कितने भी पुल टूट जाएं, इंसानों को इंसानों से जोड़ने वाले पुल कभी नहीं टूटते

Mayank Saxena : इस जगह न फोन काम कर रहे हैं…और न ही बिजली है…सड़कें बह चुकी हैं…बाहरी दुनिया से जोड़ने वाला एकमात्र पुल बह चुका है…न राशन बचा है और न दवाईयां…हमारी एक टीम उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि इलाके के विजयनगर, गंगानगर और चंद्रपुरी इलाके में है…जान पर खेल कर ये टीम, बेहद मुश्किल सड़क से होते हुए, फिर पैदल एक कमज़ोर बचे पुल को पार कर के इस इलाके में आई, जहां पर सब बह चुका है और सड़की की जगह एक खाई बची है.

मंदाकिनी नदी सिल्ट जमने से अपने मूल् स्तर से भी 12 फुट ऊपर बह रही है…आस पास की सड़कें बह गई हैं…रास्तों में कहीं भूस्खलन है तो कहीं पेड़ गिरे हुए हैं…पूरा इलाका तबाह है…दुनिया से सड़क सम्पर्क टूट जाने के कारण राशन या अन्य सामान नहीं आ सकता है…मैं इस समय एल एंड टी के हाइड्रोलिक प्रोजेक्ट के दफ्तर के स्टोर में हूं…पूरा प्रोजेक्ट बह गया है…पावर हाउस भी…सिर्फ ये स्टोर बचा है और एक टनल…खतरा बरकरार है…पावर प्रोजेक्ट 2 साल पीछे चला गया है और ये इलाका 50 साल पीछे.

यहां मदद की बहुत ज़रूरत है…राशन की भी…दवाईयों की भी…और श्रमदान की भी…क्या बूंद की टीम्स तैयार हैं…जान का खतरा भी हो सकता है…फिलहाल मैं, Aj Singh , Gaurav Gupta और Nitish Singh यहां पहुंचे हैं…यहां आने के लिए पुल पैदल पार कर के हमको पहाड़ पर खड़ी और टेढ़ी चढ़ाई करनी पड़ी…आप आएंगे तो लोगों की मदद होगी…राशन चाहिए…दवाएं भी…सरकार, आर्मी, आईटीबीपी यहां अभी किसी ने काम शुरु नहीं किया है… Ila Joshi समेत बाकी टीम भी यहां पहुंच रही है…उसी टूटे हुए पुल से…उसी पहाड़ से… लेकिन हम जानते हैं कि कितने भी रास्ते, कितने भी पुल टूट जाएं, इंसानों को इंसानों से जोड़ने वाले पुल कभी नहीं टूटते…तो आपका इंतज़ार रहेगा.

युवा पत्रकार मयंक सक्‍सेना के एफबी वॉल से साभार.

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