केजरीवाल भी कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं, कुछ और सोचिए किरण जी

एक कहावत सुनी है आपने. बेगानी शादी में, अब्दुल्ला दीवाना. किरण बेदी कुछ उसी तरह का काम कर रही हैं. पहले तो लाख मान-मनौव्वल पर वह -राजनीति नहीं करने- की अपनी जिद पर अड़ी रहीं. शुचिता वाली सोच.
 
लेकिन अब जब आम आदमी पार्टी को आशातीत सफलता मिल गई है तो किरण बेदी परेशान हैं. कैसे अपनी उपयोगिता दिखाएं. सो उन्होंने बीजेपी और -आप- के बीच मध्यस्थता करने का ऐलान कर दिया ताकि दिल्ली की जनता को दोबारा चुनाव में ना जाना पड़ जाए.
 
वाह. किरण जी, वाह. आप तो ऐसी ना थीं. साथ आंदोलन किया था तो -आप- यानी आम आदमी पार्टी को जानती-समझती भी होंगी कि क्यों यह पार्टी चुनाव लड़ के आई?? जब जानती हैं कि -आप- किसी भी राजनीतिक पार्टी से हाथ नहीं मिलाएगी, कल रात से केजरीवाल-योगेंद्र यादव समेत -आप- के तमाम नेता ये बात कह रहे हैं तो फिर ये कैसे सोच लिया कि आप -आप- और बीजेपी के बीच सरकार बनाने के लिए मध्यस्थता करेंगी???
 
दाल में कुछ काला है या पूरी दाल काली है…कहीं ये अरविंद केजरीवाल का गेम बजाने का गेमप्लान तो नहीं.???? राजनीति और जंग में सब जायज है. लेकिन केजरीवाल भी कच्चे खिलाड़ी नहीं. कुछ और सोचिए किरण जी. थोड़ा ठोस और बेहतर. हाजमोला टाइप के विचार पासे की तरह फेंकेंगी तो दांव उल्टा भी पड़ सकता है. जय हो.
 
पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वाल से

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Leave a Reply

Your email address will not be published.