क्या देश के सबसे बड़े हिंदी अखबार की ये हेडिंग सही और जायज है?

Zafar Irshad : क्या देश के सबसे बड़े हिंदी अखबार की ये हेडिंग सही और जाएज़ है.. दिल पर हाथ रखकर इमानदारी से निष्पक्ष जवाब दीजियेगा…पत्रकार बताये क्या यह हेडिंग भावनाओं को नहीं भड़काती है वरिष्ठ पत्रकार Qamar Waheed Naqvi, Pramod Joshi, Shashank Shekhar Tripathi, Dayanand Pandey से मुझे कमेंट की अपेक्षा है… क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी ज़िन्दगी पत्रकारिता में गुजारी है, बाकी दोस्त भी अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं… स्वागत है उनका….

Vinay Singh it is a great loss to humanity whether it is muslim, Christian or an indian.
 
Pramod Joshi खबर में यह पक्ष था भी तो उसे शीर्षक बनाने की जरूरत नहीं थी। यह भावना भड़काने वाला शीर्षक है।
 
Zafar Irshad U R RIGHT Pramod Joshi SIR…YEH KAAM DESH KE SABSE BADE PAPER NE KIYA HAI FRONT PAGE PAR SECOND HEADLINE ME
 
Azhar Ali its wrong
 
Pramod Joshi अखबारों में सम्पादक को गेटकीपर कहा जाता है। लिखने को तमाम बातें होती है। उनके असर के बारे में भी सोचना चाहिए। पर धीरे-धीरे सारे गेट खुल गए हैं।
 
Arshana Azmat aur news editor ko conductor… jaise bus me jate hi conductor ticket mangta hai waise hi ofice aate hi news editor story … just on a lighter note …
 
Rajesh Dhanani जब जेहादी नेता कि यह खबर छपती है कि मुस्लीम बहूल छेत्रो मे जिहाद के नाम पर गेर मुस्लिमो का खून बहाना इस्लाम विरूद्ध है तो भी ऐसे कृत्य हों रहे है,,फिर ऐसे शीर्षक बनेगे ही,,,,यह दर्शाता है इस्लामिक कट्टरपंथ बेकाबू हों चुका है …
 
Shashwat Srivastava Aakhir har jagah musalman hi itna baichain kyu hain??? Palestine,kashmir, somalia, libya, egypt, syria, Kenya, Pakistan, Arghanistan… Tibet b to kabze me hai wahan kyu nhi 'freedom struggle' chal rha…Ye sawal 'Ramdev k jhole me kya hai?' se zyada imp hai …. Nhi???
 
Saroj Sharma तो इसमें हैरानी की क्या बात है? जो धर्म सिखाएगा, धार्मिक लोग वही तो करेंगे?
 
Danish Rizvi Shamefull … But not Surprising … This is not the same journalism I was passionate about … Its painted yellow all over …. But now im also a small part of this system …..
 
Yashlok Singh JAB YE LIKHA JATA HAI KI DALITO KE SAATH YE HUA O HUA. ALPSANKHYAKON KE SAATH ESSA HO GAYA TAB KOI NHI DEKHTA. ES PAR BHI DHYAN DENA CHAHIE.
 
Rishabh Mani Sad truth…..now its all about marketing,u have to sell the news…news channels r also doing d same on this news…but if media will not report the truth it will also harm to humanity..we can treat cancer in early stage otherwise it will become fatal..
 
Arvind Kumar पूरी तरह भड़काऊ हैडिंग है. किसी संघी पत्रकार ने लिखा होगा.
 
Shahid Akhtar Mujhe lagta hai k agar is charcha men shamil kayee log akhbar men huye to aise headlines common ho jayenge…
 
Zafar Irshad Sanjay Sharma–शंभूनाथ शुक्ल ji–Hemant Tiwari ji—Sanjeev Mishra—Samir Abbas..Ashutosh ji…Siddharth Kalhans ji…aap jaise senior journalist se bhi is par pratikriya chahunga ki yeh heading galat hai ya sahi…aur jo senior journalist meri list me hai unke vichro ka bhi swagat hai….
 
Aslam Ansari Ye heading kewal hindu – muslim ekta ko todane ka ek chhota sa namuna hai, mujhe sharm aati hai aise ghatiya aur short mentiliy ke logo par jo bharat ki ekta ko jaati ke taraaju par tolate hai … Agr sachhe indian hai to plz aise heading na chhape.
 
Siddharth Kalhans शर्मनाक है ये। एसी पत्रकारिता करने वालों पर आजीवन बैन लगना चाहिए। हैरत की बात है कि मैने जब आपकी पोस्ट पर नजर डाली तो देखा रायटर ने खबर में भी यही लिखा। रायटर से ये उम्मीद नहीं थी
 
Zafar Irshad Rayter ke kisi indian Nagpuri patrakar ne likhi hogi Siddharth Kalhans bhai…
 
Siddharth Kalhans जरूर ये तत्व हर जगह मिल जाएंगे
 
Asif Husain जिस तरह तालिबान के सपोर्टर पाकिस्तान में आर्मी -सहाफत-प्रशासन -अदालतों और सियासत में हैं क्यूंकि वो शरियत लागू करने क प्रयास की लिए उसकी प्रशंसा करते हैं
उसी तरह यहाँ भी संघ के सपोर्टर पाकिस्तान में आर्मी -सहाफत-प्रशासन -अदालतों और सियासत में हैं जो हिन्दू राष्ट्र के संघ के प्रयास का समर्थन करते हैं
 
Zafar Irshad Yashwant Singh ji…kya aapki nazar is heading par nahi padi jo aapne Bhadas4media me iski aisi ki taisi nahi ki….
 
Dharmendra Pant भाई मुझे कोई ऐसा अखबार बता दो जो वास्तव धर्मनिरपेक्ष हो, जो वास्तव में गैर राजनीतिक हो। हम विकास की पत्रकारिता की बात करते हैं लेकिन कहां है ऐसी पत्रकारिता। यह तो विनाश की पत्रकारिता हो रही है।
 
Mohan Narvaria Adarniya.. Maine yahi khabar kai jagah padhi..aur is ghatna ke ek mahavpurna content k roop me sabhi ne is baat ka ullekh kiya hai.. terrorist ne campus ne aate hi Muslims ko bahar jabe ko Kaha.. shayad hi kisi agency ne is baat ja jikra na kiya ho.. Ise sirf news ke roop me le to thik hai..Vaise heading dene se bacha ja sakta tha..
 
Mukul Shrivastava  Zafar Irshad bhai,,, sahi to hai khabar,,, hamare yahan ye kabhi naa ho, is par khul ke imaandaari se bahas honi chaahiye,,,,,

इस्लामिक आतंकवाद से परेशान है पूरा विश्व

नैरोबी. केन्या की राजधानी नैरोबी के एक शॉपिंग मॉल में शनिवार को हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों की तादाद 39 हो गई। हमले में 100 से ज्यादा घायल भी हुए हैं जिनका इलाज चल रहा है। चश्मदीदों के मुताबिक दस से ज्यादा आतंकियों ने मॉल में घुसते ही कहा, 'मुसलमान एक तरफ हो जाओ, हम सिर्फ गैर मुसलमानों को मारने आए हैं।' उसके बाद उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग की। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उसने हमलावरों के पास एके 47 तथा कई हथगोले देखे। हमलावरों ने कई लोगों को बंधक बना लिया जिन्हें छुड़वाने की कोशिशें देर तक जारी थीं। (दैनिक भास्कर)
 
Mukul Shrivastava Zafar Irshad bhai, hamare yahan bhi puri koshish ho rahi hai is tarah ke events ki,,,,
 
Imtiyaz Hasan @Mukul Shrivastava: Kaun Koshish Kar Raha Hai Mukul ji?Jai Hind!
 
Mukul Shrivastava Imtiyaz Hasan bhai,,,sab kuchh sab ke saamne hai,,,
 
Sanjay Sharma शर्मनाक ..जो दिमाग में होगा बही हैडिंग में भी झलक गया ..
 
Sanjay Sharma @Dharmendra Pant .भाई आप इसे मेरा घमंड मत समझिएगा ..दस साल की मेरे अखबार वीकएंड टाइम्स की उम्र है ..अगर एक भी खबर आप ऐसी दिखा दे जो धर्मनिरपेक्ष ना हो तो उसी दिन अखबार बंद कर दूंगा ..
 
Dayanand Pandey jab sampadak dala aur duferl log ho jayenge aur desk par sakshar aur jahil log honge to yah hona koyi aschrya nahin hai dear zafarr ! bat to is se bhi aage chali gayi hai.
 
Mukul Shrivastava धर्मनिरपेक्षता या सेक्युलरिज्म एलेक्शन के लिए मुस्लिम वोट लेने के लिए प्रयोग किया जाने वाला एक शब्द है,,,, सरकार बनाने के बाद इस शब्द की अहमियत ख़त्म हो जाती है,,, इस से प्राप्त वोटों की ताकत से बनाई हुई सरकार के लिए ये लायसेंस है लूट और घोटाले करने के लिए !
 
रजनीश के झा शर्मनाक
 
Mukul Shrivastava आज़ादी के 66 साल बाद भी, छोटे छोटे 8-10 साल के मुस्लिम बच्चे स्कूल ना जा कर सायकिल का पंचर बनाने या मजदूरी करने का काम कर रहे हैं,,,,18 साल के हो जाने के बाद ये महत्वपूर्ण वोटर बन जाते हैं,,, ये ही सेक्युलरिज्म है !
 
Vimalyogi Tiwari ye bhadkaoo headline hai….per ek baat poochna chata hu….kya karan hai ki viswa ke 99 percent aisi wardato mai muslims he kyo involve hote hai??….Pakistan, Naobi latest killings

Hem Raj Singh par yeh news sahi hai zafar sahib…somalian militant group al shabab ne Aisha kiya hai….agar dil pe haath rakh liya..aanken do band nahi kar sakte….sach ka katl to nahi kar sakte….. sahi aankhein band kar lete hai…sach ko jhutla dete hai…. ek masoom ka katl puri insaniyat ka katl hai…Islam yahi sikhata hai…iska matlab insaniyat to bach nahi
 
Rajesh Dhanani जब जेहादी नेता कि यह खबर छपती है कि मुस्लीम बहूल छेत्रो मे जिहाद के नाम पर गेर मुस्लिमो का खून बहाना इस्लाम विरूद्ध है तो भी ऐसे कृत्य हों रहे है,,फिर ऐसे शीर्षक बनेगे ही,,,,यह दर्शाता है इस्लामिक कट्टरपंथ बेकाबू हों चुका है …
 
Rajesh Dhanani पाकिस्तानी चर्च में आतंकी हमला: फायरिंग के बाद आतंकी ने ब्‍लास्‍ट में खुद को उड़ाया

Qamar Waheed Naqvi आतंकवादियों का पहला उद्देश्य होता है कि वह समाज में धर्म, सम्प्रदाय आदि के आधार पर घृणा फैला कर उन्हें एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करे, उन्हें एक-दूसरे का दुश्मन बनाये. और जब कोई अख़बार या मीडिया भी ऐसा करने लगता है तो वह परोक्ष रूप से उन्हीं आतंकवादियों की मदद कर रहा होता है, उनके ही उद्देश्यों को पूरा कर रहा होता है. मीडिया का काम है आतंकवादी मंसूबों पर पानी फेरना, उनके विरुद्ध जनता को सचेत करना, ऐसा माहौल बनाना ताकि आतंकवाद को पनपने का मौक़ा न मिले, समाज आतंकवादियों के झाँसे में आ कर न बँटे और लड़े. लेकिन इस तरह की पत्रकारिता निश्चय ही वैमनस्य बढ़ाने वाली और आतंकवादियों के मंसूबों को पूरा करनेवाली पत्रकारिता है. जिन दिनों पंजाब आतंकवाद से जूझ रहा था, तब ऐसे ही कई अख़बार शीर्षक लगाया करते थे : 'सिख आतंकवाद का क़हर, बस से चुन-चुन कर हिन्दू यात्रियों को उतारा और गोलियों से भूना.'

आप सबको पता है कि आतंकवादियों को जानबूझकर 'सिख' चिह्नित करने और मारे गये लोगों को बार-बार 'हिन्दू' बताने से सिखों व हिन्दुओं के बीच कैसी नफ़रत फैली और 1984 में इन्दिरा गाँधी की हत्या के बाद इस नफरत की परिणति किस रूप में हुई. उन दिनों यही विश्व हिन्दू परिषद और संघ परिवार पंजाब में 'हिन्दू हित रक्षा' में ज़बर्दस्त ढंग से जुटे हुए थे और सिख उनके सबसे बड़े दुश्मन थे. यह ज़्यादा दिन पुरानी बात नहीं है, हालाँकि उसी पंजाब में बीजेपी अब अकाली दल के साथ सत्ता-सुख भोग रही है.

पीटीआई, कानपुर से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार जफर इरशाद के फेसबुक वॉल से.

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