क्‍या एक दिन के अवकाश से बदल जाएगा पुलिस का व्‍यवहार?

क्‍या एक दिन की साप्‍ताहिक अवकाश और कार्यशाला पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार ला सकती है. आजकल इसी बात को लेकर लखनऊ में खासा चर्चा है. लखनऊ में पुलिसकर्मियों के व्‍यवहार तथा कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए यह प्रयोग होने जा रहा है ताकि साल के सभी दिन काम करने वाले पुलिसकर्मियों को तनाव से मुक्ति मिल सके. और वे बेहतर काम करने के साथ बेहतर व्‍यवहार भी करें. इसकी शुरुआत लखनऊ के गोमतीनगर थाने से होगी.

पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है. पुलिस के व्‍यवहार में सुधार लाने के लिए कर्मियों को ट्रेनिंग एवं कार्यशाला के जरिए प्रशिक्षित किए जाने की भी योजना लागू की जा रही है. इस योजना के अंतर्गत बड़े जिलों को तीन लाख, मझोले जिलों को दो लाख तथा छोटे जिलों को एक लाख रुपये दिए जा रहे हैं ताकि वहां पुलिस के लिए कार्यशालाओं का आयोजन कर उन्‍हें अच्‍छे व्‍यवहार की ट्रेनिंग दिलाई जा सके.

इसी कड़ी में लखनऊ में अब पुलिसकर्मियों को अवकाश दिए जाने की तैयारी चल रही है. सरकारी तथा गैरसरकारी कार्यालयों में अधिकारी से लेकर चपरासी तक को साप्‍ताहिक अवकाश मिलता है, लेकिन पुलिस वाले इससे वंचित रहते हैं. वे हमेशा ड्यूटी पर रहते हैं. वे पर्व-त्‍योहारों पर भी अपने परिवारों से दूर रहे हैं, लिहाजा वे तनाव की स्थिति में पहुंच जाते हैं. काम का बोझ उनके काम के तरीके और व्‍यवहार पर भी असर डालता है. इसलिए अब सप्‍ताह में एक दिन अवकाश दिया जाएगा.

इस योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्‍ट के तौर पर गोमतीनगर थाने से एक जून से होने जा रही है. यहां तैनात सभी पुलिसवालों को सप्‍ताह में एक दिन अवकाश दिया जाएगा. अगर यह योजना सफल रही तो इसे अन्‍य थानों उसके बाद जिलों में लागू किया जाएगा. अक्सर सड़कों पर पुलिस वालों को मारपीट करते या फिर जनता से उलझते देखा जाता है. कभी-कभी तो वर्दी वाले आपस में ही उलझ पड़ते हैं. हालांकि इन सबके बाद भी एक बड़ा सवाल यह है कि हराम की चीजें और पैसे खाने की आदती हो चुकी यूपी पुलिस क्‍या एक अवकाश और ट्रेनिंग से सचमुच बदल जाएगी?

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