काशीनाथ सिंह ने सहज भाव में अपनी प्रतिक्रिया दी और हम उन पर टूट पड़े

Avinash Das : हल्‍ला काफी था और काशीनाथ सिंह पर हमला भी फेसबुक पर कई जगह दिख रहा था। मैंने बीबीसी पर बाबा का बयान बड़े गौर से सुना। उन्‍होंने एक बार भी नहीं कहा है कि वे मोदी का समर्थन कर रहे हैं या कि बनारसवालों को मोदी के पक्ष में वोट करना चाहिए। वे अपने शहर का मिजाज बता रहे थे। साथ ही कमलापति त्रिपाठी के बाद बनारस पर राष्‍ट्रीय राजनीति की उपेक्षित निगाह के बारे में संवाददाता को अपनी फौरी प्रतिक्रिया दे रहे थे।

बनारस से मोदी के चुनाव लड़ने पर इसलिए उत्‍साहित दिख रहे थे, क्‍योंकि उन्‍हें लगता है कि अब चुनाव तक बनारस के गली-मोहल्‍ले-घाट आदि टीवी पर दिखाये जाएंगे। ऐतिहासिक शहर का वर्तमान सच सामने आएगा। बनारस के विकास की स्‍वाभाविक-सार्वजनिक चिंता सामने आएगी। काशीनाथ सिंह सरल हृदय वामपंथी शिक्षक-लेखक हैं। उन्‍होंने सहज भाव में अपनी प्रतिक्रिया दी और हम टूट पड़े। देखिए, हमने अपने लेखकों की कैसी घेरेबंदी कर रखी है।

ऐसी ही घेराबंदी से हमने अपने कई लेखकों, दोस्‍तों और ईमानदार कार्यकर्ताओं को अपने से दूर कर दिया। इससे कौन बढ़ा? वे बढ़े, जिनकी खूनी आहट मुल्‍क के दरवाजे तक पहुंच गयी है। मेरा काशीनाथ सिंह पर, उनके जीवन और उनके लेखन पर इस वक्‍त हो रहे उन पर हमले से ज्‍यादा विश्‍वास है। संभव हो, तो अपने झूठे प्रगतिशील खेमे की नागरिकता से मेरा नाम काट दें।

पत्रकार और फिल्मकार अविनाश दास के फेसबुक वॉल से.

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