कुमार मंगल बिड़ला के खिलाफ लीड खबर छापने में एचटी, मिंट और मेल टुडे की क्यों फटी?

जिस रोज केंद्रीय जांच ब्यूरो यानि सीबीआई ने उद्योगपित कुमार मंगलम बिड़ला के खिलाफ कोयला आवंटन घोटाले में एफआईआर दर्ज कराई, उसके अगली सुबह ज्यादातर बड़े अंग्रेजी-हिंदी अखबारों टाइम्स आफ इंडिया, इकानामिक टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, फाइनेंसियल एक्सप्रेस, दी हिंदू, डेक्कन हेराल्ड, दी पायोनियर, बिजनेस स्टैंडर्ड आदि में यह खबर पहले पन्ने पर लीड स्टोरी के रूप में प्रकाशित हुई.

लेकिन दो बड़े अखबारों ने ऐसा बिलकुल नहीं किया. कोल आवंटन घोटाले का आरोपी कुमार मंगलम बिड़ला को बनाए जाने और इस उद्योगपति के खिलाफ सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज कराए जाने की खबर को हिन्दुस्तान टाइम्स और मेल टुडे ने जबरदस्त अंडरप्ले किया. इन दोनों अखबारों ने इस खबर को बीच के पन्नों में छुपाने जैसा डाल दिया था.

इसकी वजह यह है कि हिन्दुस्तान टाइम्स की मालकिन यानि चेयरमैन शोभना भरतिया खुद बि़ड़ला परिवार की हैं. केके बिड़ला की बेटी हैं शोभना भरतिया. केके बिड़ला के सगे भाई का नाम बीके बिड़ला है. बीके बिड़ला के बेटे का नाम आदित्य बिड़ला. और आदित्य बिड़ला के बेटे हैं कुमार मंगलम बिड़ला. इस तरह परिवार के बेटे-भाई के उपर 'आफत' आई हो तो भला उस परिवार का अखबार कैसे बड़ी बड़ी खबर छाप सकता है. पत्रकारिता और मीडिया के मानक गए तेल लेने. पहले तो बिजनेसमैन अपने परिवार का भला-नुकसान देखेगा, उसके बाद कुछ और.

यही कारण है कि हिन्दुस्तान टाइम्स ने कुमार मंगलम बिड़ला के खिलाफ एफआईआर वाली खबर दिल्ली एडिशन में अंदर के पेज (पेज दस पर) सिंगल कालम में प्रकाशित किया है. एचटी मीडिया द्वारा संचालित बिजनेस पेपर मिंट ने भी इस खबर को अंडरप्ले करते हुए सिंगल कालम में प्रकाशित किया है.

इंडिया टुडे ग्रुप के टैबलायड मेल टुडे ने इस खबर को पेज नं 25 पर डाला है. अब आप कहेंगे कि इंडिया टुडे ग्रुप के अखबार मेल टुडे से भला बिड़ला का क्या रिश्ता? तो बता देते हैं. कुमार मंगलम बिड़ला ने अरुण पुरी वाले टीवी टुडे ग्रुप और इंडिया टुडे ग्रुप की कम्पनी लिविंग मीडिया का 26 प्रतिशत हिस्सा मई 2012 में खरीद लिया है.

यह कुछ कुछ मामला वैसा ही है कि अगर मुकेश अंबानी के खिलाफ कहीं कोई एफआईआर हो गई तो पूरा ईटीवी नेटवर्क और नेटवर्क18 समूह के सभी चैनल चुप्पी साध जाएंगे, क्योंकि ये अंबानी के पैसे से चलते हैं. आप समझ सकते हैं कि किस तरह इन उद्योगपतियों ने पहले देश के अफसरों, फिर नेताओं और अब मीडिया वालों को अपने चंगुल में कर चुके हैं और इस तरह देश के असली शासक ये उद्योगपति ही बन गए हैं.

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