काश, मीडिया वाले दुर्गा की ईमानदारी का दस फीसद हिस्सा भी अपने में समेटकर काम कर रहा होते

Vineet Kumar : आप ग्रेटर नोएडा की एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के सस्पेंड किए जाने की घटना को उसकी ईमानदारी की सजा कह लीजिए लेकिन असल में ये उसी ग्रेटर नोएडा में कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे मीडिया के मैनेज होकर काम करने, अखिलेश यादव सरकार के चंपू बनकर रहने का नतीजा है. मीडिया अगर दुर्गा की ईमानदारी का दस फीसद हिस्सा भी अपने में समेटकर काम कर रहा होता तो मजाल है कि अखिलेश यादव की सरकार उसे सस्पेंड कर देती ? उसके कदमों के आगे बिछी मीडिया ने दुर्गा को इस हालत में पहुंचाया है.

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दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन की खबर के साथ "रेत माफिया का अखिलेश सरकार पर दवाब" जैसा पुछल्ला लगाकर खबरें प्रसारित करने से मीडिया को लग रहा है कि जैसे दर्शक-पाठक ये समझ ही नहीं रहे हैं कि उसने अब तक इससे जुड़ी खबरें प्रसारित नहीं की इसलिए दुर्गा जैसी ईमानदार अधिकारी के साथ ऐसा करने की जुर्रत अखिलेश यादव सरकार ने की. अखिलेश यादव क्या, देश की किसी भी राज्य सरकार को मीडिया से किसी भी स्तर पर न तो खौफ है, न संकोच और न ही पकड़े जाने का डर. नहीं तो जिस ग्रेटर नोएडा में दर्जनों नेशनल चैनल हों, वहां मजाल है कि रेत माफिया काम करते रहें और सरकार पर मीडिया का दवाब न बने. रेत तो छोड़िए, इस नोएडा में और भी बहुत कुछ होता है लेकिन सरकार के आगे लोटनेवाले मीडिया के बूते नहीं है उसे सामने लाना.

मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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