क्या पोर्न से प्रसिद्धि पाना चाह रहा है बीबीसी?

ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग कार्पोरेशन यानी बीबीसी की हिंदी वेब सेवा “बीबीसी हिंदी डाट काम” को शायद अब अपने न्यूज़ कंटेंट या काफी समय समय से भारत में बनी हुई एक समृद्ध समाचार सेवा की पहचान रास नहीं आ रही है. इस बात से बीबीसी का संपादक मंडल भले ही सहमत ना हो लेकिन वेबसाइट को पढ़कर इस बात को साफ़ समझा जा सकता है.

इसी के साथ ही बीबीसी हिंदी वेब पोर्टल को पढ़ते हुए यह भी बात साफ़ सामने आ जाती है कि इसका स्तर आज कहाँ तक नीचे आ चुका है. इस समाचार सेवा की ख़बरों से लोग मीलों दूर गाँव में रहते हुए जो भरोसा और विश्वास पाते थे. क्या वही भरोसा और विश्वास आज एक क्लिक की दूरी पर मौजूद बीबीसी से हो पाता है?

कभी जिस बीबीसी से सामान्य श्रोता और पाठक देश विदेश की ख़बरों के साथ अपने आस पड़ोस के समाचार व जानकारी लेकर विश्वास करता था. अब उसी पाठक या उसकी पीढ़ी “अखरोट खाने से बढ़ते हैं शुक्राणु” या “कैसी होती हैं जानवरों की सेक्स लाइव” व “घरेलू कामकाज से है सेक्स का रिश्ता” जैसी जानकारी से भरी खबरें पाकर कितने निहाल होते होंगे. कंटेंट के स्तर पर यहाँ इतने भौंड़े प्रयोग किये जा रहे हैं कि उनसे यह समझना मुश्किल हो रहा है कि यह वही बीबीसी है या कोई सनसनी बेचने वाला अचानक उभरा न्यूज़ पोर्टल.

वेब पोर्टल की दुनिया में हिट्स एक सच्चाई हैं. जिसके आधार पर वेबसाईट का मशहूर होना तय होता है. इसी हिट्स के आधार पर विज्ञापन तय होते हैं जिससे पोर्टल की आर्थिक क्षमता तय होती है. इसी कारणवश हिंदी माध्यम में चल रहे अधिकतर बड़े समाचार समूहों की वेबसाईट पोर्न के प्रति बड़ा लचीला रुख अपनाती हैं. क्योंकि वेब की दुनिया में सेक्स या पोर्न सर्वाधिक हिट्स मुहैया कराने के हथियार माने जाते हैं. और वेब ही नहीं हर माध्यम में सेक्स एक बहुत ही बिकने वाला तत्व माना जाता है. बाजार के इसी मुनाफे के आधार पर चलने वाले मीडिया हाउस अगर इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं तो उन्हें एक बार भुलाया भी जा सकता हैं. लेकिन जब जनता के पैसे से चलने वाली कोई संस्था ऐसा करती है तो सवाल काफी बड़ा हो जाता है.

बीबीसी का संचालन एक ट्रस्ट के माध्यम से होता है. जिसको ब्रिटिश सरकार से पैसे मिलते हैं जो जनता का पैसा होता है. इसीलिए बीबीसी की जवाबदेही ब्रिटिश सरकार और जनता के प्रति होती है. बीबीसी की अन्य सभी सेवाओं की तरह ही बीबीसी हिंदी को भी कहीं से कोई विज्ञापन नहीं लेना होता है. जिसके लिए उसे अपने हिट्स बढ़ाने के लिए सेक्स और नग्नता को परोसने का दबाव होता हो. सरकार से मिल रहे पैसे और बहुत कम हस्तक्षेप के कारण ही बीबीसी की निर्बाध स्वतंत्रता भी मिलती है. जिसके कारण उसने पत्रकारिता के प्रतिमान गढ़े हैं.

अभी हाल ही में पटना आर्ट्स कालेज के विद्यार्थी द्वारा बनाई पेंटिंग को लेकर हुई बीबीसी की खबर से विवाद उठ ही चुका है. वहाँ के एक छात्र ने अपनी महिला शिक्षिका को एक असाइनमेंट के नाम पर कामसूत्र के कुछ कृतियों का फोटो दे दिया. जिसके बाद इस छात्र के ऊपर अनुशासनात्मक कार्यवाही भी की गई. बीबीसी की इस खबर में कामसूत्र की उसी संभोगरत मुद्रा वाली तीन फोटो लगा दी जाती है. अब इन्टरनेट की दुनिया जहाँ पोर्न को लेकर बड़ा तीव्र आकर्षण रहता है वहाँ इस खबर और खबर से भी ज्यादा फोटो पर लोग आकर्षित होंगे ही. इस तरह की फोटो को खबर के साथ लगाकर बीबीसी कौन सी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की क्रांति कर रही है. इस फोटो के बारे में जब लगातार विरोध बढ़ा तब जाकर बीबीसी प्रशासन जागा और उसने फोटो को हटाया और कुछ फोटो को कट करके सही किया.

इस तरह के कई सारे आत्मुग्धता और सेक्स से भरे हुए कई सारे प्रयोग अब इस वेबसाइट की पहचान बनते जा रहे हैं. पिछले कुछ महीनों से लगातार बीबीसी को पढ़ने पर यह साफ़ झलक जाता है कि यहाँ भी मशहूर होने के लिए रिपोर्टिंग और विश्लेषण की जगह केवल आसान तरीकों से ही अपना नाम बनाये रखने की दौड हैं. जिसमें अब पोर्न इनके लिए आसान है. तो सवाल यही बनता है कि क्या पोर्न से प्रसिद्धि पाना चाह रहा है बीबीसी.

बीबीसी में सेक्स  संबंधी कुछ ख़बरों के वेब लिंक्स—

http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/03/130306_life_without_sex_aa.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130223_wilder_sex_rd.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130208_china_media_rape_aa.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130207_international_others_china_boyfriend_sm.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130206_sex_football_nigeria_vr.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130131_international_us_sex_housework_ss.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/01/130129_penicillin_sex_revolution_pk.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/01/130115_sex_risk_sdp.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/12/121205_women_faithfulness_pk.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/12/121204_europe_prostitution_sdp.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/11/121115_grasshoppers_love_tune_pn.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2012/11/121116_sex_beast_gallery_va.shtml
http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130223_wilder_sex_rd.shtml

लेखक हरिशंकर शाही युवा पत्रकार हैं. सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक टिप्पणियां करते रहते हैं.

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