कितनों का कैरियर तबाह करेगा दैनिक जागरण, मेरठ के हिटलर राजकुमार शर्मा का फ़रमान

पत्रकारिता जगत में अपनी ताकत का अहसास कराने के लिए कुछ लोग सारी सीमाओं को तोड़ देते हैं. दैनिक जागरण मेरठ में ऐसे ही एक सज्जन हैं श्री राजकुमार शर्मा. इन्होंने संस्थान द्वारा दिए गए अधिकारों के दुरूपयोग और अपनी तानाशाही कायम करने के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं. बात बस इतनी होनी चाहिए कि उन्हें नागवार लग जाए, फिर तो बस एक ही फ़रमान ज़ारी होता है- "आपकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती हैं".

दुख की बात ये है कि उनके इस प्रकार के तुगलकी फ़रमान पर संस्थान के ज़िम्मेदार लोग असहमत होते हुए भी कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं होते हैं. उनके इस प्रकार के व्यवहार को लेकर आफिस में काम करने वाले साथियों ने श्री राजकुमार शर्मा को हिटलर समेत कई ऐसी उपाधि दे रखी हैं, जिन्हें लिखा जाना सभ्यता के दायरे से बाहर की बात प्रतीत होती है. पिछले कुछ दिनों में मेरठ देहात क्षेत्र में श्री राजकुमार शर्मा ने जिन लोगों को अपना ये फ़रमान सुनाया है, उनमें से कुछ का दर्द भड़ास के माध्यम से जागरण संस्थान के मालिकान तक पहुंचाने की एक कोशिश की है, शायद इसके माध्यम से एकाएक फ़र्श पर पटक दिए गए इन लोगों में से किसी का भला हो जाए.

सरूरपुर संवाददाता इरशाद चौधरी ( Mobile 9837869079) को जनवरी 2010 में हटाया गया. उनका कुसूर ये था कि रात 12 बजे एक गांव के जंगल में जाकर कुआं धंसने की फोटो नहीं ला पाए थे.

1990  से हस्तिनापुर में कार्य करने वाले नैन सिंह सागर पर भी एक समाचार की मामूली बात को लेकर गाज़ डाली गई.

मवाना में काम कर रहे अरविंद शर्मा को इसी तरह व्यक्तिगत नाराज़गी के चलते समाचार का बहाना बनाकर हटा दिया गया.

सरधना में काम कर रहे शाहिद मिर्ज़ा ( Mobile 9837706786) से नाराज़गी सिर्फ़ इसलिए पाली गई, क्योंकि उन्होंने एक समाचार के संबंध में तत्कालीन सिटी इंचार्ज श्री रवि शर्मा को अपडेट देने की गुस्ताखी कर दी थी, हालात ऐसे बना दिये गए कि आखिरकार उन्हें जागरण की 2 दशक की सेवा के बाद इस्तीफ़ा देना पड़ा.

फलावदा से 1999 से जुड़े तनवीर अंसारी ( Mobile 9927455644)  को जनवरी माह में किसी की गाड़ी में लिफ़्ट लेना महंगा पड़ गया. मवाना के पत्रकारों की साज़िश के चलते उन पर गोमांस का व्यापार कराने का घिनौना आरोप लगा और बिना कोई जांच कराए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. जबकि इसी मामले में अमर उजाला ने जांच कराई, और आरोप झूठा पाकर अपने संवाददाता कंवर ज़िया को क्लीन चिट दे दी.

हस्तिनापुर संवाददाता विपिन वर्मा ( Mobile 9837426791) पर श्री राजकुमार शर्मा का कहर फरवरी में टूटा. जब वे पीस पार्टी से चुनाव लड़ रहे श्री योगेश वर्मा के आफिस में कोई काग़ज़ लेने गए थे. उन पर संस्थान की नीतियों के विरुद्ध चलने का आरोप लगाकर सेवा समाप्त कर दी गई.

किला परीक्षितगढ़ संवाददाता कांति गर्ग ( Mobile9719151591) दो दशक से जागरण को अपनी सेवाएं दे रहे थे.  उनकी ख़ता ये हुई कि एक मामले में थाने में बैठे मुस्लिम युवक ने अपना पर्स एक दोस्त को देने के लिए कांति गर्ग से अनुरोध किया. बस उन्हें अल्पसंख्यकों की मदद करने का आरोप लगाकर हटा दिया.

श्री राजकुमार शर्मा की तानाशाही यहीं खत्म नहीं हो जाती. जो लोग उनके आधीन रहकर काम कर रहे हैं, हर समय उन पर बरसते रहना श्री राजकुमार शर्मा का शगल बन गया है.  अपनी ताकत का अहसास कराने के लिए आए दिन फोन पर धमकाना, गाकी देना, चेतावनी भरी मेल भेजना, सेलरी या खर्चे काट देना तो आम बात है. किसी की नौकरी लेने या सेलरी-खर्चे काट देने वाले श्री राजकुमार शर्मा शायद ये भूल जाते हैं कि एक व्यक्ति के पीछे उसका कैरियर और परिवार भी दांव पर लग जाता है. जागरण संस्थान को भी ऐसे मामलों में उदार होना चाहिए.

मेरठ से एक पत्रकार की रिपोर्ट

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