‘किशोर वाधवानी का मानसिक स्तर भी गुटका वाला ही है’

यशवंत जी, आपको किशोर वाधवानी के मानसिक स्तर के बारे में बताना चाहता हूं. वह किस तरह पत्रकारों के साथ व्यवहार करता है, इसका अंदाजा आपको हो जाएगा. पंकज मुकाती को गाजे-बाजे के साथ अमर उजाला से दबंग दुनिया लाया ले गया. उन्हें दो लाख रुपये महीने सेलरी दी गई. पूरा अधिकार दिया गया. पर अचानक किशोर वाधवानी ने उन्हें एक दिन बुलाकर कहा कि आप अब कल से गुटका के मार्केटिंग का काम देखेंगे.

पान की दुकानों पर जा जाकर गुटका बेचने का काम करेंगे संपादक! पंकज मुकाती ठहरे स्वाभिमान वाले आदमी, सो उन्होंने वाधवानी के फैसले पर आपत्ति जताई और इस्तीफा देने की तैयारी कर ली है. लेकिन इस प्रकरण से यह समझ में आता है कि आखिर किशोर वाधवानी अपने संपादक से इस तरह का सलूक कैसे कर सकते हैं. जानकारों का कहना है कि किशोर वाधवानी का मानसिक स्तर गुटका जितना ही है. इसी कारण वह ऐसी ओछी-छिछोरी हरकत करते है.

चंद माह पहले जब पंकज मुकाती ने डाइरेक्टर व ग्रुप एडिटर के पद पर दैनिक दबंग दुनिया ज्वाइन किया था तब किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनकी यह पारी इतनी सीमित होगी.  सूत्रों के अनुसार, मुकाती के ज्वाइन करने के एक-दो माह बाद ही अखबार के मालिक गुटखा किंग किशोर वाधवानी का उनसे मोह भंग हो गया था और वाधवानी ने मुकाती को संकेत भी दे दिए थे कि वे ज्यादा दिनों के मेहमान नहीं है.

वाधवानी ने कुछ दिन पहले मुकाती को एक ईमेल किया जिसमे लिखा था कि 1 मई से उन्हें गुटखे का काम देखना है और सम्पादकीय से उनकी दखलंदाजी ख़त्म की जा रही है. 23 अप्रैल की शाम मुकाती ने न्यूज़ रूम में घोषणा की कि वह बेहतर अवसर मिलने के कारण आज से दबंग दुनिया की नौकरी छोड़ रहे है. इस तरह दबंग दुनिया से एक और कहानी पूरी हुई.

समझा जाता है कि मुकाती दिल्ली में नई पारी शुरू करने वाले हैं. मुकाती पर दबंग दुनिया में काम करते हुए भेदभाव पूर्ण व्यवहार करने का आरोप भी लगा. अपने साथ लाये आशीष बम और दबंग में वाधवानी के ख़ास आदमी कपिल भटनागर को अपनी तरफ रखकर इन्हीं दो लोगों के भरोसे अखबार चलाने की कोशिश मुकाती ने की. बताया जाता है वाधवानी अब कमलेश सिंह को बतौर ग्रुप एडिटर ला रहे हैं.

इंदौर से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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