों को भी बुलाया गया था. कानपुर के दो बड़े अखबारों के पत्रकार भी अपने परिवार के साथ इस गजल नाइट को देखने पहुंचे थे. गजल नाइट के बाद डिनर चल रहा था. डिनर में कूपन सिस्‍टम लागू था. ये पत्रकार भी वहां पहुंचे, इनके पास कूपन था परन्‍तु कूपन कलेक्‍ट करने वाला कोई वहां मौजूद नहीं था, लिहाजा ये लोग बिना कूपन जमा किए अंदर चले गए.

बताया जा रहा है कि जब हिंदुस्‍तान अखबार के पत्रकार प्‍लेट लेकर खाने के लिए पहुंचे तो एक व्‍यक्ति ने उनके हाथ से प्‍लेट छीन ली. इसके बाद इन्‍होंने अभद्रता की यह बात अपने पत्रकार साथियों को बताई. पत्रकारों ने आयोजकों को बुलाकर इस तरह के व्‍यवहार पर नाराजगी जताई. इसी बीच आयोजकों के बीच का एक सदस्‍य पत्रकारों पर अपनी पिस्‍टल तान दी तथा धक्‍का-मुक्‍की भी की, जिससे बात बढ़ गई. सीओ स्‍वरूपनगर ने आयोजक से उसकी रिवाल्‍वर छीनकर मामले को तत्‍काल हल कराया.

परन्‍तु स्‍थानीय पुलिस का एक दारोगा तथा कुछ पुलिसकर्मी पैसे वाले आयोजकों के दबाव में पत्रकारों से ही भिड़ गए. पत्रकारों के साथ उन्‍होंने हाथापाई भी की. इसके बाद इन लोगों को उनके परिवार वालों के सामने अपराधियों की तरह थाने लाया गया. इसकी सूचना मिलने पर तमाम पत्रकार भी थाने पहुंच गए. पत्रकारों के साथ बदतमीजी और उनके उत्‍पीड़न को लेकर नाराज पत्रकारों ने सभी आरोपी पुलिस वालों को सस्‍पेंड करने की मांग की, परन्‍तु तत्‍काल कोई कार्रवाई नहीं की गई.

इसके बाद हिंदुस्‍तान के पत्रकार ने गजल नाइट के आयोजकों तथा पुलिसकर्मियों के खिलाफ लिखित शिकायत दी, जिस पर पत्रकारों के दबाव में मामला दर्ज हुआ. इस दौरान पत्रकारों ने कप्‍तान को पूरे मामले की जानकारी दी तथा क्रास एफआईआर न दर्ज करने की गुजारिश की. परन्‍तु दूसरे दिन पुलिस ने आयोजकों तथा पुलिस की तरफ से पत्रकारों के खिलाफ क्रास एफआईआर दर्ज कर ली. यानी पत्रकारों का उत्‍पीड़न भी किया गया और उनके खिलाफ क्रास एफआईआर दर्ज कर उन पर भी दबाव बनाने की रणनीति अख्तियार की गई.

हालांकि पत्रकारों के दबाव में कुछ आरोपी पुलिसकर्मियों को अगले दिन लाइन हाजिर कर दिया गया, परन्‍तु संभावना कम ही है कि पत्रकारों को न्‍याय मिल पाएगा. पुलिस जिस तरीके से पैसे वालों के दबाव में पत्रकारों के खिलाफ क्रास एफआईआर दर्ज की है, उससे स्‍पष्‍ट है कि उसकी मंशा पत्रकारों को न्‍याय दिलाने की नहीं है. सपा राज में पिछले एक साल में पत्रकारों पर जितने भी हमले हुए हैं वो उसकी छवि को लगातार खराब कर रहे हैं. संभव है कि पत्रकारों के साथ हो रहे उत्‍पीड़न की कीमत सपा सरकार को आने वाले लोकसभा चुनावों में चुकानी पड़े.

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