क्या इसीलिए इतनी पढ़ाई करके आईपीएस बना था?

Mukesh Kumar 'Gajendra' : ‎''यार, यहां बहुत बेगार करवाते हैं। कोई सेल्फ रिस्पेक्ट ही नहीं है। इलेक्शन के खर्चों का टारगेट अभी से दे दिया है। क्या इसलिए इतनी पढ़ाई करके आईपीएस बना था? ये लोग वर्दी वालों से ही उगाही करवा रहे हैं। अब नौकरी छोड़ दूंगा।'' खुदकुशी से ठीक पहले बिलासपुर (छत्‍तीसगढ़) के एसपी राहुल शर्मा ने अपना यह दुख अपने दोस्त के साथ साझा किया था। अधिकांश मां-बाप अपने बेटे-बेटी को आईपीएस या आईएएस बनाना चाहते हैं। तैयारी में उनकी आधी उम्र निकल जाती है। सलेक्शन के बाद पोस्टिंग के लिए जुगाड़ लगाना पड़ता है। उसके बाद यदि ऐसा हश्र हो तो दिल फटने लगता है। सपने टूट जाते हैं। दुनिया से मोह खत्म हो जाता है। और उसकी परिणति कुछ ऐसी ही होती है।

    Owes Zia : shame for our system, its nice i was not selected for Civil Srevices then.
    
    Anil Kumar Singh : kas sabhi naukri karne wale ekk ho jate……………………
     
    Mukesh Kumar 'Gajendra' : ‎Anil Kumar Singh अनिल जी…कहा गया है कि एकता में शक्ति होती है। पर एक होने के लिए आपसी स्वार्थ को परे रखना होता है। हमारे आपके बीच के ही कुछ लोग अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए राजनेताओं के चंगुल में फंस जाते हैं। उनकी चाकरी करते हैं। ऐसे में आत्मसम्मान की बात कैसे की जा सकती है।
     
    Anuradha Gupta : वैसे खुदखुशी किसी भी समस्‍या का हल नहीं है. हां इस बात से मैं सहमत हूं की सिस्‍टम को बदलने वालों का हश्र 'आईपीएस अफसर नरेन्द्र कुमार' जैसा होता है. मेरा मानना है कि सिस्‍टम को बदलने के लिए हमें दिल से कम दिमाग से ज्‍यादा सोचना चाहिए. हम भावनाओं में जल्‍दी बह जाते हैं और गलत कदम उठा लेते हैं. हम स्‍ट्राटजीस भी बनाते हैं लेकिन उनपर अमल नहीं कर पाते. आईपीएस होना गर्व की बात है और उससे भी ज्‍यादा गर्व की बात हाती है जब उस शिक्षा का सही इस्‍तेमाल किया जाए. लोग हार जल्‍दी मान लेते हैं. यह बेहद दुख की बात है
     
    Mukesh Kumar 'Gajendra' : ‎Anuradha Gupta अनुराधा जी…राहुल शर्मा की लाइनों को बार-बार पढ़िए…उस दर्द और बेबसी को महसूस कीजिए…मेरे कई मित्र है इस व्यवस्था के हिस्सा हैं। उनसे लगातार इस बारे में बातचीत होती रहती है। जो गंदे खेल का हिस्सा बन गया वो तो सुखी है (सिर्फ तबतक जब तक उनके आका सुखी हैं, जैसे की माया के राज में उनके अधिकारी, अखिलेश के राज में उनके) जो नहीं बन पाए वो आज भी लड़ रहे हैं।
     
    Anil Kumar Singh : mukesh ji phir bhi ek samya ke bad kuch na kuch kadam uthana padega……………………………ya phir unki dassta swikar karni padegi
     
    Mukesh Kumar 'Gajendra' : क्यों स्वीकार करनी पड़ेगी अनिल जी…हमारे बीच अमिताभ ठाकुर जी Amitabh Lucknow जैसे अधिकारी हैं। उन्हें देखिए…उनके संघर्ष को देखिए। उससे हिम्मत मिलती है। लगता है कि इस भ्रष्टतम समय में भी कोई सच्चाई और इमानदारी को जिन्दा रखे हुए है।
     
    Anuradha Gupta : मुकेश जी बात खुश रहने और दुखी रहने की नहीं है. बात है सही वक्‍त पर दिमाग के इस्‍तेमाल की. जो अच्‍छा सोच सकता है वो अच्‍छा कर भी सकता है. आईपीएस ऑफिसर सब नहीं बनते और जो बनते हैं उन्‍हें यूं खुदखुशी करने का हक नहीं होता. सिस्‍टम को सुधारा जा सकता है लेकिन उसके लिए स्‍ट्रैटेजीस होनी चाहिए (मेरे पापा कहते हैं कि आपकी सेल्‍फ रिस्‍पेक्‍ट को तब तक कोई हर्ट नहीं कर सकता जब तक आप उसको इस बात की इजाजत न दो. यह सब कुछ आपकी सोच पर निर्भर करता है. ) मैं फिर वही कहूंगी खुदखुशी किसी भी समस्‍या का हल नहीं है.
     
    Avinash Kumar : This is generally the feeling of many IAS / IPS officers but at very few times, not always..We only let these politicians to do what ever there they want and many times thru our own colleagues. I think all the states must be facing vidhan sabha these days and so many questions where officers are termed as defaulter. Misuse of official vehicles, corruption, disrespect to politicians…these r generally allegations…which we really can fight by our own action…and then see what strength we do wield….
     
    Avinash Kumar : Maro nahin…maaro….constitutional way se…..
     
    Mukesh Kumar 'Gajendra' : ‎Avinash Kumar इनसे लड़ने के लिए एक संगठित संगठन बनाना होगा अविनाश जी…
     
    Megha Sinha : i wanted to share but cudn't ,these are additional pressures on gvt. employees, and that too not in any good faith, …a suffering for those who come here after so much!
     
    Mukesh Kumar 'Gajendra' : ‎Megha Sinha मेघा जी इसी बात का तो दुख है कि इतने त्याग के बाद भी यह सब करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह सिर्फ एक राहुल की कहानी नहीं है।
     
    Arun Saroha : ye sahi baat hai..mere pita khud police me hain aur main janta hun .na sirf janta hun balki mehsoos bhi karta hun…
     
    Arun Saroha : is i.p.s ko meri bhavbheeni shraddhanjali
     
    Arun Saroha : ji mam
     
    Megha Sinha : ‎''mere pita khud police me hain aur main janta hun .na sirf janta hun balki mehsoos bhi karta hun…'' maine bhi isliye hi ye baat kahi per zaruri nahi hai ki jo baat aaj generally accepted hai hum unhe kal bhi ''generally accept hi kar le after al the change is our responsibility and no alien will come to make it on our behalf
 
    Jitendra Sharma : Horreable..
 
    Arun Saroha : ji mam
   
    Vatan India : sir poorae system mein sadanh aa gayae hae
    
    Ajay Tiwari : Yah bdambana hai jinitik dabav mai kaam karana parata hai ,jo katayee uchit nahi hai.
     
    Mahesh Vir : very said
     
    Mahesh Vir : in netao ko doda doda kar goli se mar dena chahiye. ese sasan se to rajtantra hi achha tha.
     
    Lovekesh Gupta : comment bhar se kuch ni hoga taiyari me jut jaie khud ko ready rakhiye ane wale samay me jarurat par skti hai…

मुकेश कुमार गजेंद्र के फेसबुक वॉल से साभार

 

 
 

 

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