‘केदारनाथ अग्रवाल : गद्य की पगडंडियां’ पुस्‍तक का हुआ लोकार्पण

केदारनाथ अग्रवाल मूलतः कवि हैं किन्‍तु उन्‍होंने गद्य भी खूब रचा है। डॉ. रामविलास शर्मा उनके गद्य के प्रशंसक भी थे। केदार जी के गद्य का अधिकांश पत्र, निबंध, उपन्‍यास, कहानी और कविता संग्रह की भूमिकाओं के रूप में प्रकाशित होकर हमारे सामने आ चुका है। उनके गद्य को लेकर अनेक गंभीर लेख लिखे गए हैं।

केदार जी के गद्य को पढ़ने से उनके अर्न्‍तमन के विभिन्‍न प्रश्‍नों और सृजनात्‍मक बेचैनियों को बखूबी समझा जा सकता है। वे अपने गद्य में व्‍यापक सामाजिक सरोकारों से लैस होकर वस्‍तुनिष्‍ठ दृष्टि के साथ समाज से मुखातिब होते हैं। ‘केदारनाथ अग्रवाल : गद्य की पगडंडियां’ शीर्षक पुस्‍तक, जिसका संपादन संतोष भदौरिया ने किया, का लोकार्पण साहित्‍य और संस्‍कृति की नगरी इलाहाबाद में सम्‍पन्‍न हुआ।

लोकार्पण काशीनाथ सिंह, अशोक वाजपेयी, शम्सुर्ररहमान फ़ारूकी और राजेन्‍द्र कुमार के हाथों सम्पन्‍न हुआ। लोकार्पित पुस्‍तक में नामवर सिंह, शिवकुमार मिश्र, परमानन्‍द श्रीवास्‍तव, विजेन्‍द्र, आनन्‍द प्रकाश, कमला प्रसाद, सोमदत्‍त्‍, कर्मेन्‍दु शिशिर, राजेन्‍द्र कुमार, रविभूषण, कान्ति कुमार जैन, वीरेन्‍द्र यादव, शंभु गुप्‍त, वैभव सिंह, रामशंकर द्विवेदी, विनोद भारद्वाज और राजू मिश्र के आलोचनात्‍मक लेख और साक्षात्‍कार संकलित हैं।

उल्‍लेखनीय है कि ज्‍यादातर लेख शताब्‍दी वर्ष (2011) या उसके बाद लिखे गए हैं। इसके पूर्व (2012) में संतोष भदौरिया के संपादन में एक अन्‍य पुस्‍तक ‘केदारनाथ अग्रवाल : कविता का लोक आलोक’ भी प्रकाशित हो चुकी है, जिसमें केदार जी की कविता से संबन्धित तीस सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण आलोचनात्‍मक लेखों को संकलित किया गया है।

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