क्या इस फ्रॉड के लिए दैनिक जागरण के मालिक और सूचना विभाग के अफसर जेल भेजे जाएंगे?

: दैनिक जागरण के अपंजीकृत हल्द्वानी संस्करण पर मेहरबान शासन और प्रशासन, दैनिक जागरण के मालिकों ने गलत जानकारी के आधार पर लाखों रुपये का विज्ञापन लेकर सरकार को लगाया चूना : रुद्रपुर। बड़े लोगों के सामने शासन और प्रशासन हमेशा से झुकता आया है। उनको लाभ पहुंचाने के लिए सरकारें और प्रशासन के लोग नियमों, कायदे-कानूनों का परवाह नहीं करते। उत्तराखण्ड का शासन और प्रशासन भी इसी ढर्रे पर काम कर रहा है। यह नियमों को धता बता कर पिछले करीब 9 सालों से दैनिक जागरण के अपंजीकृत हल्द्वानी संस्करण पर मेहरबान है। शासन और प्रशासन नियमों की अनदेखी कर इसे लाखों के विज्ञापन दे चुका है और दे रहा है। यही नहीं, उत्तराखंड सरकार का सूचना एवं लोक संपर्क विभाग दैनिक जागरण के पंजीकृत होने की झूठी सूचना देकर सबको भ्रमित कर रहा है और एक तरह से धोखाधड़ी कर रहा है। इस लेखक ने खुद जब आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो मुझ आवेदक को जागरण के हल्द्वानी संस्करण के पंजीकृत होने की झूठी सूचना दी गई।

इस (2012) साल जुलाई के अंतिम सप्ताह तक दैनिक जागरण हल्द्वानी में प्रिंटलाइन में देहरादून से प्रकाशित होने और हल्द्वानी में मुद्रित होने की जानकारी छप रही थी। बिहार में कई जगहों से अपंजीकृत संस्करणों की खबर मीडिया में आने के बाद हल्द्वानी के अपंजीकृत संस्करण को पंजीकृत कराने की सुधि दैनिक जागरण प्रबंधन को आई होगी, इसलिए 27 जुलाई 2012 से प्रिंटलाइन लाइन बदलकर छापी जाने लगी और पहले से छप रही देहरादून संस्करण की पंजीयन संख्या की जगह एक नई पंजीयन संख्या छापी जाने लगी।

उत्तराखण्ड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के नियमानुसार केवल पंजीकृत समाचार पत्र / पत्रिकाओं को ही विभागीय विज्ञापन दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन इस नियम के विपरीत विभाग ने लाखों रुपये के विज्ञापन दैनिक जागरण हल्द्वानी को निर्गत किए। इसके अलावा कुमाऊं मंडल के छह जिलों के विभिन्न सरकारी विभागों के लाखों रुपये के विज्ञापन इस संस्करण में छापे गये। हल्द्वानी संस्करण की वर्षगांठ पर भी हर साल विभिन्न सरकारी विभागों से लाखों रुपये के विज्ञापन दैनिक जागरण हल्द्वानी संस्करण प्रबंधन लेता है। इस संबंध में जब सूचना एवं लोक संपर्क विभाग से सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत यह जानकारी देते हुए कि दैनिक जागरण हल्द्वानी संस्करण पंजीकृत नहीं है, पूछा गया कि ऐसे में उसके खिलाफ क्या कार्यवाही की जाएगी, तो दिनांक 03 सितंबर 2012 को विभाग के लोक सूचना अधिकारी/संयुक्त निदेशक श्री राजेश कुमार ने आवेदक को बताया कि उक्त संस्करण पंजीकृत है, और पंजीयन संख्या 08916 है। यह झूठी सूचना इसलिए है क्योंकि यह पंजीयन संख्या हल्द्वानी की नहीं बल्कि देहरादून संस्करण की है। स्वयं अखबार अपने आपको 27 जुलाई 2012 से वर्ष 1 अंक के साथ अपंजीकृत प्रदर्शित कर रहा है और भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक का कार्यालय, नई दिल्ली के लोक सूचना अधिकारी/सहायक प्रेस पंजीयक श्री शिवदास सरकार ने मिसिल संख्या 612/412/2012-13/आर.एन.आई/एन.पी.सी.एस. दिनांक 04.09.2012 के द्वारा दैनिक जागरण के हल्द्वानी संस्करण को अपंजीकृत बताया गया है।

यह मामला आंख मूंदकर दैनिक जागरण हल्द्वानी को आर्थिक मदद करने का है। इसमें नियमों की अनदेखी कर सरकारी खजाने को लाखों रुपये का चूना लगाया गया है। यह उत्तराखण्ड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग के अफसरों की अंधेरगर्दी और दैनिक जागरण के फ्राड का एक नमूना है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इस बड़े आर्थिक अपराध, धोखाधड़ी, चार सौ बीसी और गलत जानकारी देने के लिए दैनिक जागरण के मालिकों और सरकारी विभाग के अफसरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी? क्या इन्हें जेल भेजा जाएगा? शायद इनके खिलाफ कुछ नहीं होगा क्योंकि ये आर्थिक रूप से बड़े और सत्ता से जुड़ने के कारण प्रभावशाली लोग हैं। नियम-कानून तो सिर्फ आम आदमी और आम पत्रकारों के लिए होते हैं जिन्हें सच्ची बात कहने के कारण फर्जी मामलों में फंसाकर जेल भेज दिया जाता है। पर जो लोग वाकई फ्राड, धोखाधड़ी और चार सौ बीसी करते हैं, उनका कुछ नहीं बिगड़ता, शासन प्रशासन उनके कदमों में झुका रहता है।

-प्रेषक-

अयोध्या प्रसाद ‘भारती’

((रुद्रपुर जनपद ऊधम सिंह नगर, उत्तराखण्ड, मो.- 09897791822))


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