कुछ दबंग और माफिया प्रवृत्ति के लोग मुझे भदोही में पत्रकारिता नहीं करने देना चाहते

एक अपील…. साथियों, मैं उत्तर प्रदेश भदोही का एक ऐसा पत्रकार हूं जो बिना किसी डर के निर्भय होकर, निष्पक्ष होकर अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ाइयां लड़ी। चाहे वह पत्रकारों की लड़ाई रही हो या फिर समाज की। भदोही जैसे छोटे जनपद में रहकर मैंने जो मामले उठाए वह राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना। ज्ञानपुर जेल में कैदी की बर्बर पिटाई का मामला रहा हो या फेसबुक के जरिये अपने साथ हुये अन्याय के खिलाफ लड़ाई शुरू करने वाली डिंपल मिश्रा का मामला। इन मामलों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का काम मैंने किया।

भय, लालच से परे रहकर मैंने विशुद्ध रूप से पत्रकारिता धर्म का पालन किया। मुझे कई बार खरीदने की कोशिश की गयी पर मैं उन पत्रकारों में नहीं था जिनकी आत्मा चंद खनकते सिक्कों पर गिरवी हो जाती है। पर इसका खामियाजा मुझे भुगतना पड़ा। मेरे कार्यालय वालों ने मेरे साथ धोखा किया और अपनी ईमानदारी की कीमत मुझे नौकरी छोड़कर चुकानी पड़ी। कुछ दबंग और माफिया प्रवृत्ति के लोग मुझे भदोही में पत्रकारिता नहीं करने देना चाहते हैं। उनके साथ इस सियासत में कुछ ऐसे पत्रकार मित्र भी शामिल हैं, जिनकी मित्रता पर कभी मुझे गर्व होता था। उन दबंगों और माफियाओ के साथ मिलकर मुझे भदोही छोडने के लिए विवश किया जा रहा है।

यही नहीं मुझे और मेरे परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए मेरे पीछे भदोही की पुलिस भी लगाई गयी है। मैं आप सभी से पूछना चाहता हुं आखिर ऐसा क्यों..? क्या सच का साथ देना गुनाह है..? क्या मीडिया में ईमानदारी से पत्रकारिता करना गुनाह है…? क्या भदोही में सिर्फ वही पत्रकारिता करेगा जो चंद खनकते सिक्कों पर बिक जाता है….? क्या भदोही में किसी कीमत पर न बिकने वाले पत्रकारों को पत्रकारिता नहीं करने दी जाएगी…? मैं आप सभी से एक सवाल करना चाहता हूं। अपना समूचा जीवन पत्रकारिता को समर्पित कर देने वाला यह व्यक्ति आखिर कहां जाए…?

क्या मैं गुंडों और माफियाओं के डर से भदोही छोड़कर भाग जाऊं..? क्या पुलिस किसी ईमानदार और शरीफ व्यक्ति या पत्रकार के लिए नहीं बल्कि माफियाओं के लिए काम करेगी…? मैं भदोही की अवाम के साथ देश के सभी जिम्मेदार लोगों और पत्रकारों से पूछना चाहता हूं कि क्या पुलिस सिर्फ अपराधियों की सुरक्षा के लिए और मेरे जैसे पत्रकार को परेशान करने के लिए बनी है..? मित्रों, मैं किसी कीमत पर हार मानने वालों या बिकने वालों में से नहीं हूं। पत्रकारिता हित के लिए मैं हमेशा लड़ाइयां लड़ता रहूँगा। न्याय के लिए गुहार लगाने वाली तमाम डिंपल मिश्रा जैसी बेसहारों की आवाज़ बनता रहूँगा। चाहे इसकी कीमत कुछ भी चुकानी पड़े। मैं भदोही मे रहकर ही बहादुरी और निडरता से पत्रकारिता करूंगा। ……क्या आप देंगे मेरा साथ..? जीत जाएंगे हम तू अगर संग है…..ज़िंदगी हर कदम एक नयी जंग है।

जय हिन्द………!
जय कलम……..!
जय अखबार……!

लेखक मिथिलेश द्विवेदी यूपी के भदोही जिले के तेजतर्रार पत्रकार हैं.

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