कुरुक्षेत्र फिल्‍म महोत्‍सव : अश्‍लील फिल्‍मों की आड़ में अखबारों की आपसी जंग

कुरुक्षेत्र विश्‍वविद्यालय के पत्रकारिता संस्‍थान में फिल्म महोत्सव के दौरान नग्न दृश्यों वाली फिल्म दिखाने जाने वाले विवाद में अब हरियाणा के अख़बार भी आपस में भिड़ रहे हैं. कुरुक्षेत्र अब अखबारों की आपसी जंग का गवाह बनता जा रहा है. संस्‍थान की आड़ में अखबार आपसी जंग लड़ रहे हैं. एक ओर पंजाब केसरी मामले की पूरी सच्‍चाई उजागर करने के दावे के तहत भरपूर खबर छाप रहा है. अखबार हर रोज इस मामले को लेकर तीन से चार स्‍टोरी प्रकाशित कर रहा है.

इन स्‍टोरियों में बताया जा रहा है कि पत्रकारिता सिखाने वाले संस्‍थान ने मर्यादाओं को तार-तार करते हुए छात्राओं के सामने लगभग ब्‍लू की श्रेणी में आने वाली अंग्रेजी मूवी दिखा दी और विश्‍वविद्यालय मामले को दबाने में लगा हुआ है. दूसरी तरफ सोमवार को दैनिक भास्‍कर ने पंजाब केसरी पर प्रहार करने वाली या अघोषित रूप से संस्‍थान के अधिकारियों का पक्ष लेते हुए एक तरफा खबर अपने चंडीगढ़ एडिशन में प्रकाशित की है. भास्‍कर ने लिखा है कि पत्रकारिता संस्‍थान में अश्‍लील फिल्‍म दिखाने की बातें बेबुनियाद हैं. यहां पर कोई डर्टी पिक्‍चर नहीं दिखाई गई बल्कि कुछ लोगों का दिमाग ही डर्टी है.

भास्‍कर ने संस्‍थान का पूरा पक्ष लेते हुए एकतरफा खबर छापी है. खबरों में उन लोगों के विचार तथा फोटो को स्‍थान दिया गया है, जो इस महोत्‍सव से जुड़े हैं या फिर पत्रकारिता संस्‍थान के खास लोगों में से एक हैं. हैरानी की बात यह है कि इस खबर पर भास्‍कर, चंडीगढ़ के न्‍यूज एडिटर सौरभ द्विवेदी ने बाइलाइन भी ली है. सौरभ को चंडीगढ़ का न्‍यूज एडिटर बने काफी समय हो गया है. आजतक उन्‍होंने किसी खबर में अपना नाम नहीं दिया या कहें कि शायद ही कोई खबर लिखी हो. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर सौरभ को इस मामले में रिपोर्टर की भूमिका निभाने की जरूरत क्‍यों पड़ गई? गौरतलब है कि ये पत्रकारिता संस्‍थान सौरभ को सेमिनारों में भाषण देने के लिए बुलाता रहता है.

सूत्रों का कहना है कि इसके बाद भास्‍कर और पंजाब केसरी एक दूसरे को टेढ़ी नजर से देख रहे हैं. उधर, भास्‍कर के एकतरफा खबर लगाने पर कुरुक्षेत्र प्रेस क्‍लब में अखबारों की आपस में धड़ेबाजी शुरू हो गई है. भास्‍कर, कुरुक्षेत्र के ब्‍यूरो प्रमुख संदीप साहिल को बड़ी सारी आलोचनाएं सुननी पड़ रही हैं. आज समाज भी इस मामले को दबी सी जुबान में उठा रहा है. जिसकी वहज से इस अखबार को भी मौखिक आलोचना झेलनी पड़ रही है. दैनिक जागरण इस मामले को अलग तरह से ले रहा है. जागरण खुद को यह साबित करने पर लगा है कि वो बहुत ही न्‍यूट्रल तरीके से इसकी कवरेज कर रहा है. इस बीच यह बात भी उठ रही है कि जिन अखबारों के संपादक इस संस्‍थान में भाषण देने आते हैं, वो इस महोत्‍सव के प्रति नरम दृष्टि रख रहे हैं.

पंजाब केसरी ने तो आज के अंक में प्रकाशित भी कर दिया है कि जिन अखबारों के संपादकों को इस संस्‍थान से पैसों के लिफाफे मिले हैं उनकी भी पोल खोली जाएगी. वहीं हिंदुस्‍तान टाइम्‍स अखबार और पायनियर वाले पत्रकार कोई खबर इस मामले में कुरुक्षेत्र से नहीं भेज रहे हैं. बड़े अंग्रेजी अखबार के पत्रकार इस संस्‍थान के अधिकारियों के पास बैठ कर उनको सांत्‍वना देने का काम कर रहे हैं. अंग्रेजी अखबारों की बेरुखी का भी स्‍थानीय पत्रकार विरोध कर रहे हैं. इंडिया न्‍यूज हरियाणा ने कल इस विवाद पर आधे घंटे का कार्यक्रम दिखाया. कुल मिलाकर इस कुरुक्षेत्र में अखबारों की जंग अभी जारी रहने के आसार हैं. 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *