क्या वाकई राज एक्सप्रेस में ऐसी स्थिति है?

भड़ास को एक पत्र मिला है. इस पत्र में राज एक्सप्रेस अखबार में कार्यरत कर्मियों की खराब हालत के बारे में जानकारी दी गई है. मध्यम और छोटे दर्जे के अखबारों में काम के हालात कैसे हैं और शोषण किस तरह होता है, यह कोई नई बात नहीं है. पर दुर्भाग्य यह कि इसमें काम करने वाले लोग भी खुलकर विरोध नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें भी येनकेन प्रकारेण पैसे चाहिए और परिवार चलाना है. इसी पापी पेट के कारण लोग अपनी नैतिकता, सरोकार, विचार सब भूल जाते हैं और अंततः जो नतीजा सामने आता है वो ये कि हम सब लूट तंत्र के खामोश या सक्रिय हिस्से बन जाते हैं. पत्र यहां इसलिए प्रकाशित किया जा रहा है ताकि राज प्रबंधन संज्ञान ले और चीजों को दुरुस्त करे. एडिटर, भड़ास4मीडिया

संपादक, भड़ास4मीडिया, विषय : मध्यप्रदेश में संचालित समाचार पत्र राज एक्सप्रेस के समस्त ब्यूरो कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों एवं रिपोटर्स की बदहाल स्थिति की जानकारी देने हेतु। श्रीमान्, वर्तमान समय में राज एक्सप्रेस समाचार पत्र प्रबंधन द्वारा प्रदेश भर के ब्यूरो कार्यालयों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। कार्यालयों में काम करने वालों को किसी भी प्रकार का वेतन नहीं दिया जा रहा है। राज प्रबंधन द्वारा सभी ब्यूरो ठेके पर संचालित किये गये हैं। इसके चलते इसमें काम करने वाले रिपोर्टरों की आर्थिक स्थिति खराब हो चली है। इसके अलावा राज एक्सप्रेस के मालिक के सनकीपन के चलते आये दिन तरह तरह के निर्णय लेकर कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है। हालत यह है कि राज एक्सप्रेस की इन्हीं नीतियों के चलते अब ज्यादातर ब्यूरो कार्यालय से कर्मचारी काम छोड़ रहे हैं। आगामी 30 नवम्बर को राज प्रबंधन द्वारा नये ब्यूरोचीफ की तलाश के लिए मीटिंग भी बुलाई जा रही है। आप से अनुरोध है कि उक्त समस्या को लेकर भडास4मीडिया पर समाचार प्रकाशित करें।

धन्यवाद।

भवदीय

राज प्रबंधन में कार्यरत एक कर्मचारी

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