कुछ साथी केजरीवाल के धरने के बहाने पत्रकारिता में ‘निष्पक्षता’ की दुर्गति से बहुत आतंकित हैं

Navin Kumar : कुछ साथी अरविंद केजरीवाल के धरने के बहाने पत्रकारिता में 'निष्पक्षता' की दुर्गति से बहुत आतंकित हैं। वो इस ढाल का इस्तेमाल तभी करते हैं जब उनके 'नेता' के आदर्शों की लंगोट उतरने लगती है। फासीवादी हमेशा से सभ्यता, संस्कृति, परंपरा, भाषा, धर्म जैसे शब्दों की आड़ में अपने अपराधों को न्यायोचित ठहराते रहे हैं.. यह कोई नई बात नहीं है.. जैसे ही लोग इसके झांसे में आने से इनकार करने लगते हैं 'ख़ून' बहने लगता है.. अब इतिहास को तय करना है कि वह 'हत्यारे' को हत्यारा कहना जारी रखता है या 'उनके' आतंक से अपने अध्याय बदल लेता है.. (आजतक न्यूज चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत नवीन कुमार के फेसबुक वॉल से.)

Vikas Mishra : हमारे साथी रेहान अब्बास दफ्तर आ रहे थे। कापस हेड़ा के पास सड़क किनारे गाड़ी खड़ी की और दो मिनट के लिए बगल में दस रुपये का स्टांप लेने चले गए। लौटे तो दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का सिपाही खड़ा था। नॉन पार्किंग एरिया में गाड़ी खड़ी करने का जुर्म हो चुका था। जैसा कि होता है… प्रेस-पुलिस की हंसी-मुस्कान के साथ बात हुई। सिपाही बोला- अब्बास साहब पहले तो भाईबंदी में चल जाता था। अब तो आप लोग भी केजरीवाल के साथ मिल गए हो। चपरासी, सिपाही, पटवारी को ही सस्पेंड कराने में लगे हुए हो। हम लोगों ने भी सोच लिया कि ड्यूटी करेंगे। अब कोई भाईबंदी नहीं…..। मुस्कुराते हुए उसने 300 रुपये का चालान काट दिया। रेहान भाई ने ये कहानी सुनाई, सुनकर अच्छा लगा कि चलिए कहीं से तो कुछ बदल रहा है। इसका श्रेय किसको दें, समझ में नहीं आता। (आजतक न्यूज चैनल में कार्यरत विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *