कोर्ट का आदेश- फर्जी इंटरव्यू छापने वाले रिपोर्टर रमन, संपादक भट्टाचार्या, मुद्रक-प्रकाशक दीपक और संजीव को जेल भेजो

: अनन्त कुमार सिंह के झूठे साक्षात्कार के मामले में दोषी पत्रकारों की अपील खारिज : आईएएस अनन्त कुमार सिंह का मनगढ़न्त साक्षात्कार लिखने वाले पत्रकार की सजा बरकरार : श्री पी0एन0 श्रीवास्तव, अपर सत्र न्यायाधीश लखनऊ ने अनन्त कुमार सिंह, तत्कालीन जिलाधिकारी, मुजफ्फरनगर का मनगढ़न्त साक्षात्कार छापने वाले रिपोर्टर रमन किरपाल, सम्पादक ए0के0 भट्टाचार्या, मुद्रक एवं प्रकाशक दीपक मुखर्जी एवं संजीव कंवर के द्वारा अधीनस्थ न्यायालय के कारावास एवं जुर्माने की सजा के विरुद्ध दाखिल अपील अपने निर्णय दिनांक 22.11.2012 के द्वारा निरस्त कर दी है। 

श्री श्रीवास्तव ने अपने निर्णय में कहा है कि अधीनस्थ न्यायालय के समक्ष मानहानि का मुकदमा दाखिल करने वाले अनन्त कुमार सिंह किसी भी संदेह के परे इस तथ्य को साबित करने में सफल रहे हैं कि अभियुक्त रमन किरपाल ने जो मनगढ़न्त साक्षात्कार लिखा, ए0के0 भट्टाचार्या ने जिसे सम्पादित किया तथा दीपक मुखर्जी एवं संजीव कंवर ने जिसे मुद्रित एवं प्रकाशित किया, वह मानहानिकारक था।  इसे पढ़ने से आमलोगों की नजर में अनन्त कुमार सिंह की ख्याति की अपहानि हुई। यह साक्षात्कार दिल्ली एवं लखनऊ से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक ‘दि पॉयनीयर’ एवं हिन्दी दैनिक ‘स्वतंत्र भारत’ समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ था।  न्यायालय ने यह भी पाया है कि अभियुक्तगण यह प्रमाणित करने में पूर्णतया विफल रहे हैं कि उन्होंने अनन्त कुमार सिंह का कोई साक्षात्कार लिया था। अपीलार्थी अभियुक्तों ने पहला अपराध होने के आधार पर प्रोबेशन का लाभ देने का अनुरोध अपीली न्यायालय से किया था, जिसे न्यायालय ने आरोप की गम्भीरता को देखते हुए अस्वीकार कर दिया।

याद दिला दें कि वर्ष 1994 में श्री अनन्त कुमार सिंह का एक साक्षात्कार अंगेजी दैनिक ‘दि पॉयनीयर’ के दिल्ली एवं लखनऊ तथा हिन्दी दैनिक ‘स्वतंत्र भारत’ के लखनऊ संस्करणों में फोटो के साथ ‘‘निर्जन स्थान में कोई भी महिला के साथ बलात्कार करेगा-डी0मए0 मुजफ्फरनगर’’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ था।  उसी दिन अनन्त कुमार सिंह ने इस साक्षात्कार को झूठा एवं मनगढ़न्त बताते हुए अपना खण्डन इन समाचारपत्रों के सम्पादकों को भेज दिया था।  लेकिन इन लोगों ने यह खण्डन एक सप्ताह तक प्रकाशित नहीं किया और जब किया भी तो काट-छांटकर ‘चिट्ठी-पत्री’ कॉलम में रिपोर्टर के झूठे दावे के साथ जिससे लोगों को यह लगे कि वास्तव में साक्षात्कार हुआ है। इस मनगढ़न्त साक्षात्कार को पढ़कर प्रमुख राजनीतिज्ञों, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं बुद्धिजीवियों एवं अन्य प्रबुद्धजनों के द्वारा अखबारों, पत्रिकाओं एवं खुले मंचों से श्री ंिसंह की निन्दा की गई।  अपीलार्थियों के इस आपराधिक कृत्य से क्षुब्ध अनन्त कुमार सिंह ने इनके विरुद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट््रेट लखनऊ के न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया।  दोनों पक्षों को सुनने के बाद वर्ष 2007 में श्री सतीश चन्द्रा, विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट््रेट (कस्टम्स) ने रिपोर्टर रमन किरपाल को एक वर्ष की सजा एवं 5 हजार रुपए जुर्माना किया, जबकि सम्पादक घनश्याम पंकज एवं ए0के0 भट्टाचार्या तथा मुद्रक एवं प्रकाशक दीपक मुखर्जी एवं संजीव कंवर को 6-6 माह की कारावास तथा 2-2 हजार रुपए का जुर्माना किया।

मैजिस्ट्रेट के उक्त आदेश के विरुद्ध सभी 5 अभियुक्तों ने अपर जिला जज के न्यायालय में अपील की।  अपील की सुनवाई के दौरान अभियुक्त घनश्याम पंकज की मृत्यु हो चुकी है।  श्री पी0एन0 श्रीवास्तव, अपर जिला जज ने सुनवाई के उपरान्त शेष चार  अपीलार्थियों की अपील खारिज कर जमानत निरस्त करते हुए उन्हें निर्देश दिया है कि वे तत्काल दण्डादेश भुगतने के लिए मजिस्ट्रेट न्यायालय में आत्मसमर्पण करें।  उन्होंने मजिस्ट्रेट को भी यह निर्देश दिया कि यदि अपीलार्थीगण तत्काल आत्मसमर्पण न करें तो वारण्ट द्वारा उपस्थिति सुनिश्चित कराकर उन्हें दण्ड भुगतने के लिए कारागार भेजें। ध्यान रहे कि अनन्त कुमार सिंह की शिकायत पर प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया वर्ष 1996 में इस मनगढ़न्त एवं मानहानिकारक साक्षात्कार को प्रकाशित करने के लिए तीनों समाचारपत्रों की निन्दा कर चुका है।

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