कृष्ण कल्पित की कविता पर ओम थानवी ने जताई आपत्ति तो शुरू हो गई ऐसी-तैसी

Om Thanvi : दूरदर्शन के एक अधिकारी-कवि हैं जो अपने आप को मानो कबीर, मीर, ग़ालिब, पार्थ, सार्त्र आदि का अवतार समझते हैं और आजकल अपने "महाकाव्य" 'बाग़-ए-बेदिल' को किसी नामी लेखक के हाथों थमा उसका फोटो खींच फेसबुक पर चस्पां कर देने के लिए जाने जाते हैं। फेसबुक पर हाल ही शाया उनका यह "कवित्त" एक मित्र ने मुझे पढ़वाया हैः

( "रावण ने सीता का अपहरण ज़रूर करवाया था
लेकिन ज़ोर-ज़बरदस्ती नहीं की
बल्कि सहमति की कोशिश और इन्तिज़ार करता रहा, पार्थ!

लेकिन इस तेज़-तर्रार पंजाबी रावण ने
मिथिला-बिहार की बेटी के साथ
गोवा के एक पाँच-सितारा होटल में ज़ोर-ज़बरदस्ती की, सार्त्र!

रावण तो सचमुच विद्वान था
लेकिन यह द्वि-कौडिक अंग्रेज़ी-लेखक और पीत-पत्रकार
दूसरे, तीसरे और चौथे बलात्कार पर उतारू है, अरुन्धती!

(बलात्कार नम्बर दो-१(१६२)//कृक//प्रथम पेय//)

और शूर्पण खां इन दिनों अंग्रेज़ी में रावण का बचाव कर रही थी, देशवासियो!" )

आप कुछ समझे? ये कथित महाकवि "पंजाबी रावण" और "मिथिला-बिहार की बेटी" उपमाएं देकर क्षेत्रवाद की आग ही नहीं भड़का रहे, पीड़ित पत्रकार युवती की पहचान की ओर भी स्पष्ट संकेत कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, कवि महाशय प्रकारांतर से बलात्कारी को जोर-जबरदस्ती न कर (रावण की तरह!) जैसे "सहमति" की कोशिश और "इंतिज़ार" की प्रेरणा भी दे रहे हैं! क्या "प्रथम पेय" के बाद ऐसे 'कवि' भूल जाते हैं कि रावण और उसकी बहन शूर्पणखा (शूर्पण खां नहीं) के साथ वे सीता के बहाने जिस युवती पत्रकार की बात कर रहे हैं, वह तरुण तेजपाल के समक्ष बेटी-सरीखी थी और मातहत सहकर्मी भी?

बहुत तरस आता है ऐसे "काव्य" बोध पर। और खीझ भी होती है।

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से. इस पर आईँ कुछ टिप्पणियां यूं हैं…

    Priyam Tiwari ऐसे हाल में पांचवां पेय/ और फिर नींबू का सेवन कवि मन को धरातल पर जल्द ही ला पटकता है। और इस क्षेत्रवादी रामायण पर से पटाक्षेप होता है।

    Bharat Tiwari सर ! तरस और खीझ दोनों शब्द नाराज़ हो जायेंगे … पेंच कस की ज़रुरत है यहाँ

    Hindi Mamta Dhawan आपकी टिप्पणी ने उन्हें अब महतवपूर्ण बना दिया

    Dinesh Chandra Purohitt sir tarun tejpaal ne to patrakareta ko badnam kardiya hai ,or baad mai choudhary jo hmesa mahela adhikaro ki baat karti hai aaj vo bhi apna sur bdal rahi hai.
 
    Zubair Shahid Naye jamane ka Ramayan rach rahe ho shayad?
 
    Rajeev Raj Tarun tejpal ka wo kavi bhi sahodar bhai hi hoga…by birth nahi…by work
   
    Vibhore M Seth ha ha hs..baap mare 'ANDHERE' me beta power house…
    
    Madhu Arora पीने के बाद ऐसा ही लगता होगा उनको।
     
    Om Thanvi Hindi Mamta Dhawan अब इसका क्या करूँ जो इसी से महत्त्व पा जाय है मुझसे!!
     
    Hindi Mamta Dhawan Om Thanvi जी लोगों को तो आपकी जुबान पर अपना नाम चाहिए बस .आपकी तवज्जो रहे ,कैसे भी
 
    Sarvesh Dinanath Upadhyay shuparn khan ' aisa likhne ki apko jarurat kyu padi ? khan ho ya hindu isse kya blatkar ki paribhasha badal jati hai ? thanvi sahab aaap kabhi kabhi betuki bate kartey hain . baat saaf aur seedhi honi chahiye , koi mod – tod kar nahi
   
    सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी भगवन से प्रार्थना है मूर्खों के सींग पूँछ दे दे। चाहे मैं खुद ही लपेटे में क्यों ना आ जाऊं

    Sunil Mishr आदरणीय सर, ये तथाकथित परिपक्वता उनके व्यक्तित्व पर मुहासों की तरह उग आयी लगती है, बड़ा शर्मनाक है।

    Sunil Sharma Bakvas hai

    Om Thanvi Sarvesh Dinanath Upadhyay "शूर्पण खां" मेरा प्रयोग नहीं है मेरे गुरु, मैंने बस उद्धृत किया है! दो-दो उद्धरण-चिह्न दे कर।

    Asim Jairajpuri इन्हें भी "भारतीय राजनीति कॉलोनी " में एक घर कि चाहत हो गयी है !!! क्राइसिस ऑफ़ आइडेंटिटी तो हईये है !

    Sarvesh Dinanath Upadhyay sir maine to apke status par dekha ,
 
    ठा. कृष्ण प्रताप सिंह सर ! काव्य-बोध और लेखन की गरिमाओं को भुलाकर आधुनिक रामायण की नींव रखी जा रही है शायद काव्य लेखन की उनकी बौद्धिकता भी प्रदर्शित होती है

    Fahad Saeed hum sab azad hai kuch bhi kehno ko
 
    Sarvesh Dinanath Upadhyay mujhe nhi pta aap ' khan; ko itna importance kyu diye , darasal aap puurvagrah se grasit hain ya controversy aa
   
    Akbar Rizvi कवि महोदय का नाम बता देते तो हम भी उनका पेज दर्शन कर आते।
    
    संजय महापात्र जब कविता इतनी भयंकर है तो महाकाव्य बाग-ए-बेदिल किसी सूनामी से कम ना होगा ।

    Dinesh Chandra Purohitt LOG FOMOUS HONEKE LIYE KUCH BHI LEKAH SAKTE HAI
 
    Dhirendra Pandey फेसबुक पर फेमस होने की चाह में तमाम कुकुरमुत्ते हैं जो अपने को छाता समझते हैं  
 
     Mukesh Bahuguna कविता लिखना उनका अधिकार है ,, उनके इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए ,,, और कविता पढ़ना ,, न पढ़ना या पढने के बाद कविता और महाकाव्य को कुंवे में फेंक देना आपका अधिकार है ,,, आपके अधिकार का भी सम्मान किया जाएगा
 
    Aman Dwivedi यह तो हद हो गई सर…..!!

    Ved Prakash Gupta Baudhik vilas bhar hai… Ac me gaddedar sofe par baithkar ubkai aati hai !!
 
    Chandan Srivastava सर माफ कीजियेगा लेकिन आपने इस कविता को प्रचारित भी कर डाला, आलोचना के ही सहारे. लेकिन प्रचार तो किया

    Inderjeet Singh Modesty and righteousness both have vanished, and falsehood struts around like a leader, O Lalo.
    (Guru Granth Sahib)
 
    Nirbhay Kulkarni "प्रथम पेय"
 
    Balendra Shekhar महाशय #controversy चाहते हैं मेरा मानना है ऐसे मामलो में
    बेहतर होगा के महाशय को खोपचे में ले जा कर वतर्मान रीत रिवाज से समझाइश दी जाये ..
    गर बवाल हुआ तो ..जिस के खातिर उन्होंने ये लिखा है वो उनका सपना साकार हो जायेगा
    मीडिया में चार लोगो को बैठा कर डिबेट करना … आप बताइये आप बताइये
    ये तर्क संगत नहीं होगा …

    Bodhi Sattva रावण ने सीता का हरण करवाया था किससे करवाया था, यह इनसे कौन पूछे। यह तो इनके ही पौराणिक संदर्भ की खेती है।

    Om Thanvi Akbar Rizvi कवि का नाम कृष्ण कल्पित। पन्ना Kalbe Kabir नाम से।

    Anjum Sharma काव्य से इतनी ज़ोर जबर्दस्ती क्यों की पार्थ? यह क्या किया सार्त्र…
 
    आदित्य भारतीय koi link dega lekhak ki ….
 
    Sanjay Sharma मेरे मन में तो इन तथाकथित कवि महोदय के हरण की इच्छा और तत्पश्चात ,इनकी भोपाली आवभगत के साथ ही इनकी अशोकवाटिका को उजाड़ने की इच्छा बलवती हो उठी है !! शर्म आती है ऐसे लोगों पर ,…।
 
    Praveen Praveen KABITA PREM PER LIKHI JATI HAI RAPE PER NHI
 
    Anil Khamparia इन पर तो विभागीय एक्शन तत्काल होना चाहिये ……
   
    Om Thanvi Mukesh Bahuguna यह कविता है? कुछ कविता की हम भी खबर रखते हैं। अज्ञेय, नागार्जुन से लेकर भवानीप्रसाद मिश्र, विजयदेव नारायण साही, नरेश मेहता, रघुवीर सहाय, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, कुंवर नारायण, केदारनाथ सिंह, विष्णु खरे, नरेश सक्सेना, अशोक वाजपेयी, आलोकधन्वा, ज्ञानेन्द्रपति, ऋतुराज, नंदकिशोर आचार्य, चंद्रकांत देवताले, उदय प्रकाश, राजेश जोशी, वीरेन डंगवाल, लीलाधर जगूड़ी, मंगलेश डबराल, असद ज़ैदी आदि की सोहबत भी मिली है। कविता के अधिकार के नाम पर हमें कविता से इतना न मोड़ें बंधुवर।See Translation
 
    Manish Mishra Om Thanvi sir…. sambhav hai jin mahakaviyon ka aapne naam liya hai we tahalka purm sadi ke hon. Doordarshan wale kavi abhi panap rahe hain….. waise sita bhi ravan ki hi putri thi…..
   
    Mukesh Bahuguna हा हा हा हा हा ,, भाई जी ,, मैं व्यंगकार हूँ तो कृपया अन्यथा न ले ,, असल में तो मैं इस जलन से जल रहा हूँ की काश नेकी कर दरिया में डाल की तरह कविता पढ़ और कवी ( दूरदर्शन के अधिकारी-कवि छाप कवि को ) को दरिया में डालने का अधिकार भी होता
    
    Manish Mishra Om Thanvi sir… मिथिला बिहार की बेटी दोहरा कर आप क्या साबित करना चाहते हैं? यही कि कवि महोदय का इशारा किस तरफ है? यहाँ आत्मावलोकन की जरूरत है।
     
    Om Thanvi Anil Khamparia एक्शन? एक बार तो रिश्वत लेते रंगे-हाथ CBI गिरफ्तार कर चुकी है। तब कविश्री जयपुर दूरदर्शन में थे। … ऐसी गिरफ्तारी के बरसों बाद कोई बहाल कैसे होता है, यह खुदा ही जानता होगा।
 
    Manish Mishra अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए Om Thanvi sir कविता बुरी है या कवि का चरित्र?
 
    Siddhant Mohan जो हर कुंठा पर कविता रचे, उसे कवि न कहा जाए भले ही कुछ भी कह दिया जाए क्योंकि हिन्दी में हमनें कवियों के बहुत ऊंचे मानक सेट कर रखे हैं.
     
    Shayak Alok बस खीझ के छोड़ दीजिये .. कविता क्या रहेगी .. स्फुट विचार सा है ..इसी शैली में वे लिखते रहे हैं फेसबुक पर .. पंजाबी बिहारी करने से क्षेत्रवाद आया तो है जो नहीं आना चाहिए था .. बाकी सब ठीक ही है .. छूट दी जा सकती है ..
 
    Siddhant Mohan मनीष भाई, जो भाजपा सरीखा इतिहास ख़राब तुकबंदी में परोसे और घूम-घूमकर क़िताब बेचे, उसके लिए नज़र ज़्यादा साफ़ करने की ज़रूरत तो नहीं है.
 
    Manish Mishra धन्य हैं ऐसे महाप्रभु जो खुद को पत्रकार और intellectual कहलाने का शौक रखते हैं सिद्धांत भाई। छी छी
 
    Siddhant Mohan मनीष भाई, आप बताइये कि आप किधर इशारा कर रहे हैं? मैं तो कल्पित जी को कह रहा हूँ.
 
    Shayak Alok कवि का अभिप्राय मुझे तो बड़ा स्पष्ट लगा कि लोकाचार में सबसे बड़े विलेन के रूप में स्थापित रावण तक ने स्त्री के खिलाफ सेक्स क्राइम नहीं किया बल्कि इन्तजार करता रहा कि किसी कारण सीता की सहमति प्राप्त हो जाए .. बाकी मॉडर्न रावण का जो चरित्र चित्रण कवि ने किया प्रकट ही है .. एक पंक्ति में अरुंधति के सेकण्ड रेप व्याख्यान को भी ले आये अपने पक्ष को मजबूत दिखाने .. अंत में शूर्पनखा के रुप में शोमा चौधरी को प्रस्तुत कर थोड़ी चिढ दिखा दी .. सही है .. खीझ हो सकती है इस पोस्ट से .. किन्तु ..बस .. खीझ तक ही
 
    Shayak Alok हा हा .. बिजनेस भास्कर का सब एडिटर जनसत्ता के सम्पादक को पत्रकारिता और बुद्धिजीविता का सर्टिफिकेट दे रहा है .. हमरी अहिन्दीभाषी गर्लफ्रेंड ठीके कहती है कि तुम हिंदी वालों ने फेसबुक को सर्कस बनाकर छोड़ा हुआ है जहाँ अलहदा किस्म के किरदार होते नहीं हैं पाए जाते हैं ..

    Siddhant Mohan फेसबुक ने बड़े बड़ों और नोखे-निठल्लों को आश्रय दिया है, तो कल्ब की जगह भी महफूज़ रहे.
 
    Bholanath Kushwaha like
 
    Ajit Priyadarshi phesbukiya aasu-kavita ko lekar etane gahan-vimarsh ki jarurat hi kya….
   
    Prathak Batohi आशा है वे आपकी इस विवेचना से कुछ सुधार लायेगे, अन्यथा आपकी विवेचना और उनकी कविता दोनों व्यर्थ ही रहेंगी
   
   संतोष त्रिवेदी ई कबिताई नहीं भड़ैती है!

    Pervaiz Alam Aap ne izzat bakhsh di varna in hazrat ka zikr bhi fuzool hai.
 
    Sudhendu Patel daagi kave ka apana aanuva ve dagail he hai purane pape hai!!!
 
    Baldeo Pandey Very unfortunate!
   
    Pankaj Tiwari हा हा रावण दुर्दशा देखी नही जाई
    
    Mukesh Popli महोदय, कबीर, मीर, गालिब तो हर कवि के आदिगुरु कहे जाते हैं, दो-चार शब्‍दों या वाक्‍यों की हेरा-फेरी करके, अपने से वरिष्‍ठ कवियों की चमचागिरी करके (सम्‍मानपूर्वक नहीं), बे-गैरत होकर गोष्ठियों में पहुंचकर जबर्दस्‍ती वाह-वाही करके और बे-वक्‍त ही-ही, वाह-वाह करके प्रसिद्धि पाने के इच्‍छुक लोग हमारे साहित्‍य क्षेत्र में बहुत हैं। कम-से-कम दर्जन भर तो मैं भी ऐसे कवियों को जानता हूं जिनका नाम सिर्फ और सिर्फ दूसरे लोगों की सिफारिश या बड़े पदों पर काम करने के कारण कविता क्षेत्र में लिया जाता है। अब रही बात इनकी रचना की, इस बात पर तो मेरा इतना भर कहना है कि कविता रचना कोई बच्‍चों का खेल नहीं है, अगर महाभारत और रामायण के प्रसंगों को ही उठाना है तो अपने थीसिस में उठाइए,पूर्व प्रसंगों या रचनाओं को तोड़-मरोड़ कर लिखने का काम फिल्‍मी गीतकारों या भाड़े के टट्टुओं पर छोड़ दीजिए, कविता तो समाज को बदलने का एक जरिया है, लोगों को जागरुक करने का एक माध्‍यम है, आजादी (चाहे वह किसी भी देश की हो) पाने की लड़ाई में पत्रकारिता और कविता सबसे ऊपर रही है, कविता केवल अभिव्‍यक्ति नहीं होती, समाज को प्रगति की ओर ले जाने का एक जरिया होता है, शायद इसीलिए मैं ऐसे लोगों का सम्‍मान नहीं कर पाता या उनके साथ अपने ख्‍यालात नहीं बांटता जोकि बात-बात पर कविता करने लगते हैं। पिछले दिनों जावेद अख्‍तर साहब के ख्‍याल पढ़कर भी हैरानी हुई और बहुत से दूसरे महानुभावों के विचार जानकर भी। लगे-हाथ इतना तो मैं भी कह सकता हूं कि 'तुम में अपनापन न सही, थोड़ी सी गैरत तो होगी, अतीत में झांकने से पहले, आंखों का शीशा तो साफ कर लीजिए'
 
    Govind Goyal he bhagvaan…tune kaise kaise namune banayehain
 
    Pankaj Kumar ese chapau rog kahate hai.
   
    DrDeepak Acharya हर युग में मूर्ख रहे हैं। ये बुद्धिजीवी जो बुद्धि को बेच कर जैसे-तैसे परायों पर पल रहे हैं, उनसे इससे ज्यादा अपेक्षा भी नहीं की जा सकती। हे ईश्वर…. उन लोेगों को अच्छी बुद्धि दे ….. आजकल भारतीय संदर्भ को विकृत ढंग से पेश करने वाले कमीनों का जमघट हर कहीं लगने लगा है। फिर साहित्य भी तो बकरा मण्डी से कहां कम रह गया है।

    Banwari Lal Gaur बहुत सुंदर और तार्किक बात कही है थानवी जी ।

    Shriniwas Rai Shankar तरस कम खीझ ही ज्यादा होती है…ये खुद मामा मारीच की कटेगरी के दिखते हैं.इनकी चिंता भी रावण के ही बचाव की है..'लंकाई रावण' के .

    Sandip Naik Shame……..on this…….
 
    Samir Gupteshwar Singh आप के इस पोस्ट से असहमत हूँ कविता में कवि के भाव महत्त्व पूर्ण है मेरे समझ से कवि जो कह रहा है पहला तेजपाल का कृत्य रावण से भी ज्यादा घृणित है दूसरा एक आर्थिक रूप से मजबूत (पंजाब) का कमजोर व रोजगार आश्रित (मिथिला) पर अत्याचार की भावना है तीसरा नारी होकर शोमा का कृत्यशूर्पनखा सा है ।कवि अपनी बात अपने तरह से कहा है पर तेजपाल के समर्थको को तेजपाल की आलोचना से अपच हो रही है ।
 
    शंभूनाथ शुक्ल गपोड़पंथी कल्पना के धनी ऐसे कवियों से और उम्मीद ही क्या की जा सकती है।

    Gunjan Sinha छोड़िये जाहिल है।

    अंजू शर्मा कविता कहाँ है???? यहाँ तो केवल कुंठा हैं।

    Aflatoon Afloo कचरा.आपकी समीक्षा से तर गया होगा.
 
    Om Banmali yeh kavya shilp ki arthi hai akal ka divaliyapan
 
    Pooja Singh Ye kabita nahi unke man ki atript abhilasha hai
 
    Rajendra Sharma हिंदी मै ऐसे कितने कवि,कथाकार,लेखक,आलोचक है जो दिल से मानते हो कि मै जितना काबिल था हिंदी ने मुझे उससे ज्यादा दिया है ,ज्यादातर को यही गिला रहता हे कि उन्हे कुछ नहीं मिला ,उतना नहीं मिला जितना मिलना चाहीये था और ज्यादातर को यही लगता रहता है कि उनके खिलाफ सब साजिस रच रहे है .हिंदी के एक कवि को फेसबुक पर यही शिकायत रहती है की उसी कभी किसी ने प्यार नहीं किया..
 
    Manish Mishra Siddhant Mohan bhai मेरा इशारा भी कल्पित जी के तरफ ही है

    Piyush Kumar Pandey कृष्ण कल्पित

    Rajeev Gupta रावण ने भी अपने प्रचारक छोड़ रखे थे । कुछ राम व उनकी सेना के हाथों मारे गये और जो बच गये कुछ ज्रिदा रह गये आज के रावण का गुणगान करने के वास्ते कुन्ठित मानसिकता लिये।

    Ranjit Choudhary उनकी भावना तो तरूण तेजपाल के कृत की आलोचना की ही है। भावना प्रधान है, शब्द नही। शब्दों के चयन मे गलती हो सकती है।
 
    Radheyshyam Singh Apne mithako ka virupikaran ghatak hai.
 
    Rakesh Achal he ram
   
    Anoop Pandey निरंकुशा: कवय: ।
    
    Vijay Rana That was my first reaction: why blame all Punjabis.
     
    Narayan Singh Deval Aise hi kuch alochak soor,tulsi ko neecha jatakar khud ko pratishthit karte rahe hain.
     
    Ashok Gupta संकीर्ण और तात्कालिक आवेग का प्रतिफल होती हैं ऐसी रचनाएँ… इनके पीछे कोई वैचारिक तंत्र नहीं होता…यह क्षम्य नहीं हैं.
     
    Brijraj Singh सही कहा आपने

    Indra Mani Upadhyay सही कहा सर
 
    Preeta Bhargava jee , bilkul
 
    Raviraj Singh तुकबंदी..
   
    Manoj Trivedi This ia a rape of poetry
    
    Rakesh Rk रावण ने अपहरण करवाया कहाँ था, खुद किया था| दूरदर्शन के निदेशक यदि साहित्यकार हैं तो उन्हें देखना चाहिए किस श्रेणी में उनके मातहत अधिकारी नियुक्त हुए थे और क्या किसी को लेखक/कवि होने का लाभ भी मिला था? बहरहाल कवि/अधिकारी महोदय अकेले नहीं हैं, तीन-चार रोज पहले ही मीडिया छाप/घोषित कर चुका था कि तरुण तेजपाल पर आरोप लगाने वाली युवती मिथिला/बिहार से आती है|
 
    Vikram Singh Bhadoriya jo bhi ho inki kavita ko share karke aapne inhen kavi kahaa yah badi baat hai Om Thanvi ji
 
    Mukund Mishra ऐसे ही सुशिक्षीत लोगों ने भारत का बेडा गर्क किया है..उन्हें मै बता दूँ की मिथिला संस्कार की जननी है,सभ्यता की सिरमौर है.इतना कहने के बावजूद वो मिथिला आये और यहाँ का आतिथ्य संस्कृति देखें,…
   
    Ashraf Alam hahahaaa
 
    Arun Srivastava अच्छा है कल्पित कृष्ण जी !!!!!!!!!! कविता क्या , भाव प्रदर्शन है बस बिना किसी कारीगरी के ! अधिकतर जगहों पर भाव कुछ बीमार-बीमार से लग रहे हैं ! बाकि सब तो ठीके है !  
   
    Priyam Tiwari सर नमस्कार। कहीं किसी ब्लॉग में अविनाश को पढ़कर आपको लेकर कृष्ण कल्पित के विचार मालूम हुए। वो यह रहे कि हिंदी -पत्रकारिता के ज्ञात इतिहास में एक से एक कामी कुटिल अयोग्य अर्द्ध-शिक्षित गंवार नीम-पागल जघन्य जंगली जरायम संपादक हुए हैं, पार्थ! लेकिन ऐसा संपादक नजरों से पहले नहीं गुजरा, जिसके भीतर असंख्य मुर्दों का वास हो और जो स्वयं एक चलता फिरता मुरदों का टीला हो। मुइन जो दड़ो – 5. (116-4) ।। कृ.क.।। प्रथम पेय।।
    कृष्ण कल्पित और ओम थानवी एक ही सूबे से दोनों आते हैं। एक बार भ्रष्टाचार के आरोप में कृष्ण कल्पित को हथकड़ी लगी और उन्हें जेल जाना पड़ा। उन्होंने थानवी जी मदद के लिए कहा। थानवी जी ने हाथ खड़े कर दिये कि मामला संगीन है और इस मामले में आपको खुद ही जूझना होगा। बस इसी गांठ ने कृष्ण कल्पित को ओम थानवी के खिलाफ एक अनवरत अभियान का खलनायक बना दिया है।  
 
    Swapnil Tiwari mujhe laga sirf main hi hun jo iritate ho raha hun unse… yahaan to lambi list hai… ghazal par bhi haath aazmaate hain wo.. tab ghazal par taras aata hai mujhe…
 
    Jitendra Kalra शोचनीय है कि एक बलात्कारी ना केवल लड़की के घर जाकर उसको धमकाता है बल्कि खुले आम उस लड़की कीमत लगाने की कोशिश करते हुए ना केवल सभ्य समाज के लोगों बल्कि हमारे संविधान और लोकतंत्र के मुँह पर ज़ोरदार तमाचा मारकर चला जाता है और समाज में उसकी गिरफ्तारी की माअंग का स्वर उस बुलंदी के साथ सुनाई नहीं पड़ता जितना एक सभ्य समाज से अपेक्षा की जाती है। विश्वास नहीं होता कि भारत की राजधानी दिल्ली में जी रहा हूँ कि कोई हिन्दी फिल्म चल रही है। IS MUDDE PAR DO TOOK BAAT KAHIYE KI AAP US BALAATKAARI KE SAATH HAIN YA JALD SE JALD USAKE DOSHI SATHIYON KE SAATH USKI GIRAFTAARI KI MAANG KO BULAND KARTE HAIN. FAISALA AAPKAA KYONKI JEEWAN HAI AAPKA.
 
    Om Nishchal सुना हे, इसमें बहुत सारी कविताऍं अशोक वाजपेयी, अज्ञेय, अन्‍यान्‍य कलावादियों, उनके जीवन और जीवनशैलियों और आपके विरोध में रची गयी हैं। पहली बार तो यही लगा कि यदि ये लोग न होते तो ये कविताएं भी कहां होतीं। पर इसके ब्‍लर्ब पर अरुण कमल जी की मुँहमॉंगी प्रशस्‍ति भी दर्ज है सो इसे पढ़ने के लिए मँगाया है। पर एक बात मुझे जो लगी वह यह कि कविताओं में व्‍यक्‍तियों का ऐसा पट्टीदारी जैसा विरोध पहली बार देखा। प्रवृत्‍तियों का विरोध होता तो शायद कुछ बात बनती। तभी कवि से मैंने पूछा था कि ऐसा काव्‍य लिखने की प्रेरणा देवीप्रसाद मिश्र तो कतई न देंगे, जैसा कि उन्‍होंने कहीं उनके प्रति प्रेरक आभार दर्ज किया है।

    बाकी टाइमलाइन पर बैठे हुए लेटे हुए खड़े हुए,सोते हुए जागते हुए, बैलगाड़ी पर पढते हुए, प्रियदर्शन, खगेंद्र ठाकुर, अरुण कमल, कर्मेंदु शिशिर, नंद किशोर नवल आदि और खुद कल्‍पित जी का प्रदर्शन , यद्यपि कवि का यह अपना अधिकार है, उनके उत्‍साहजन्‍य अतिरेक का पर्याय तो है ही। मेरा मानना है कि यदि कोई सच्‍चा सलाहकार होता तो उनका काव्‍य इस रूप प्रतिरूप में तो कतई न होता। चूँकि वे भी हमारे सुपरिचित हैं, इससे ज्‍यादा कहना मैत्री के विपरीत होगा।
 
    Pratyush Pushkar कलम आजमाने की गज़ब होड़ है .. मुद्दे की प्रतीक्षा में ताक़ लगाकर बैठे रहिये .. और जैसे कुछ मिला अपनी सारी कुंठा, साहित्य का जो जहां पढ़ा लिखा सब समेट कर गीतासार लिख दीजिये ! कवियों को शिकार करते ऐसे कभी नहीं देखा था! 'Desperate Attempt'!
 
    Dheeraj Kumar lajwab
 
    Om Thanvi Vikram Singh Bhadoriya कविता नहीं, तथाकथित कविता।
 
    Santosh Dwivedi 'Manuj' Tthakathit adbhut shbd h……dil jeet leta h y jitni bar b samne aata h….chuki khud b khud kafi kuchh byaan kr deta h.
   
    Shashikant Singh ये कलम के साथ की गई 'जबरदस्ती' है।
    
    Monika Jain Ye kabhi Laxmi Shankar Bajpai to nahi hai wo Bhi isi Khushfehmi me jite hai ki wo hi asl udhar karta hai Hindi sahitya k
     
    Rajshekhar Vyas आपने जाने -अनजाने कल्पित को कुख्याति दे कर उग्र मुक्तिबोध राजकमल सा विवादित तो बना ही दिया अब देखिये न जो बिहार कभी राजेंद्र बाबु ,जय बाबू ,शिवपूजन सहाय ,राम वृक्ष बेनीपुरी के कारण चर्चा मैं रहता था आज अजित रॉय (उसको भी चर्चित बनाने मैं आपका योगदान हैं -जैसे अशोक वाजपेयी को अशोक वाजपेयी बनाने मैं जाने अनजाने शरद जोशी -प्रभाष जोशी का महनीय योगदान हैं )त्रिपुरारी,अनुरंजन ,यशवंत ,से ले कर आपके मेरे प्रिय अविनाश की वज़ह से चर्चा मैं रहता हैं ……थोड़ी लिखी घनी बांच जो जी ,जोग लिखी ,गुस्ताखी मुआफ ………बहुत पाहिले आपके मेरे प्रिय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना ,,दिनमान (अज्ञेय काल से ले कर शायद रघुवीर सहाय काल तक )""चर्चा मैं ………स.द.स नाम से लिखते थे चर्चे और चरखे "आप भी शुरू कर दी जिए –गुर्गे और करघे टाइप ,,वैसे मैं आपको राजेंद्र माथुर ,प्रभाष जोशी परम्परा का संपादक मानता हूँ मगर आप भी सुम (जान बुझकर लिखा हैं )सुम -सामयिक मुद्दों को प्रज्वल्लित कर चुटकिया लेने से बाज़ नहीं आते ,,,,,,,,,,,,आपके अंदर भी एक उग्र रहता हैं !

    Abdul Wahid Maza Aagaya.
 
    Om Thanvi Rajshekhar Vyas फेसबुक को इतना गम्भीरता से न लो प्रभु! जैसे हम जब-तब सुम (जान-बूझ कर) पर आ जाते हैं, आप भी आया करो (यह करो भी बूझ कर)!
 
    Shashikant Singh व्यास जी ! दिमाग के ऊपर से निकल गया !! भगवान मुझे थोड़ी और बुद्धि दे।
 
    Om Thanvi Monika Jain Nahin. Culprit ka naam upar aa chuka hai.
   
    Mahesh Sharma inhe milna chahiye bharat ratn
 
    शंभूनाथ शुक्ल हिंदी का हर मास्टर कवि होता है, अखबार का हर पत्रकार क्रांतिकारी होता है ठीक उसी तरह आकाशवाणी और दूरदर्शन का हर अधिकारी साहित्यकार।
 
    Prakash K Ray 'Culprit' !!!
 
    Abdul Wahid true mahesh sb.
 
    Ramakant Roy उनका नाम काला है और वे कपोल कल्पित भी हैं..
   
    IP Singh Is this Kavita? It is an atrocity on a reader/listner if one is subjected to listen to or read such poem. Man seems to be intellectually bankrupt, emotionally hollow and seems to be Raping the Poetry. Yes is forcing himself on poetry. An example of Literary Rape.
     
    Shivji Joshi Ye taras aur kheej ke sarvtha yogay he.
     
    Tejkesari Daily काव्य कि समझ को लेकर दुखी होने या खीज होने कि आप की बात जायज है पर आज का काव्य तो यही है, इसी तरह के काव्य का वाचन व श्रवण तो लोगों कि पसंद बनता जा रहा है।
     
    Rakesh Rk कवितामयी माहौल में कविता-वायरस से पीड़ित हो जाना अनपेक्षित नहीं है| क्षमा सहित [वे काव्य का निर्माण करते हैं
    जैसे तंग गलियों में
    मैले कुचले कपड़े पहने
    लोग निर्मित करते हैं
    देसी तमंचे और कट्टे|
    ऐसे हथियार और उनका काव्य
    काम दोनों का एक ही है|
    बदला लेना,
    औरों को खत्म करना|
    चाकू, तमंचों, गोला-बारूदों से
    भी एक कदम आगे जाकर उनका काव्य
    वार करता है
    औरों को अपमानित करना,
    अराजकता फैलाना,
    या अपने जैसी बुद्धि वालों के
    लिए औरों का उपहास करने की
    सामग्री जुटाना उनका प्रिय शगल है|
    जिस पर हो जाए उनकी कोप-दृष्टि
    उसके भेजे में वे काव्य-बम फोड़ देते हैं
    अपनी तरफ से तो वे
    टाइम-बम बनाया करते हैं
    पर अधिकतर उनके बम
    जलते हैं सील गये सुतली बम की तरह|
    वे न थकते हैं कभी
    वे न रुकते हैं कभी
    अखबार,
    फिल्म,
    किताब,
    व्यक्ति,
    कुछ भी,
    कोई भी
    उन्हें कुपित कर सकता है|
    शोले देख वे
    गब्बर के पक्ष में
    ठाकुर से खफा गये
    एक बार इस बात से पारा हाई
    कि जब नाम “ अज्ञेय “
    तो क्यों इतनी बड़ी संख्या में
    लोग उन्हें जानने की कोशिश
    करते हैं,
    उनके रचे को पढ़ा करते हैं
    उन्हें गुमनामी के अँधेरे में क्यों नहीं पड़ा रहने देते?
    वे लगे हैं अपने जीवन की सार्थकता को पूरा करने में,
    वे न बदले हैं या रब न बदलेंगे
    वे काव्य की ऐसी मिसाइल
    बना रहे हैं
    जो उनके कम्प्यूटर से
    पृथ्वी के हरेक कोने में मार कर सके
    हवा में, पानी में और आकाश में
    औरों का साहित्यिक विध्वंस कर सके
    उन्हें उनके सामने नीचा दिखा सके|
    वैसे वे बड़े अहिंसक हैं
    इसीलिए तो काव्य बम
    बनाया और फोड़ा करते हैं|]
     
    Atul K Bhaskar samay badal raha hai… samaj badal raha hai… logon ki manshikta bhi badal rahi hai!
     
    Bharti Kuthiala aj har koi kavi ban jana chahta hai!!!!!!!!!!!!!
 
    Krishnamurarilal Agarwal Right.like
 
    Nishant Kumar Rishu I’m a failed poet.All of us failed to match our dreams of perfection. So I rate us on the basis of our splendid failure to do the impossible. Maybe every novelist wants to write poetry first, finds he can’t, and then tries the short story, which is the most demanding form after poetry. And, failing at that, only then does he take up novel writing.
    __________ Faulkner
 
    Shreesh Chandra सर और कुछ हुआ हो या नहीं एक क्षण के लिए सब गौण हो जाता है जितना कि कविता या काव्य बोध के साथ होने वाला बलात्कार प्रभावी दीखता है

    Asha Singh ye kya hai???
 
    Ashutosh Mitra सर इनको…. शीघ्र ही… बोध प्राप्त हो … ऐसी मंगल कामना ही कर सकते है…  
 
    Om Thanvi Asha Singh घोषित रूप से एक शराबी की "सूक्तियां"!
 
    Prateek Abhay ….Pr isme kavita kaha hai sir…!
 
    Jaideep Pandey Om Thanvi ji. Aisee kavi kavitaa ka star giraane me koi kasar nahi chor rahe…….acche kaviyo ko bhi badnaam karne me lage hai
   
    Vinod Bhatnagar kisi bhi poranik dharm granth par koi abdhra tippni karna apne apako kaya jayda buddiman batrana chata hai
     
    Manish Gupta Om Thanvi हाहाहाहा कवियों से तो पूरी दुनिया पीडित रही है,ये जिसको पाते है उसे ही अपनी कविता सुनाना शुरू कर देते हैं, अबकी बारी आपकी थी सो आप फंस गये, वैसे उंट भी कभी कभी पहाड के नीचे आ जाता है, हाहाहाहा
     
    Sunita Bharal ये भी कैसा है मेल
    मिथिला की ज्योति कुमारी
    मिथिला की तहलका कुमारी
    ये ही क्यूँ रचें ऐसे खेल
 
    डॉ नीहारिका रश्मि कवितातोछोडिए ये तो का बिले गौर पंक्तियाँ भी नहीं है .किसी तथ्य के प्रति आश्वत हुए बिना कैसे लिखा जाता है ,रावण को श्राप मिला था उसके सर के सौ टुकड़े हो जाते ,यदि वो जबरदस्ती करता तो ,काश ऐसा श्राप आज लोगों को मिला होता तो ,अपराधी की पहचान सहज ही हो जाती .

    Geeta Shree सर, ये महाकुंठित प्राणी हैं…इनसे सारी जनता आहत है। किसी को नहीं बख्शा है। खासकर महिलाओं के बारे में गंदे शेर शायरी गढ कर पुरुष साथियों को एसएमएस करने के लिए भी कुख्यात है। किसी के बारे में भी बकवास कर सकते हैं। मुझे तो ईश्वर का वह ढांचा ही यकीन के लायक नहीं लगता जिसमें यह केमिकल लोचा तैयार हुआ होगा…
          
    Brijendra Dubey paagal longon hain……….inse yahi ummid hai

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