केन्द्र ने आल इंडिया रेडियो में यौन शोषण की बात मानी

केन्द्र सरकार ने आल इंडिया रेडियो के एफएम गोल्ड चैनल में काम करने वाली महिला कर्मियों के साथ यौन शोषण की बात स्वीकार की है. सरकार की तरफ से एक रिपोर्ट पेश करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में कहा गया कि इस तरह के कुछ मामले आये हैं जिनमें आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही भी की गयी है.
 
मुख्य न्यायाधीश एनवी रामना एवं न्यायाधीश मनमोहन की खंडपीठ के समक्ष दायर हलफनामे में एआईआर की डाइरेक्टर की तरफ से तरफ इस बात से इंकार किया गया कि एआईआर सेंटर में महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशाखा गाइडलाइन नहीं लागू की गयी है. हलफनामे में कहा गया कि ये सुनिश्चित करना उनका दायित्व है ताकि कार्यस्थल पर यौन शोषण जैसी घटना ना घटे.
 
उनकी तरफ से कहा गया कि उन्हें सेंटर में यौन शोषण की जानकारी मिली थी जिसके बाद तुरन्त एक सात सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया था. इस कमेटी ने महिला कर्मचारियों के उन आरोपों की जांच की जो उन्होंने अपने अधिकारियों के ऊपर लगाये थे. इनमें से एक अधिकारी के ऊपर आरोप सही पाये गये हैं तथा उसे निलम्बित कर दिया गया है जबकि दूसरे अधिकारी पर आरोप के साक्ष्य नहीं पाये गये अतः उसका निलम्बन रद्द कर दिया गया.
 
महिला कर्मचारियों द्वारा यौन शोषण के आरोप लगाये जाने पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा एआईआर रेडियो के द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश की गयी तथा इसकी एक प्रति याचिकाकर्ता को भी दी गयी. याचिकाकर्ता को कोर्ट ने अब इस पर 11 दिसम्बर तक जवाब पेश करने के लिए कहा है. कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता मीरा मिश्रा द्वारा एडवोकेट सुग्रीव मिश्रा के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

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