केजरीवाल का आज का धमाका- मुकेश अंबानी की दुकान हैं कांग्रेस और भाजपा

नई दिल्ली। नेता अरविंद केजरीवाल सही रास्ते पर जा रहे हैं और वे सच में किसी तीसरे बड़े दल को खड़ा करने का रास्ता प्रशस्त कर रहे हैं. वह दल वह पार्टी खुद अरविंद केजरीवाल की होगी जिसमें नौजवान होंगे और भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध लोग होंगे. कांग्रेस और भाजपा की साझी दुकानदारी को बार-बार नंगा करके अरविंद केजरीवाल ने नए लोगों को राजनीति में आने और संसद में पहुंचकर नए सिरे से चिंतन मनन करने का रास्ता तेजी से बनाना शुरू कर दिया है. आज अरविंद केजरीवाल ने काफी बड़ा काम किया. उन्होंने कांग्रेस और भाजपा को रिलायंस की चेला पार्टी साबित कर दिया.

सामाजिक कार्यकर्ता से नेता बने आईएसी के सदस्य अरविंद केजरीवाल बुधवार को जब प्रेस के सामने आए तो एक बार फिर चौंकाया और निशाने पर लिया देश के सबसे बड़े बिजनेसमैन मुकेश अंबानी को. केजरीवाल ने अंबानी की कंपनी रिलायंस को मिले केजी बेसिन के ठेके और उसमें हुई कथित गड़बड़ियों का मामला उठाया और सरकार के कंपनी के सामने नतमस्तक होने का आरोप मढ़ा.

संवाददाता सम्मेलन में केजरीवाल और प्रशांत भूषण ने सबसे पहले नीरा राडिया टेप के कुछ हिस्से सुनाए. इसमें राडिया और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद रंजन भट्टाचार्य के बीच बातचीत थी. टेप में रंजन भट्टाचार्य कहते सुने गए कि कांग्रेस तो अपनी दुकान है.


टेप सुनने के लिए यहां क्लिक करें-

रंजन भट्टाचार्य और नीरा राडिया संवाद


इससे बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा कि रिलायंस को एनडीए सरकार ने केजी बेसिन का ठेका दिया था ताकि वह गैस निकालकर देश की जरूरतें पूरी कर सके. ये गैस रिलायंस को साल 2017 तक सवा दो डॉलर प्रति यूनिट बेचनी थी लेकिन 2006 में ही इसके लिए कंपनी ने सवा चार डॉलर प्रति यूनिट मांगे. तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर इसके लिए राजी नहीं थे इसलिए हटा दिए गए और रिलायंस के आदमी माने जाने वाले मुरली देवड़ा को ये मंत्रालय मिला.

इसके बाद वर्ष 2007 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह ने रिलायंस के दबाव के आगे झुकते हुए 2014 तक 4.25 डॉलर प्रति यूनिट के हिसाब से अनुमति दे दी. आज रिलायंस सरकार से इसके लिए सवा 14 डॉलर प्रति यूनिट मांग रही है. रिलायंस की इसी मांग का विरोध करने के चलते पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी को हटाकर वीरप्पा मोइली को मंत्री बनाया गया है.

केजरीवाल ने कहा कि अगर मोइली ने रिलायंस की सवा 14 डॉलर प्रति यूनिट गैस की मांग मान ली तो इस देश में बिजली सात रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिलेगी. देश को करीब 43 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा. अगर जनता को ये मंजूर है तो ठीक है लेकिन अगर नहीं है तो वो इसके खिलाफ खड़ी हो ताकि सरकार मजबूर होकर रिलायंस की मांग ठुकरा दे.

केजरीवाल ने कहा कि केजी बेसिन का ठेका रिलायंस को मिला लेकिन रिलायंस ने जुलाई 2011 में इसका एक हिस्सा ब्रिटिश पेट्रोलियम को 35 हजार करोड़ रुपये में बेच दिया. लेकिन किसी ने सवाल नहीं उठाए और सरकार देखती रही. रिलायंस गैस की जमाखोरी कर रही है ताकि जब सरकार दाम बढ़ा दे तब वो उसे बेचे और फायदा कमाए.

रिलायंस को सरकार को 8 हजार करोड़ यूनिट गैस देनी थी लेकिन उसने दी महज 2 हजार करोड़ यूनिट. रिलायंस ने गैस प्रोडक्शन जानबूझकर घटा दी. उसने 2009 से गैस का उत्पादन तय सीमा से एक तिहाई कर दिया. केजरीवाल ने कहा कि इसकी वजह से गैस आधारित बिजली घरों को बंद करना पड़ा. केजरीवाल ने कहा कि जब जयपाल रेड्डी ने रिलायंस की कारगुजारियों के खिलाफ आवाज उठाई और 7000 करोड़ रुपये के जुर्माने का नोटिस भेजा तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ा. मुकेश अंबानी के दबाव में रेड्डी को मंत्रालय से हटा दिया गया.

 

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