कार्टून का जिन्‍न : जागरण ने अखबार में प्रकाशित कार्टून पर खेद जताया

संसद में छह दशक पुराने डाक्‍टर भीम राव अम्‍बेडकर और जवाहर लाल नेहरू के एक कार्टून पर मचे बवाल ने अब मीडिया संस्‍थानों के भीतर भी डर पैदा कर दिया है. संसद में 63 साल पुराने कार्टून के एनसीईआरटी की पुस्‍तक में छपने का बवाल कई स्‍तरों पर अब भी जारी है. इसी बीच दैनिक जागरण ने अपने अखबार में प्रकाशित एक कार्टून पर खेद व्‍यक्त किया है. 14 मई को राष्‍ट्रीय जागरण में खरी खरी कॉलम में प्रकाशित एक कार्टून पर संपादक ने खेद व्‍यक्‍त किया है.

सत्‍ता से टकराव होने पर दण्‍डवत लेट जाने वाले जागरण प्रबंधन ने इस संदर्भ में 15 मई यानी आज के राष्‍ट्रीय जागरण में एक स्‍पष्‍टीकरण दिया है. इसमें संपादक ने खेद जताया है कि उनका इरादा किसी का उपहास उड़ाना नहीं था. नीचे दैनिक जागरण में प्रकाशित कार्टून एवं उसके लिए दिया गया स्‍पष्‍टीकरण.


स्पष्टीकरण : कल के अंक में प्रकाशित इस स्तंभ में की गई टिप्पणी पर कुछ पाठकों ने एतराज जताया है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमारा इरादा किसी का उपहास उड़ाना नहीं था, फिर भी यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो हम खेद व्यक्त करते हैं।-संपादक
 

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