कैसी पत्रकारिता कर रहे हैं कांतिकारी संदेश एवं भास्‍कर भूमि!

पूरे छत्‍तीसगढ में और संभवत: देश में सबसे ज्‍यादा अखबार निकलने के लिए राजनांदगांव जिला जाना जाता है। इस जिले में पत्रकारिता का क्‍या हाल है, यह किसी से छिपा नहीं है। यहां के कुछ पत्रकारों ने देश में शोहरत हासिल किया है तो कुछ ऐसे भी पत्रकार हैं, जिन्‍हें अवैध उगाही से फुर्सत नहीं। अभी हाल ही में दो नए समाचार पत्र शुरू हुए हैं। एक पुराना अखबार है,, जिसको करीब तीन-चार महीने पहले नए स्‍वरूप में प्रकाशित किया जा रहा है। यानी पहले वह टैबलाइड में अनियमित था और अब बडे़ आकार में दैनिक रंगीन निकाला जा रहा है। नाम है क्रांतिकारी संकेत।

एक और अखबार है जो अप्रैल महीने की 14 तारीख से शुरू हुआ है। नाम है भास्‍कर भूमि। इस अखबार का विमोचन नक्‍सल हमलों में शहीद जवानों के परिजनों ने किया था। अब बात करें अखबारों की सामग्री की। क्रांतिकारी संकेत कई बार संपादकीय की चोरी करता पकड़ा गया है। पर वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया है। वह न्‍यूज एजेंसियों के लेखों को सीधे संपादकीय में डाल देता है और ऊफ तक नहीं करता। एक चोरी की बानगी पेश है।

दोनों अखबारों के वेब एडिशन को देखने से चोरी समझ में आ जाती है। दरअसल, आरएनएस न्‍यूज एजेंसी ने एक लेख जारी किया था। शीर्षक था, बीबी ही सीता की तरह‍ क्‍यों हो….। इस लेख को भास्‍कर भूमि ने अपने अखबार के 12 मई के अंक में अभिव्‍यक्ति कॉलम में लेख पेज में नीचे लगाया तो क्रांतिकारी ने इस लेख को संपादकीय की जगह लगा दिया। ऊपर लिख दिया संपादकीय। खबरों की चोरी तो आम है, पर संपादकीय की चोरी….? अखबार का स्‍तर और इसमें काम करने वाले पत्रकारों का मानसिक स्‍तर इससे पता चलता है। इन दोनों लिंको पर क्लिक करके सच्‍चाई जानी जा सकती है.

http://bhaskarbhumi.com/epaper/index.php?d=2012-05-12&id=6

http://www.krantikarisanket.com/new/e-paper/Finel%2011.05.2012%20PDF.pdf

भास्‍कर भूमि
क्रांतिकारी संदेश

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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