कृष्‍णभानु के पत्र के बाद किसने जमा कराए प्रेस क्‍लब में हजारों रुपये?

 

आखिरकार प्रेस क्लब शिमला के हजारों रूपयों के गबन की पुष्टि हो गई। लगातार पांच बार प्रेस क्लब शिमला के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ पत्रकार कृष्णभानु के चेतावनी भरे पत्र के बाद किसी व्यक्ति ने क्लब के प्रबंधक रत्न सिंह के पास ढाई साल तक दबाकर रखी धनराशि जमा करा दी है। प्रेस क्लब के सालाना चुनाव 13 अक्तूबर 2009 को हुए थे। क्लब की उपविधि के मुताबिक सालाना चुनाव 13 अक्तूबर 2010 से पहले हो जाने चाहिए थे, लेकिन अब ढाई साल हो चले हैं और चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। जब चुनाव हुए तो नामांकन पत्रों की खरीद के तौर पर हजारों रूपए की धनराशि क्लब के बहीखातों में ढाई साल बीतने के बाद भी जमा नहीं कराई गई।
 
इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार कृष्णभानु ने क्लब के मौजूदा अध्यक्ष धनंजय शर्मा को 31 मई को लम्बा पत्र लिखा और इस्तीफा देने और तत्काल चुनाव कराने को कहा। इसका असर हुआ और धनंजय शर्मा ने संचालन परिषद की बैठक बुलाकर 27 जून को क्लब का साधारण अधिवेशन बुला दिया। इसी बीच शिमला प्रेस क्लब में गबन के मामले सामने आने लगे। इस पर 5 जून को कृष्णभानु ने एक और पत्र धनंजय शर्मा को लिखा। इस पत्र में धंजनय शर्मा पर गबन के आरोप लगाए और चेतावनी दी गई कि यदि गबन की गई धनराशि के बारे में 15 जून तक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया तो मामला सदर थाना शिमला में दर्ज करा दिया जाएगा। इस पत्र का भी असर हुआ और अचानक किसी ने क्लब में हजारों रुपए जमा करा दिए। यह धनराशि ढाई साल बाद क्लब में जमा कराई गई।
 
31 मई के पत्र में कृष्णभानु ने क्लब में सालों से लगातार बढ़ रही उधारी के खिलाफ भी आवाज़ उठाई थी। कुछ गैर पत्रकारों की हजारों-लाखों रुपयों की उधारी ढाई साल से चल रही थी। क्लब की संचालन परिषद की बैठकों में ऐसे सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग होती रही, लेकिन इस पर अमल नहीं होने दिया गया। आरोप लगा कि उधारखोरों में ज्यादातर क्लब के अध्यक्ष के मित्र हैं, इसीलिए संचालन परिषद के फैसलों की भी अनदेखी की जाती रही। अब मामला उठने के बाद धनंजय शर्मा के साथ-साथ उधारखोरों में भी खलबली मच गई है। फलस्वरूप क्लब में धड़ाधड़ उधारी की वसूली हो रही है।

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