कारपोरेट घराने टीवी के बाद न्यू मीडिया माध्यम पर भी कब्जे का प्रयास करेंगे

हिंदी में विविध किस्म के लेखों को प्रकाशित करने वाले पोर्टल पोर्टल प्रवक्ता डॉट काम के 5 वर्ष पूरे होने पर इसके संचालकों द्वारा एक गोष्ठी का आयोजन स्पीकर हाल, कांस्टीट्यूशन क्लब, दिल्ली में किया गया. गोष्ठी का विषय था ''नया मीडिया एवं जनसंवाद'', तथा मंचासीन थे बेब जर्नलिज्म के शुरुआत से ही इस माध्यम के साथ रहे जयदेव कर्णिक, वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह एवं राहुल देव, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के नोएडा सेन्टर के निदेशक जगदीश उपासने और प्रवक्ता बेबसाइट का संचालन देख रहे भारत भूषण थे.   इस गोष्ठी में न्यू मीडिया के स्वरूप उनकी जन संवाद में उपयोगिता के बारे में बात हुई, जिसमें मंचासीन दिग्गजों के विचारों को समझने का मौका मिला.

चूंकि ये एक बेबसाइट का आयोजन था तो इसमें आये लोगों में न्यू मीडिया से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में थे. न्यू मीडिया की बड़ा महत्व इससे ही पता चलता है कि किस तरह से इस कार्यक्रम में मुख्यधारा के अतिरिक्त बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जो सोशल मीडिया ब्लाग आदि से जुड़े हुये हैं. इस माध्यम ने लोगों को ना सिर्फ खबरों और उस पर उनकी प्रतिक्रियाओं से आगे लाकर आपस में जोड़ दिया है. मीडिया के एकाधिकार को चुनौती देते ये आयोजन ये भी बता रहे हैं कि किस तरह मुख्य धारा मीडिया के द्वारा मौका ना दिये जाने के बावजूजद लोग इस माध्यम के साथ ना केवल लिख रहे हैं बल्कि पढ़े भी जा रहे हैं. एक समय था जब सोचा भी नहीं जा सकता था जब बिना समाचार पत्रों और टीवी के आप कुछ लिखते और उसे पढ़ा भी जाता. लेकिन इसी मिथक को तोड़ने वाले लोगों में से एक सुरेश चिपलूंकर से मिलकर इस बात का यकीन हो जाता है कि न्यू मीडिया ने ना सिर्फ लोगों को मंच दिया है बल्कि मीडिया सरोकारिता भी जिन्दा रखेगा. सुरेश जी उज्जैन में साइबर कैफे चलाते हैं और साथ-2 साथ ब्लाग लेखन भी करते हैं. आज उनके लाखों फालोवर हैं जो उनका लिखा नियमित रूप से पढ़ते हैं.

न्यू मीडिया जिसे बेब मीडिया भी कहा जाता है उसने ना सिर्फ संवाद स्थापित किया बल्कि दो विरोधी विचारों में भी संवाद स्थापित किया. ये बात प्रवक्ता के कार्यक्रम से दिख जाती है. प्रवक्ता के संपादक संजीव सिन्हा जो खुद संघ की विचारधारा से जुड़े हुये हैं और इस बात को स्वीकार भी करते हैं, उनके संपादन में वामपंथी विचारक और कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी ना केवल लेख लिखना पसन्द करते हैं बल्कि पुरस्कार भी लेने आये.

क्यूंकि विषय न्यू मीडिया और जनसंवाद पर था तो चर्चा भी इसी पर होनी थी. न्यू मीडिया आज बेब पोर्टल, ब्लागिंग तक ही सीमित नहीं है बल्कि आज फेसबुक, ट्विटर यहां तक कि व्हाट्स एप तक फैला हुआ है. ऐसे में खबरों और उसे देने वाले की प्रामाणिकता का होना बहुत जरूरी है. जयदीप कर्णिक जो न्यू मीडिया से भारत में शुरुआती समय से जुड़े हुए हैं, बेब दुनिया के संपादक हैं, ने इसी पर बोलते हुए कहा कि इसके लिये हमें अपनी विश्वसनीयता बनाये रखनी चाहिये. इस बारे में ऐसा ना होने से कई बार देखने में आया है कि कई बार गलत पहचान बनाकर कुछ ऐसी भ्रामक या भड़काऊ सामग्री डाल दी जाती है जिससे समाज में अस्थिरता आ जाती है क्यूकि अभी हमारे यहां इन्टरनेट का और फैलाव होना है तो इस बात के खतरे भी बने रहेंगे लेकिन वो इन्हें लेकर आशावादी होते हुए कहते हैं कि जैसे ही हम इससे ज्यादा जुड़ेंगे हम समझ जायेंगे. न्यू मीडिया का जितना महत्व बढ़ेगा उतना ही इस पर कारपोरेट ताकतें नियंत्रण करने की कोशिश करेंगीं.

वरिष्ठ पत्रकार एनके सिंह ने कहा कि जिस तरह टीवी के आने पर कारपोरेट घरानों ने उस पर कब्जा करके बाजारवाद को फैलाया उसी तरह अब वो इस नये मीडिया माध्यम पर कब्जे का प्रयास करेगा. न्यू मीडिया की दोतरफा संवाद प्रणाली ने लोगों को इसके करीब ला दिया है. इस मुद्दे को और आगे बढ़ाते हुए राहुल देव ने मीडिया के इस नये माध्यम की शक्ति को बयां करते हुए कहा कि ये इतना शक्तिशाली हो चुका है कि इसे नकारा नहीं जा सकता. जो इसकी उपेक्षा करेगा वो पीछे रह जायेगा. वो इस माध्यम की समस्याओं पर बात करते हुये कहा कि इसकी समस्या अतिसंवाद है. इसने संवाद का नशा कर दिया है और लोग बिना बात के संवाद कर रहे हैं.

इस कार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन देते हुये प्रो. जगदीश उपासने ने इस नये माध्यम की पुरजोर पैरवी करते हुये कहा कि लोगों को संवाद करने का मौका मिला है तो वे हर बारे में संवाद करेंगे. सिर्फ मुद्दों को प्राथमिकता देते हुये नहीं बल्कि हर मुद्दे पर हो रही चर्चा की तरफदारी करते हूये उन्होंने कहा कि ये माध्यम केवल खबर देने का माध्यम नहीं है बल्कि ज्यादा संवाद स्थापित करता है और अगर हम ये सोचें कि इस पर क्या बातें हो तो ये इस पर नियंत्रण लगाने की बात करने जैसा होगा, जो कि अब कोई नहीं कर सकता. इस माध्यम ने मेन स्ट्रीम मीडिया की मोनापोली को खत्म कर दिया है.

इस कार्यक्रम में प्रवक्ता डॉट काम में लिखने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया जिसमें बीबीसी रेडियो के पूर्व सहयोगी रहे नरेश भारती, प्रो जगदीश्वर चतुर्वेदी, सुरेश चिपलूंकर, गिरीश पंकज, पंकज कुमार झां तथा अन्य रहे. वहीं कार्यक्रम में आने वालों में अनिल सौमित्र, आशीष कुमार 'अंशु', यशवंत सिंह, उमेश चतुर्वेदी, मनीषा पाण्डेय, शिवानन्द द्विवेदी सहर तथा अन्य शामिल रहे.

मीडिया के नये माध्यमों पर चाहे कोई जो भी बात कर ले पर वास्तव में इस तरह की स्वतंत्र बेबसाइटें ये दिखा रही हैं कि लोगों की अभिव्यक्ति के ये सबसे बड़े मंच हैं. हर आदमी यहां हर केवल खबरों के लिये नहीं बल्कि अपनी बात कहने दूसरों की बात जानने तथा उस पर अपनी बात रखने के लिये आता हैं. बोल कि लब आजाद हैं तेरे की अब तक जो बात हो रही थी वो यहां आकर सच हो रही है. आज लोगों को लब आजाद हैं पर देखना ये है कि कब तक आजाद रहेंगे क्यूंकि आजादी के लिये कीमत चुकानी पड़ती है और फिर इसकी ताकत को देखते हुये सरकारें भी गाहे बगाहे इसके नियंत्रण की बात करती रहती हैं. वास्तव में जिसे आज न्यू मीडिया कहा जा रहा है वही भविष्य का मीडिया है तो हमें इसकी विश्वसनीयता और लोकतांत्रिकता को जिन्दा रखना होगा.

भड़ास4मीडिया के लिए विवेक सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: bhadas4media@gmail.com

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